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Sonipat: शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने पर प्राध्यापिका अंजू का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन
Fri, 26 Aug 2022 03:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 26 Aug 2022 03:10 AM IST
सार
शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु प्राध्यापिका अंजू दहिया को सम्मानित करेंगी। अंजू दहिया राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित होने वाली प्रदेश से एकमात्र प्राध्यापिका है।
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प्राध्यापिका अंजू दहिया।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सराहनीय कार्य को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने प्राध्यापिका अंजू दहिया का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया है। शिक्षक दिवस पर उन्हें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु सम्मानित करेंगी। अंजू दहिया हरियाणा की एकमात्र प्राध्यापिका है, जिन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। इस उपलब्धि पर सोनीपत जिला शिक्षा अधिकारी कौशल्या आर्य ने प्राध्यापिका अंजू दहिया को बधाई दी है।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बड़वासनी में रसायन शास्त्र विषय की प्राध्यापिका अंजू दहिया ने विषय को आसान बनाने की दिशा में सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने रसायन शास्त्र विषय को खेल व कविता जैसी गतिविधियों से आसान बना दिया है। विद्यार्थी गतिविधियों से विषय को समझकर लंबे समय तक याद रख पाते हैं। सोनीपत के सेक्टर-23 निवासी प्राध्यापिका अंजू दहिया का कहना है कि बचपन से वह पढ़ाई के साथ अभिनव का प्रयोग करती थी।
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उनमें हमेशा कुछ नया करने की इच्छा जागृत होती थी। शिक्षा के क्षेत्र में आकर विद्यार्थियों की समस्या को समझा। जिसका समाधान करने के लिए विद्यार्थियों के साथ समय बातचीत कर विषय को सरल बनाने के लिए उनके साथ समय बिताया। रसायन शास्त्र विषय को कविता व खेल गतिविधियों में बांटा।
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प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता करवाकर बच्चों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया। जिसका काफी फायदा मिला। जो विद्यार्थियों ने खेल गतिविधियों से सीखा वो उन्हें याद रहता था। जिससे उन्हें विषय आसान लगने लगा। प्राध्यापिका अंजू दहिया के पति मनीष दहिया भी शिक्षक है। प्राध्यापिका अंजू ने 2013 में शिक्षा विभाग ने पीजीटी रसायन शास्त्र के पद पर ज्वाइन किया था। 2014 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़वासनी में उनका तबादला हुआ। इसके बाद से वह इसी स्कूल में कार्यरत है।
विदेशों में किया भारतीय शिक्षा व्यवस्था का प्रचार
भारतीय शिक्षा व्यवस्था का प्राध्यापिका अंजू दहिया ने विदेश में भी प्रचार-प्रसार किया है। उन्होंने उज्बेकिस्तान में 15 दिन तक रहकर वहां के लोगों को भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में प्रेरित किया। शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। वहां उन्होंने लोगों को बताया कि बच्चों को खेल-खेल व अन्य गतिविधियों से पढ़ाया जाए। लॉकडाउन में ऑफलाइन कक्षा नहीं लग रह थी। बच्चों से जुड़ा रहने के लिए विषय की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला। प्राध्यापिका का कहना है कि विद्यार्थियों की सुविधा के लिए क्यूआर कोड भी बनाया। इससे प्रदेश भर में विद्यार्थी वीडियो से अपने संदेह को दूर सकते थे।
प्राध्यापिका अंजू दहिया की उपलब्धियां
- एलटीसी राशि स्कूल में सुविधाएं बढ़ाने पर ही खर्च की। ग्रामीणों को भी इसके लिए प्रोत्साहित किया।
- विशेष बच्चों के साथ शैक्षिक भ्रमण पर जाती और उन्हें वहां के बारे में बताती।
- बच्चों के साथ बातचीत करके उनकी समस्याएं जानी और उनका समाधान करने के लिए कार्य किया।
- पर्वतारोही की प्रशिक्षण लिया। विद्यार्थियों को शैक्षिक भ्रमण पर लेकर जाने से पहले प्रशिक्षण भी देती।
- बच्चों के सर्वांणिक विकास के लिए स्कूल में प्रदर्शनी व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित कराई।