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Bilaspur News: राजनीति, खेल, बागवानी, सेना, कला में बढ़ाया बिलासपुर का मान
Mon, 14 Apr 2025 11:04 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 14 Apr 2025 11:04 PM IST
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स्नेह लता।
हिमाचल दिवस विशेष
- संजय कुमार को परमवीर, हरिमन को पद्मश्री
- साधारण परिवार से निकली बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाया नाम
-घुमारवीं की फूलां चंदेल ने घट नृत्य को दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। जिले से राजनीति, खेल, बागवानी और सैन्य क्षेत्र में दिग्गजों ने प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार और हाल ही में पद्मश्री के लिए चयनित हरिमन शर्मा बिलासपुर से संबंध रखते हैं। खेलों में निधि शर्मा, रचना कुमारी और अखिल ठाकुर ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
पद्मश्री हरिमन शर्मा
पन्याला गांव के हरिमन शर्मा ने बागवानी के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हाल ही में वह पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित हुए हैं। हरिमन शर्मा का बागवानी में शोध करने का सफर 1999 में शुरू हुआ। गरीबी के बावजूद उन्होंने आम की खेती को छोड़कर सेब की तरफ रुख किया। शुरुआत में हर साल तीन से चार लाख रुपये का घाटा होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सेब की खेती में मेहनत की। उन्होंने आठ साल के शोध के बाद एचआरएमएन 99 किस्म को तैयार कर 40 से 46 डिग्री वाली भीषण गर्मी में सेब उत्पादन को सफल बनाया। हरिमन शर्मा ने आम पर कोहरे की मार पड़ने के बाद सेब उत्पादन को वैकल्पिक रूप में चुना। वैकल्पिक रूप से चुना सेब का उत्पादन हरिमन शर्मा को पद्मश्री तक ले गया।
कोच जगदीश कुमार
एक सरकारी स्कूल के डीपीई ने 100 से अधिक कुश्ती के राष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए हैं। परशुराम अवार्डी जगदीश कुमार ने हिमाचल की कुश्ती को नई पहचान दी है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले जगदीश कुमार आज भी देश के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने में लगे हुए हैं। उन्होंने अभी तक बतौर डीपीई 100 से अधिक खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया हैं। स्कूली राष्ट्रीय गेम्स में उनके शिष्यों ने दो स्वर्ण और दो कांस्य पदक हासिल किए हैं। वहीं सीनियर नेशनल में उनके शिष्य अजय ने रजत और एक महिला पहलवान ने कांस्य पदक हासिल किया है। प्रदेश भर में उन्होंने खिलाड़ियों को कुश्ती का प्रशिक्षण दिया है जो प्रदेश का प्रतिनिधित्व आज भी कर रहे हैं। जगदीश कुमार स्वयं राष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं। उनके सराहनीय कार्यों के चलते 2019 में उन्हें प्रदेश सरकार ने परशुराम अवार्ड से सम्मानित किया। जगदीश वर्तमान में मोरसिंघी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं और वहां भी खिलाड़ियों को तैयार करने में जुटे हैं।
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रचना कुमारी
ग्राम पंचायत निहान की रचना कुमारी ने 80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद सफलता के परचम लहराए हैं। अपने प्रयासों से प्रदेश दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम का गठन किया और झारखंड में राष्ट्रीय स्तर की दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करते हुए पहला स्थान हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। रचना लगातार अन्य दिव्यांगजनों के उत्थान के लिए कार्य कर रही हैं। रचना कुमारी बाल विकास परियोजना विभाग में आंगनबाड़ी वर्कर के तौर पर भी कार्य कर रही हैं। दिसंबर 2024 में उन्होंने प्रदेश स्तर की टीम का गठन किया जिसमें सात खिलाड़ी अकेले बिलासपुर से टीम में शामिल हैं। रचना कुमारी कजाकिस्तान में वॉलीबाल पैरा सीटिंग खेलों में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
निधि शर्मा
बिलासपुर की ग्राम पंचायत दियोध के गांव भजुण की निधि शर्मा ने साधारण परिवार से निकलकर कबड्डी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल का लोहा मनवाया है। विकट आर्थिक परिस्थितियों में निधि के माता-पिता ने बेटी को स्टेट हॉस्टल भेजा और हमेशा उसका उत्साह बढ़ाया। उनकी कड़ी मेहनत ने उन्हें इसका बेहतर परिणाम दिया। 7 अक्तूबर को भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता और इस टीम में बिलासपुर की निधि भी शामिल रहीं। स्वर्ण पदक हासिल कर निधि ने माता-पिता के साथ गांव और पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया। उनके कॅरियर की यह अभी तक सबसे बड़ी सफलता है। वर्तमान में वह राजस्थान पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर सेवाएं दे रही हैं और राजस्थान पुलिस कबड्डी टीम की ओर से खेल रही हैं।
संजय कुमार
सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार झंडूता के बकैण गांव से संबंध रखते हैं। संजय कुमार 13 जम्मू कश्मीर राइफल्स में राइफलमैन थे। 1999 में उन्होंने कारगिल युद्ध में एरिया फ्लैट टॉप पर कब्जा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिन -रात लगातार चले ऑपरेशन के दौरान दो गोलियां उनके घुटने में लगी थीं और दो शरीर के अन्य भाग में। वह अपने दो साथियों को भी खो चुके थे। इसके बावजूद मास्को वैली द्रास में प्वाइंट 4875 पर कब्जा किया। दुश्मन की यूनिवर्सल मशीनगन छीनकर तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था। उनके इस अदम्य साहस के चलते भारत सरकार ने उन्हें 26 जुलाई 1999 को सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
अखिल ठाकुर
किक बॉक्सिंग में अखिल ठाकुर एक जाना माना नाम है। बिलासपुर के देलग गांव से संबंध रखने वाले अखिल ने आठ साल की आयु में कराटे से शुरुआत की। 2014 में अखिल ने किक बॉक्सिंग शुरू की। अक्तूबर 2024 में कंबोडिया में आयोजित एशियन किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। इससे पहले 2022 बैंकॉक में आयोजित एशियन किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप ने कांस्य पदक जीता है। फरवरी 2022 में दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता है। पुर्तगाल में आयोजित वाको किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप और तुर्किए ओपन किक बॉक्सिंग विश्व कप में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा सीनियर नेशनल किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण, इंडियन ओपन किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। वहीं हाल ही में थाईलैंड में आयोजित विश्व कप में उन्होंने रजत पदक जीता है।
अंतरराष्ट्रीय नृत्यांगना फूलां चंदेल
घुमारवीं की कोठी पंचायत के सोई गांव में 10 मई 1963 को जन्मी फूलां चंदेल ने अपना जीवन लोक नृत्य के अभ्युत्थान के लिए समर्पित किया। उन्होंने लोक घट नृत्य को अंतर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाई। फूलां चंदेल हिमालय श्री, मातृ सम्मान, शिखर सम्मान, सर्वश्रेष्ठ नृत्यांगना के अलावा कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुकी हैं। लोक घट नृत्य को अंतर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में इस कलाकार को गर्व है।
अंतर राष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ी एवं कोच स्नेहलता
बिलासपुर की माेरसिंघी निवासी स्नेहलता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की हैंडबाल टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वहीं अब मोरसिंघी में हैंडबाल नर्सरी चला रही है। इस नर्सरी में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर की करीब दो दर्जन महिला हैंडबाल खिलाड़ी तैयार कर चुकी हैं। जो देश का प्रतिनिधित्व कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रही हैं।
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- संजय कुमार को परमवीर, हरिमन को पद्मश्री
- साधारण परिवार से निकली बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाया नाम
-घुमारवीं की फूलां चंदेल ने घट नृत्य को दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। जिले से राजनीति, खेल, बागवानी और सैन्य क्षेत्र में दिग्गजों ने प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार और हाल ही में पद्मश्री के लिए चयनित हरिमन शर्मा बिलासपुर से संबंध रखते हैं। खेलों में निधि शर्मा, रचना कुमारी और अखिल ठाकुर ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
पद्मश्री हरिमन शर्मा
पन्याला गांव के हरिमन शर्मा ने बागवानी के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हाल ही में वह पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित हुए हैं। हरिमन शर्मा का बागवानी में शोध करने का सफर 1999 में शुरू हुआ। गरीबी के बावजूद उन्होंने आम की खेती को छोड़कर सेब की तरफ रुख किया। शुरुआत में हर साल तीन से चार लाख रुपये का घाटा होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सेब की खेती में मेहनत की। उन्होंने आठ साल के शोध के बाद एचआरएमएन 99 किस्म को तैयार कर 40 से 46 डिग्री वाली भीषण गर्मी में सेब उत्पादन को सफल बनाया। हरिमन शर्मा ने आम पर कोहरे की मार पड़ने के बाद सेब उत्पादन को वैकल्पिक रूप में चुना। वैकल्पिक रूप से चुना सेब का उत्पादन हरिमन शर्मा को पद्मश्री तक ले गया।
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कोच जगदीश कुमार
एक सरकारी स्कूल के डीपीई ने 100 से अधिक कुश्ती के राष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए हैं। परशुराम अवार्डी जगदीश कुमार ने हिमाचल की कुश्ती को नई पहचान दी है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले जगदीश कुमार आज भी देश के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने में लगे हुए हैं। उन्होंने अभी तक बतौर डीपीई 100 से अधिक खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया हैं। स्कूली राष्ट्रीय गेम्स में उनके शिष्यों ने दो स्वर्ण और दो कांस्य पदक हासिल किए हैं। वहीं सीनियर नेशनल में उनके शिष्य अजय ने रजत और एक महिला पहलवान ने कांस्य पदक हासिल किया है। प्रदेश भर में उन्होंने खिलाड़ियों को कुश्ती का प्रशिक्षण दिया है जो प्रदेश का प्रतिनिधित्व आज भी कर रहे हैं। जगदीश कुमार स्वयं राष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं। उनके सराहनीय कार्यों के चलते 2019 में उन्हें प्रदेश सरकार ने परशुराम अवार्ड से सम्मानित किया। जगदीश वर्तमान में मोरसिंघी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं और वहां भी खिलाड़ियों को तैयार करने में जुटे हैं।
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ग्राम पंचायत निहान की रचना कुमारी ने 80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद सफलता के परचम लहराए हैं। अपने प्रयासों से प्रदेश दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम का गठन किया और झारखंड में राष्ट्रीय स्तर की दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करते हुए पहला स्थान हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। रचना लगातार अन्य दिव्यांगजनों के उत्थान के लिए कार्य कर रही हैं। रचना कुमारी बाल विकास परियोजना विभाग में आंगनबाड़ी वर्कर के तौर पर भी कार्य कर रही हैं। दिसंबर 2024 में उन्होंने प्रदेश स्तर की टीम का गठन किया जिसमें सात खिलाड़ी अकेले बिलासपुर से टीम में शामिल हैं। रचना कुमारी कजाकिस्तान में वॉलीबाल पैरा सीटिंग खेलों में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
निधि शर्मा
बिलासपुर की ग्राम पंचायत दियोध के गांव भजुण की निधि शर्मा ने साधारण परिवार से निकलकर कबड्डी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल का लोहा मनवाया है। विकट आर्थिक परिस्थितियों में निधि के माता-पिता ने बेटी को स्टेट हॉस्टल भेजा और हमेशा उसका उत्साह बढ़ाया। उनकी कड़ी मेहनत ने उन्हें इसका बेहतर परिणाम दिया। 7 अक्तूबर को भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता और इस टीम में बिलासपुर की निधि भी शामिल रहीं। स्वर्ण पदक हासिल कर निधि ने माता-पिता के साथ गांव और पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया। उनके कॅरियर की यह अभी तक सबसे बड़ी सफलता है। वर्तमान में वह राजस्थान पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर सेवाएं दे रही हैं और राजस्थान पुलिस कबड्डी टीम की ओर से खेल रही हैं।
संजय कुमार
सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार झंडूता के बकैण गांव से संबंध रखते हैं। संजय कुमार 13 जम्मू कश्मीर राइफल्स में राइफलमैन थे। 1999 में उन्होंने कारगिल युद्ध में एरिया फ्लैट टॉप पर कब्जा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिन -रात लगातार चले ऑपरेशन के दौरान दो गोलियां उनके घुटने में लगी थीं और दो शरीर के अन्य भाग में। वह अपने दो साथियों को भी खो चुके थे। इसके बावजूद मास्को वैली द्रास में प्वाइंट 4875 पर कब्जा किया। दुश्मन की यूनिवर्सल मशीनगन छीनकर तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था। उनके इस अदम्य साहस के चलते भारत सरकार ने उन्हें 26 जुलाई 1999 को सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
अखिल ठाकुर
किक बॉक्सिंग में अखिल ठाकुर एक जाना माना नाम है। बिलासपुर के देलग गांव से संबंध रखने वाले अखिल ने आठ साल की आयु में कराटे से शुरुआत की। 2014 में अखिल ने किक बॉक्सिंग शुरू की। अक्तूबर 2024 में कंबोडिया में आयोजित एशियन किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। इससे पहले 2022 बैंकॉक में आयोजित एशियन किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप ने कांस्य पदक जीता है। फरवरी 2022 में दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता है। पुर्तगाल में आयोजित वाको किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप और तुर्किए ओपन किक बॉक्सिंग विश्व कप में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा सीनियर नेशनल किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण, इंडियन ओपन किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। वहीं हाल ही में थाईलैंड में आयोजित विश्व कप में उन्होंने रजत पदक जीता है।
अंतरराष्ट्रीय नृत्यांगना फूलां चंदेल
घुमारवीं की कोठी पंचायत के सोई गांव में 10 मई 1963 को जन्मी फूलां चंदेल ने अपना जीवन लोक नृत्य के अभ्युत्थान के लिए समर्पित किया। उन्होंने लोक घट नृत्य को अंतर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाई। फूलां चंदेल हिमालय श्री, मातृ सम्मान, शिखर सम्मान, सर्वश्रेष्ठ नृत्यांगना के अलावा कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुकी हैं। लोक घट नृत्य को अंतर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में इस कलाकार को गर्व है।
अंतर राष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ी एवं कोच स्नेहलता
बिलासपुर की माेरसिंघी निवासी स्नेहलता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की हैंडबाल टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वहीं अब मोरसिंघी में हैंडबाल नर्सरी चला रही है। इस नर्सरी में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर की करीब दो दर्जन महिला हैंडबाल खिलाड़ी तैयार कर चुकी हैं। जो देश का प्रतिनिधित्व कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रही हैं।

स्नेह लता।

स्नेह लता।

स्नेह लता।

स्नेह लता।

स्नेह लता।

स्नेह लता।