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जिले में गहराया जल संकट, लोग परेशान
Updated Wed, 30 May 2018 11:20 PM IST
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बिलासपुर। जिले के विभिन्न इलाकों में पेयजल योजनाओं के ठप होने से पानी का संकट गहरा गया है। जुखाला में अली खड्ड के सूख जाने से पानी के लिए हाहाकार मच गया है। 12 गांव पानी न आने से परेशान हैं। कई पेयजल योजनाओं के जलस्तर में 25 से 75 प्रतिशत की कमी आ गई है। जबकि कई सिंचाई योजनाएं बंद हो गई हैं। इससे सब्जियां व फसलें सूखे की चपेट में आनी शुरू हो गई हैं।
जिले के घुमारवीं, झंडूता, नयनादेवी, स्वारघाट, जुखाला, कुठेड़ा, बरमाणा, भराड़ी, बरठीं, शाहतलाई में उठाऊ पेयजल योजनाओं और प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने से भारी जल संकट पैदा हो गया है। जिले की पेयजल योजनाओं में 25 से 50 फीसदी तक की पानी की गिरावट आ गई है। कई क्षेत्रों में लोगों को टैंकरों के पानी से गुजारा करना पड़ रहा है।
घुमारवीं विधानसभा क्षेत्रों की सीर खड्ड पर बनी पेयजल योजनाओं का जलस्तर घटने से क्षेत्र में पानी की किल्लत पैदा हो गई है। पानी का संकट दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार दोनों विधानसभा क्षेत्रों घुमारवीं व झंडूता में 136 पेयजल योजनाओं से लोगों को पानी की सप्लाई दी जाती है, लेकिन भयंकर गर्मी के कारण क्षेत्र की तीन दर्जन पेयजल योजनाओं में जलस्तर घटने से पानी का संकट गहरा गया है। इन पेयजल योजनाओं में 25 से 75 प्रतिशत जलस्तर कम हो गया है। इसके कारण पानी की किल्लत बढ़ रही है। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 45 सिंचाई योजनाओं में से 30 योजनाओं का ही लोगों को लाभ मिल रहा है, जबकि 15 योजनाएं बंद पड़ी हैं।
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ग्रामीणों श्रवण कुमार, भगतराम, सुभाष, जगदीश, जगतराम, सीताराम, चिंता देवी सहित अन्यों का कहना है कि फोरलेन निर्माण कंपनी की लापरवाही से भी कुछ जगहों पर पानी का संकट पैदा हो गया है। मलबे व अन्य अनियमितताओं के चलते पुराने प्राकृतिक जलस्रोत सूख गए हैं। जबकि कई सूखने की कगार पर हैं।
आईपीएच विभाग बिलासपुर के अधिशाषी अभियंता अरविंद वर्मा का कहना है कि पानी के प्राकृतिक स्रोत सूख गए हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया है कि पानी को व्यर्थ न गंवाए अन्यथा आने वाले समय में समस्या ओर भी भयावह हो सकती है।
झंडूता क्षेत्र के कोटधार में भी लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कोटधार केजेजवी, मरोतन, बल्ह चलोग, फुफली, चुलाना आदि कई गांवों में कई दिनों से पानी की भारी किल्लत है। यहां लोगों को पिछले 15 दिनों से पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। पानी के लिए लोग दर-दर भटकने को विवश हैं।
जुखाला क्षेत्र के 12 गांवों में पेयजल आपूर्ति पिछले लगभग दस दिनों से पूरी तरह से ठप है। हालत ऐसी है कि स्थानीय लोगों को टैंकरों में पानी लाकर अपनी और मवेशियों की प्यास बुझानी पड़ रही है। अली खड्ड में बनी उठाऊ पेयजल योजना जुखाला पूरी तरह से सूख चुकी है। इसकी वजह से क्षेत्र की तीन हजार से भी अधिक आबादी पानी के संकट का सामना कर रही है। उठाऊ पेयजल योजना जुखाला से आशामझारी, जुखाला, नालग, कोयटा, बानण, धमथल, गसौड, बटोली, पधाणु, रिडी, रिहान और नलवाड़ गांव के लिए पेयजल की आपूर्ति होती है।
ग्राम पंचायत बड़गांव के गांव खिल, फटोह, झरेड़ी, मरीणी, निहाण, बलोह व री में लगभग दो सप्ताह से पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। विभाग की बेरुखी के कारण ग्रामीणों को साथ लगती खड्ड के पानी का प्रयोग करना पड़ रहा है।
वहीं बरमाणा में सैलग जुराती, गाहर टीकरी, नापेड़ा, बलौह, धौण कोठी, गुग्गा भटेड़ में लोगों को पानी की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पानी की योजनाएं पूरी तरह से सूख चुकी हैं। ग्रामीणों को पिछले कई दिनों से पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। लोगों का पूरा दिन पानी का प्रबंध करने में ही गुजरना पड़ रहा है।
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जिले के घुमारवीं, झंडूता, नयनादेवी, स्वारघाट, जुखाला, कुठेड़ा, बरमाणा, भराड़ी, बरठीं, शाहतलाई में उठाऊ पेयजल योजनाओं और प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने से भारी जल संकट पैदा हो गया है। जिले की पेयजल योजनाओं में 25 से 50 फीसदी तक की पानी की गिरावट आ गई है। कई क्षेत्रों में लोगों को टैंकरों के पानी से गुजारा करना पड़ रहा है।
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घुमारवीं विधानसभा क्षेत्रों की सीर खड्ड पर बनी पेयजल योजनाओं का जलस्तर घटने से क्षेत्र में पानी की किल्लत पैदा हो गई है। पानी का संकट दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार दोनों विधानसभा क्षेत्रों घुमारवीं व झंडूता में 136 पेयजल योजनाओं से लोगों को पानी की सप्लाई दी जाती है, लेकिन भयंकर गर्मी के कारण क्षेत्र की तीन दर्जन पेयजल योजनाओं में जलस्तर घटने से पानी का संकट गहरा गया है। इन पेयजल योजनाओं में 25 से 75 प्रतिशत जलस्तर कम हो गया है। इसके कारण पानी की किल्लत बढ़ रही है। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 45 सिंचाई योजनाओं में से 30 योजनाओं का ही लोगों को लाभ मिल रहा है, जबकि 15 योजनाएं बंद पड़ी हैं।
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ग्रामीणों श्रवण कुमार, भगतराम, सुभाष, जगदीश, जगतराम, सीताराम, चिंता देवी सहित अन्यों का कहना है कि फोरलेन निर्माण कंपनी की लापरवाही से भी कुछ जगहों पर पानी का संकट पैदा हो गया है। मलबे व अन्य अनियमितताओं के चलते पुराने प्राकृतिक जलस्रोत सूख गए हैं। जबकि कई सूखने की कगार पर हैं।
आईपीएच विभाग बिलासपुर के अधिशाषी अभियंता अरविंद वर्मा का कहना है कि पानी के प्राकृतिक स्रोत सूख गए हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया है कि पानी को व्यर्थ न गंवाए अन्यथा आने वाले समय में समस्या ओर भी भयावह हो सकती है।
झंडूता क्षेत्र के कोटधार में भी लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कोटधार केजेजवी, मरोतन, बल्ह चलोग, फुफली, चुलाना आदि कई गांवों में कई दिनों से पानी की भारी किल्लत है। यहां लोगों को पिछले 15 दिनों से पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। पानी के लिए लोग दर-दर भटकने को विवश हैं।
जुखाला क्षेत्र के 12 गांवों में पेयजल आपूर्ति पिछले लगभग दस दिनों से पूरी तरह से ठप है। हालत ऐसी है कि स्थानीय लोगों को टैंकरों में पानी लाकर अपनी और मवेशियों की प्यास बुझानी पड़ रही है। अली खड्ड में बनी उठाऊ पेयजल योजना जुखाला पूरी तरह से सूख चुकी है। इसकी वजह से क्षेत्र की तीन हजार से भी अधिक आबादी पानी के संकट का सामना कर रही है। उठाऊ पेयजल योजना जुखाला से आशामझारी, जुखाला, नालग, कोयटा, बानण, धमथल, गसौड, बटोली, पधाणु, रिडी, रिहान और नलवाड़ गांव के लिए पेयजल की आपूर्ति होती है।
ग्राम पंचायत बड़गांव के गांव खिल, फटोह, झरेड़ी, मरीणी, निहाण, बलोह व री में लगभग दो सप्ताह से पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। विभाग की बेरुखी के कारण ग्रामीणों को साथ लगती खड्ड के पानी का प्रयोग करना पड़ रहा है।
वहीं बरमाणा में सैलग जुराती, गाहर टीकरी, नापेड़ा, बलौह, धौण कोठी, गुग्गा भटेड़ में लोगों को पानी की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पानी की योजनाएं पूरी तरह से सूख चुकी हैं। ग्रामीणों को पिछले कई दिनों से पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। लोगों का पूरा दिन पानी का प्रबंध करने में ही गुजरना पड़ रहा है।