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Bilaspur News: आरटीआई से सूचना न मिलने पर फोरलेन प्रभावितों में रोष

Sat, 11 May 2024 11:15 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 11 May 2024 11:15 PM IST
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Anger among four lane affected people over not getting information from RTI
-आश्वासन के बाद भी नहीं हुआ समस्या का हल
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-प्रशासन ने नहीं बदला रवैया तो सड़कों पर उतरने को विवश होंगे लोग

संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। निर्माणाधीन शिमला-मटौर फोरलेन में प्रभावितों और विस्थापितों की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाएं न मिलने से लोगों में रोष बढ़ रहा है। विस्थापितों का कहना है कि उपायुक्त की ओर से उन्हें इसके लिए करीब दस दिन का समय दिया गया था, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

शिमला-मटौर विस्थापित एवं प्रभावित संघर्ष समिति के प्रधान बाबू राम सिसोदिया, उप प्रधान कमलेश नड्डा, महासचिव कुलबीर भड़ोल ने कहा कि प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं भू अर्जन अधिकारी आरटीआई द्वारा मांगी सूचनाओं का जवाब नहीं दे रहे हैं। इसके चलते 28 अप्रैल को समिति ने मुख्यालय बिलासपुर में अपना विरोध प्रदर्शन कर रैली निकाली थी और उपायुक्त से मूल विषयों पर चर्चा की थी। इसके बाद उपायुक्त ने समस्या के समाधान के लिए 10 दिन का समय मांगा था। इसी दौरान मौके पर सड़क के दोनों ओर 50-50 मीटर पर भूमि का सीमांकन कर बुर्जियों को स्थापित कर उन पर आरडी नंबर अंकित करने का भी आश्वासन दिया था, लेकिन 14 दिन बीत जाने पर भी मौके पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई और न ही उपरोक्त परियोजना से संबंधित असल व मूल दस्तावेजों को उपलब्ध करवाया जा रहा है। विस्थापितों और प्रभावितों द्वारा परियोजना से संबंधित प्रथम अपीलीय अधिकारी और भू अर्जन अधिकारी के समक्ष दायर अपीलों पर कोई फैसला सुनाया जा रहा है, जबकि उक्त अपीलों से संबंधित सारी सुनवाई अधिवक्ता के माध्यम से पूरी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि परियोजना से संबंधित 14 मुहालों के करीब 250 लोगों ने आरटीआई के माध्यम से रोड़ एलाइनमेंट प्लान, असल भूमि अधिग्रहण प्लान, राइट ऑफ वे, ले आउट प्लान सहित अन्य जानकारियां मांगी हैं, ताकि अधिग्रहित की गई भूमि व लोगों की शेष बची निजी भूमि का पता चल सके और लोग अपनी शेष बची निजी भूमि में नियमानुसार मकानों आदि का निर्माण कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन लोगों की इन मूल मांगों को अनदेखा कर गुमराह करने में लगा है जो उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी यदि प्रशासन ने अपना रवैया नहीं बदला तो लोग सड़कों पर उतरने के लिए विवश हो जाएंगे।
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