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दूसरे दिन ही पकड़ा गया कैशलेस मंडी पर प्रशासन का झूठ
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
Updated Fri, 23 Dec 2016 12:13 AM IST
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कई सब्जी और फल विक्रेताओं का बना दिया पेटीएम कार्ड पर नहीं हैं उनके पास स्मार्टफोन
- फोटो : sonipat
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जिला प्रशासन सोनीपत को प्रदेश में सबसे पहले कैशलेस जिला बनाने की जल्दबाजी में दिख रहा है। एक दिन पहले प्रशासन ने सब्जी मंडी को कैशलेस घोषित किया था, लेकिन धरातल पर हकीकत अभी जुदा है। यहां बहुत से दुकानदारों के पास या तो स्मार्टफोन नहीं हैं या उन्हें चलाने नहीं आते। ऐसे में शत प्रतिशत कैशलेस के लिए प्रशासन को अभी एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा, साथ में दुकानदारों के साथ-साथ ग्राहकों को भी साथ देना होगा। साथ ही बुनियादी दिक्कतों को भी अधिकारियों को दूर करना पड़ेगा।
सोनीपत को प्रदेश में सबसे पहले कैशलेस बनाने के लिए सरकार और प्रशासन ने विशेष योजना तैयार की है। प्रदेश सरकार के अतिरिक्त सचिव पीके दास को जिले का कैशलेस अभियान के तहत नोडल अधिकारी बनाया हुआ है। प्रशासन ई-दिशा केंद्र, नगर निगम, एसडीएम आफिस व तहसील को प्रशासन कैशलेस घोषित कर चुका है। अब सब्जी मंडी को कैशलेस करने पर जोर दिया जा रहा है। यहां तक कि सांसद रमेश कौशिक से लेकर कविता जैन तक पेटीएम से भुगतान कर पपीते खरीद चुकी हैं। डीसी की ओर से भी पांच दुकानदारों को सरकारी योजना के तहत स्मार्टफोन इनाम के तौर पर दिया जा चुका है। बुधवार को प्रशासन ने सब्जी मंडी को कैशलेस घोषित कर दिया। हकीकत जानने के लिए गुरुवार को अमर उजाला की टीम मंडी में पहुंची और व्यापारियों व मासाखोरों से रूबरू हुई। यहां पता चला कि वास्तविकता हकीकत से परे है।
कैसे इस्तेमाल करें पेटीएम कार्ड
सब्जी विक्रेता राजेश ने बताया कि वह सब्जी मंडी में कई सालों से सब्जी बेचता है। प्रशासन ने उनका पेटीएम कार्ड तो बना दिया, लेकिन न तो उनके पास स्मार्टफोन ही नहीं है। अगर मोबाइल ले भी लिया तो इसे चलाना नहीं आता। छोटे दुकानदार हैं और सब्जी बेचकर हर रोज पैसा देते हैं और खरीदते हैं। कैशलेस का उन्हें कोई फायदा नहीं होगा। इसीलिए कैश से ही वह सब्जी बेचते और खरीदते हैं।
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ग्राहक ही नहीं आता, कैसे करें कैशलेस
सब्जी मंडी में पपीता बेचने वाले रेहड़ी संचालक कुलदीप ने बताया कि उसका पेटीएम कार्ड बन गया है, लेकिन उसके पास कोई मोबाइल नहीं है। इसके लिए मोबाइल खरीदना पड़ेगा। पेटीएम के लिए अगर उसने मोबाइल भी खरीद लिया तो कोई ग्राहक पेटीएम नहीं करेगा, क्योंकि यहां ज्यादातर ग्राहक मध्यमवर्गी या गृहिणी होती हैं, जिन्हें कैशलेस ट्रांजेक्शन के बारे में इतनी जानकारी नहीं है।
छोटे दुकानदारों को कोई फायदा नहीं
सब्जी विक्रेता कृष्ण ने कहा कि कैशलेस का छोटे दुकानदार को काई फायदा नहीं है, क्योंकि वह पांच रुपये से लेकर 20-20 रुपये तक करके दिन में सब्जियां बेचते हैं। अगर पेटीएम से सभी ग्राहकों की पेमेंट लेने लग जाएंगे तो तीसरे दिन उन्हें भी जाकर बैंक के बाहर कैश के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ेगा क्योंकि जरूरत की चीजें खरीदने के लिए उन्हें तो पैसा कैश में चाहिए।
40 प्रतिशत दुकानदार नहीं ज्यादा पढ़े-लिखे
सब्जी विक्रेता अशोक ने बताया कि सब्जी मंडी में करीब 40 प्रतिशत दुकानदार ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। वे सब्जी का भाव देखकर ग्राहक से पैसे तो ले सकते हैं, लेकिन कैशलेस लेनदेन नहीं कर सकते हैं। उन्हें कैशलेस करना तो दूर की बात है, अभी साधारण मोबाइल फोन ही चलाना नहीं आता। अगर पेटीएम करें तो दो दिन बाद बैंक से पैसे निकलवाने पड़ेंगे। अगर पीओएस मशीन लें तो उसका टैक्स अलग और बैंकों की अनेक शर्तें पूरी करनी पड़ेंगी।
इंटरनेट हो जाता है कई बार बंद, ग्राहक क्या इंतजार करेगा
सब्जी मंडी में सब्जी खरीदने के लिए आए कुमासपुर निवासी ग्राहक संदीप कुमार ने कहा कि आम आदमी के लिए कैशलेस का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि इससे आम आदमी को कोई फायदा ही नहीं। इससे नुकसान ही दिख रहा है क्योंकि पहले तो आम आदमी को इसके लिए स्मार्टफोन लेना पड़ेगा और इंटरनेट का कनेक्शन करवाना पड़ेगा। आदमी कैश से किसी भी समय कुछ भी खरीद सकता है। इसमें अधिकतर तो सर्वर ही डाउन रहता है। क्या ग्राहक वहीं खड़ा रहेगा और इंतजार करेगा।
डीसी केएम पांडुरंग से सीधी बातचीत
सवाल : प्रशासन ने दावा किया है कि सब्जी मंडी में सारा लेनदेन कैशलेस हो गया है, जबकि हकीकत अभी अलग है।
जवाब : 150 मांसाखोरों व 50 आढ़तियों को कैलशलेस किया जा चुका है।
सवाल : कई मांसाखोर ऐसे मिले, उन्हें पेटीएम कार्ड तो मिल गया, लेकिन न तो स्मार्टफोन है और न ही चलाना आता है।
जवाब : कार्ड देते समय पेटीएम चलाना सिखाया था। अगर किसी के पास स्मार्टफोन नहीं है तो वह लोकल फोन से भी पैसे ट्रांसफर कर सकता है। इसके अलावा प्रशासन इनामी योजना के तहत पांच दुकानदारों को स्मार्टफोन दे चुका है। जो दुकानदार 100 कैशलेस लेनदेन करेगा, उसे मोबाइल फोन दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए अधिकारी की रिपोर्ट अनिवार्य है।
सवाल : सब्जी मंडी में काफी मांसाखोर ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। ऐसे में कैसे कैशलेस लेनदेन करेंगे?
जवाब : प्रशासन की ओर से दुकानदारों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
ये कैसी इनामी योजना
प्रशासन ने 100 कैशलेस ट्रांजेक्शन करने वाले दुकानदारों को स्मार्टफोन देने की इनामी योजना बनाई है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब दुकानदारों के पास स्मार्टफोन हैं ही नहीं तो वे कैसे कैशलेस ट्रांजेक्शन करेंगे।
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सोनीपत को प्रदेश में सबसे पहले कैशलेस बनाने के लिए सरकार और प्रशासन ने विशेष योजना तैयार की है। प्रदेश सरकार के अतिरिक्त सचिव पीके दास को जिले का कैशलेस अभियान के तहत नोडल अधिकारी बनाया हुआ है। प्रशासन ई-दिशा केंद्र, नगर निगम, एसडीएम आफिस व तहसील को प्रशासन कैशलेस घोषित कर चुका है। अब सब्जी मंडी को कैशलेस करने पर जोर दिया जा रहा है। यहां तक कि सांसद रमेश कौशिक से लेकर कविता जैन तक पेटीएम से भुगतान कर पपीते खरीद चुकी हैं। डीसी की ओर से भी पांच दुकानदारों को सरकारी योजना के तहत स्मार्टफोन इनाम के तौर पर दिया जा चुका है। बुधवार को प्रशासन ने सब्जी मंडी को कैशलेस घोषित कर दिया। हकीकत जानने के लिए गुरुवार को अमर उजाला की टीम मंडी में पहुंची और व्यापारियों व मासाखोरों से रूबरू हुई। यहां पता चला कि वास्तविकता हकीकत से परे है।
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कैसे इस्तेमाल करें पेटीएम कार्ड
सब्जी विक्रेता राजेश ने बताया कि वह सब्जी मंडी में कई सालों से सब्जी बेचता है। प्रशासन ने उनका पेटीएम कार्ड तो बना दिया, लेकिन न तो उनके पास स्मार्टफोन ही नहीं है। अगर मोबाइल ले भी लिया तो इसे चलाना नहीं आता। छोटे दुकानदार हैं और सब्जी बेचकर हर रोज पैसा देते हैं और खरीदते हैं। कैशलेस का उन्हें कोई फायदा नहीं होगा। इसीलिए कैश से ही वह सब्जी बेचते और खरीदते हैं।
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ग्राहक ही नहीं आता, कैसे करें कैशलेस
सब्जी मंडी में पपीता बेचने वाले रेहड़ी संचालक कुलदीप ने बताया कि उसका पेटीएम कार्ड बन गया है, लेकिन उसके पास कोई मोबाइल नहीं है। इसके लिए मोबाइल खरीदना पड़ेगा। पेटीएम के लिए अगर उसने मोबाइल भी खरीद लिया तो कोई ग्राहक पेटीएम नहीं करेगा, क्योंकि यहां ज्यादातर ग्राहक मध्यमवर्गी या गृहिणी होती हैं, जिन्हें कैशलेस ट्रांजेक्शन के बारे में इतनी जानकारी नहीं है।
छोटे दुकानदारों को कोई फायदा नहीं
सब्जी विक्रेता कृष्ण ने कहा कि कैशलेस का छोटे दुकानदार को काई फायदा नहीं है, क्योंकि वह पांच रुपये से लेकर 20-20 रुपये तक करके दिन में सब्जियां बेचते हैं। अगर पेटीएम से सभी ग्राहकों की पेमेंट लेने लग जाएंगे तो तीसरे दिन उन्हें भी जाकर बैंक के बाहर कैश के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ेगा क्योंकि जरूरत की चीजें खरीदने के लिए उन्हें तो पैसा कैश में चाहिए।
40 प्रतिशत दुकानदार नहीं ज्यादा पढ़े-लिखे
सब्जी विक्रेता अशोक ने बताया कि सब्जी मंडी में करीब 40 प्रतिशत दुकानदार ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। वे सब्जी का भाव देखकर ग्राहक से पैसे तो ले सकते हैं, लेकिन कैशलेस लेनदेन नहीं कर सकते हैं। उन्हें कैशलेस करना तो दूर की बात है, अभी साधारण मोबाइल फोन ही चलाना नहीं आता। अगर पेटीएम करें तो दो दिन बाद बैंक से पैसे निकलवाने पड़ेंगे। अगर पीओएस मशीन लें तो उसका टैक्स अलग और बैंकों की अनेक शर्तें पूरी करनी पड़ेंगी।
इंटरनेट हो जाता है कई बार बंद, ग्राहक क्या इंतजार करेगा
सब्जी मंडी में सब्जी खरीदने के लिए आए कुमासपुर निवासी ग्राहक संदीप कुमार ने कहा कि आम आदमी के लिए कैशलेस का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि इससे आम आदमी को कोई फायदा ही नहीं। इससे नुकसान ही दिख रहा है क्योंकि पहले तो आम आदमी को इसके लिए स्मार्टफोन लेना पड़ेगा और इंटरनेट का कनेक्शन करवाना पड़ेगा। आदमी कैश से किसी भी समय कुछ भी खरीद सकता है। इसमें अधिकतर तो सर्वर ही डाउन रहता है। क्या ग्राहक वहीं खड़ा रहेगा और इंतजार करेगा।
डीसी केएम पांडुरंग से सीधी बातचीत
सवाल : प्रशासन ने दावा किया है कि सब्जी मंडी में सारा लेनदेन कैशलेस हो गया है, जबकि हकीकत अभी अलग है।
जवाब : 150 मांसाखोरों व 50 आढ़तियों को कैलशलेस किया जा चुका है।
सवाल : कई मांसाखोर ऐसे मिले, उन्हें पेटीएम कार्ड तो मिल गया, लेकिन न तो स्मार्टफोन है और न ही चलाना आता है।
जवाब : कार्ड देते समय पेटीएम चलाना सिखाया था। अगर किसी के पास स्मार्टफोन नहीं है तो वह लोकल फोन से भी पैसे ट्रांसफर कर सकता है। इसके अलावा प्रशासन इनामी योजना के तहत पांच दुकानदारों को स्मार्टफोन दे चुका है। जो दुकानदार 100 कैशलेस लेनदेन करेगा, उसे मोबाइल फोन दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए अधिकारी की रिपोर्ट अनिवार्य है।
सवाल : सब्जी मंडी में काफी मांसाखोर ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। ऐसे में कैसे कैशलेस लेनदेन करेंगे?
जवाब : प्रशासन की ओर से दुकानदारों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
ये कैसी इनामी योजना
प्रशासन ने 100 कैशलेस ट्रांजेक्शन करने वाले दुकानदारों को स्मार्टफोन देने की इनामी योजना बनाई है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब दुकानदारों के पास स्मार्टफोन हैं ही नहीं तो वे कैसे कैशलेस ट्रांजेक्शन करेंगे।