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Sonipat News: एक स्टेशन एक उत्पाद ... लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में खरी नहीं उतर रही योजना
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सोनीपत। एक स्टेशन एक उत्पाद योजना के तहत रेलवे ने वर्ष 2022 में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोनीपत व गन्नौर स्टेशन पर बूथ स्थापित करवाए थे, लेकिन यह योजना खरी नहीं उतर पा रही है। सोनीपत-गन्नौर स्टेशन पर लगे बूथों को लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की बजाय खाद्य सामग्री के स्टॉल में तब्दील कर दिया गया है। सोनीपत स्टेशन पर अधिकतर समय बूथ बंद भी रहता है।
रेलवे की एक स्टेशन एक उत्पाद योजना के तहत कृषि उत्पाद, जूट का सामान, शहद, आचार, हस्तशिल्प, टैक्सटाइल, हैंडलूम, मूर्तियां व पारंपरिक परिधानों जैसे लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जाना था, ताकि हथकरघा कारीगरों, मजदूरों, किसानों व बुनकरों को कमाई का जरिया मिल सके। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य के साथ सितंबर 2022 में बूथ स्थापित कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई थी। प्रथम चरण में सोनीपत, गन्नौर सहित करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, समालखा व सब्जी मंडी स्टेशन को योजना में शामिल किया गया था, ताकि किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के स्थानीय उत्पाद की बिक्री को बढ़ावा मिल सके। 25 सितंबर 2022 तक आवेदन प्रक्रिया के बाद अक्तूबर माह में ड्राॅ निकालकर लोगों को बूथ मुहैया करवाए गए थे, लेकिन यह बूथ अब खाद्य स्टॉल बनकर रह गए हैं।
यह था योजना का उद्देश्य
बूथ तैयार होने के बाद 15 दिन के लिए एक व्यक्ति को बूथ मुहैया करवाया जाना था। बूथ लेने वाला व्यक्ति 15 दिन तक यहां प्रदर्शनी लगाकर अपना सामान बेच सकता था। इसके लिए रेलवे की ओर से 1 हजार रुपये किराया निर्धारित किया गया था। साथ ही बिजली व पानी की सुविधा रेलवे की ओर से मुहैया करवाई जानी थी। रेलवे अधिकारियों का दावा था कि यह बूथ स्वदेशी उत्पादों को पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होंगे, लेकिन स्थिति आज कुछ और नजर आ रही है। रेलवे की योजना भी सिरे चढ़ते नहीं दिखाई दे रही है।
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सोनीपत व गन्नौर रेलवे स्टेशन पर लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक स्टेशन एक उत्पाद योजना के तहत बूथ स्थापित किए गए हैं। बूथों को अन्य कार्यों में प्रयोग में लाया जा रहा है तो जल्द जांच करवाई जाएगी।
हिमांशु शेखर उपाध्याय, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, दिल्ली मंडल
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रेलवे की एक स्टेशन एक उत्पाद योजना के तहत कृषि उत्पाद, जूट का सामान, शहद, आचार, हस्तशिल्प, टैक्सटाइल, हैंडलूम, मूर्तियां व पारंपरिक परिधानों जैसे लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जाना था, ताकि हथकरघा कारीगरों, मजदूरों, किसानों व बुनकरों को कमाई का जरिया मिल सके। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य के साथ सितंबर 2022 में बूथ स्थापित कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई थी। प्रथम चरण में सोनीपत, गन्नौर सहित करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, समालखा व सब्जी मंडी स्टेशन को योजना में शामिल किया गया था, ताकि किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के स्थानीय उत्पाद की बिक्री को बढ़ावा मिल सके। 25 सितंबर 2022 तक आवेदन प्रक्रिया के बाद अक्तूबर माह में ड्राॅ निकालकर लोगों को बूथ मुहैया करवाए गए थे, लेकिन यह बूथ अब खाद्य स्टॉल बनकर रह गए हैं।
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यह था योजना का उद्देश्य
बूथ तैयार होने के बाद 15 दिन के लिए एक व्यक्ति को बूथ मुहैया करवाया जाना था। बूथ लेने वाला व्यक्ति 15 दिन तक यहां प्रदर्शनी लगाकर अपना सामान बेच सकता था। इसके लिए रेलवे की ओर से 1 हजार रुपये किराया निर्धारित किया गया था। साथ ही बिजली व पानी की सुविधा रेलवे की ओर से मुहैया करवाई जानी थी। रेलवे अधिकारियों का दावा था कि यह बूथ स्वदेशी उत्पादों को पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होंगे, लेकिन स्थिति आज कुछ और नजर आ रही है। रेलवे की योजना भी सिरे चढ़ते नहीं दिखाई दे रही है।
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सोनीपत व गन्नौर रेलवे स्टेशन पर लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक स्टेशन एक उत्पाद योजना के तहत बूथ स्थापित किए गए हैं। बूथों को अन्य कार्यों में प्रयोग में लाया जा रहा है तो जल्द जांच करवाई जाएगी।
हिमांशु शेखर उपाध्याय, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, दिल्ली मंडल