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अधिकारियों के पद घटाने का फैसला हवा में तीर चलाने जैसा : कटवाल
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विधायक बोले- फैसले से पहले विस्तृत अध्ययन और सभी पक्षों से चर्चा जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता विधायक एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीतराम कटवाल ने हिमाचल में प्रशासनिक अधिकारियों की संख्या कम करने संबंधी मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे हवा में तीर चलाने जैसा बताया।
कटवाल ने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के लिए बुनियादी स्तर पर छोटे पदों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन आईएएस, आईपीएस और आईएफएस जैसे अधिकारियों के पद घटाने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकता। इसके लिए विस्तृत अध्ययन और सभी संबंधित पक्षों से चर्चा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था प्रदेश की विकास जरूरतों के अनुसार बनाई जाती है। यदि अधिकारियों के पद घटाने हैं तो प्रशासनिक सुधार आयोग सहित संबंधित पक्षों की राय ली जानी चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार से भी चर्चा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कैडर कम होने से अधिकारियों की पदोन्नति पर भी असर पड़ सकता है।
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कटवाल ने कहा कि अधिकारियों की संख्या घटाकर 200 करोड़ रुपये बचाने के बयान से ऐसा नहीं लगता कि इस संबंध में कोई ठोस अध्ययन किया गया है। सरकार को संवेदनशील मामलों में जल्दबाजी से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर देने के साथ महिलाओं और अन्य वर्गों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सभी दलों और समाज के विभिन्न वर्गों से चर्चा के बाद ही ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता विधायक एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीतराम कटवाल ने हिमाचल में प्रशासनिक अधिकारियों की संख्या कम करने संबंधी मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे हवा में तीर चलाने जैसा बताया।
कटवाल ने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के लिए बुनियादी स्तर पर छोटे पदों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन आईएएस, आईपीएस और आईएफएस जैसे अधिकारियों के पद घटाने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकता। इसके लिए विस्तृत अध्ययन और सभी संबंधित पक्षों से चर्चा जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था प्रदेश की विकास जरूरतों के अनुसार बनाई जाती है। यदि अधिकारियों के पद घटाने हैं तो प्रशासनिक सुधार आयोग सहित संबंधित पक्षों की राय ली जानी चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार से भी चर्चा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कैडर कम होने से अधिकारियों की पदोन्नति पर भी असर पड़ सकता है।
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कटवाल ने कहा कि अधिकारियों की संख्या घटाकर 200 करोड़ रुपये बचाने के बयान से ऐसा नहीं लगता कि इस संबंध में कोई ठोस अध्ययन किया गया है। सरकार को संवेदनशील मामलों में जल्दबाजी से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर देने के साथ महिलाओं और अन्य वर्गों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सभी दलों और समाज के विभिन्न वर्गों से चर्चा के बाद ही ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने चाहिए।