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लैब का डिजिटलाइजेशन बना मरीजों के लिए आफत
sonipat
Updated Tue, 09 Aug 2016 01:25 AM IST
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अस्पताल में टेस्ट करवाने के लिए लैब के बाहर खड़े मरीज
- फोटो : bureau
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नागरिक अस्पताल में मरीजों को और बेहतर सुविधा देने के लिए लैब को जब से ई-उपचार सेवाएं (सॉफ्टवेयर) से जोड़ा है तब से यह लैब मरीजों के लिए परेशानी बन गई है। सोमवार को यहां पर रिपोर्ट लेने व टेस्ट करवाने के लिए करीब 500 से अधिक मरीजों भी भीड़ उमड़ पड़ी। इस लैब को कंप्यूटराइज्ड करने के लिए पिछले सप्ताह ई-उपचार सेवाओं से जोड़ा गया था।
लैब में शुरू हुई ई-सेवा नहीं आई रास
नागरिक अस्पताल को ऑनलाइन करने के लिए 14 जनवरी से ई-उपचार सेवा शुरू की गई थी। ताकि यहां पर आने वाले मरीजों को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। उस दौरान फार्मेसी, आपातकालीन वार्ड, ओपीडी व पंजीकरण केंद्र में इस सेवा की शुरुआत की थी। पिछले सप्ताह अस्पताल की लैब में भी इस सेवा की शुरुआत की गई। सोमवार को अस्पताल की लैब में सुविधा के लिए यह सेवा चालू तो थी, लेकिन मरीजों को यह सेवा रास नहीं आयी। प्रत्येक मरीज की एंट्री में 10-15 मिनट का समय लग रहा था।
क्या है ई-उपचार सेवा
मरीज पहले की तरह ओपीडी काउंटर पर पहले पांच रुपये देकर रजिस्ट्रेशन कराएगा। इस दौरान रजिस्ट्रेशन के साथ हर मरीज को यूएचआईडी (यूनीक हेल्थ आइडेंटिफिकेशन नंबर) दिया जाएगा। इस यूएचआईडी के जरिए मरीज प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में इलाज करा सकता है। एचएमआईएस (हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफारमेशन सिस्टम) के जरिए कोई भी डॉक्टर मरीज का डाटा खोल सकता है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, पीजीआई, मेडिकल कॉलेजों को इस सेवा को जोड़कर ऑनलाइन करने से मरीजों को फायदा मिलेगा।
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अब परेशानी से मिलेगी निजात
इससे पहले यदि कोई मरीज इलाज किसी दूसरे जिले में जाकर करवाता था तो उसे संबंधित डॉक्टर को पहले अपनी बीमारी के बारे में पूरी जानकारी देनी पड़ती थी। साथ ही अस्पताल द्वारा दिए जा रहे इलाज के बारे में भी बताना पड़ता था जिसमें कई बार मरीज डॉक्टर को सही जानकारी नहीं दे पाता था। इस कारण डॉक्टर को उपचार करने में परेशानी आती थी। ऑनलाइन हो जाने के बाद मरीज का डॉटा सभी ऑनलाइन किए गए अस्पतालों में होगा, जिससे डॉक्टर मरीज द्वारा लिए जा रहे उपचार की जानकारी देखकर उसके उपचार को आगे बढ़ा सकेंगे। यह सिर्फ मरीज की हेल्थ आइडेंटिफिकेशन नंबर को एचएमआईएस पर फीड़ करना होगा। जिसे राज्य के किसी हिस्से के मरीजों को दूसरे अस्पताल में ऑनलाइन मिल सकेगा जिससे मरीजों के प्रतीक्षा समय में कमी आएगी। इस प्रणाली के तहत मरीजों को अपना एक्स-रे और अन्य जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा होगी जिससे चिकित्सक को भी इलाज मुहैया कराने में सुविधा होगी।
मरीजों की सुविधा को देखते हुए लैब में भी ई-उपचार सेवा को ऑनलाइन कर दिया गया है। सोमवार को मरीजों को परेशानी तो हुई है, आने वाले दिनों में लैब भी भीड़ भी कम हो जाएगी। लैब में काम करने वाले कर्मचारी पहली बार इस ऑनलाइन सेवा का प्रयोग कर रहे हैं।
- डॉ. सुखबीर, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल।
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लैब में शुरू हुई ई-सेवा नहीं आई रास
नागरिक अस्पताल को ऑनलाइन करने के लिए 14 जनवरी से ई-उपचार सेवा शुरू की गई थी। ताकि यहां पर आने वाले मरीजों को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। उस दौरान फार्मेसी, आपातकालीन वार्ड, ओपीडी व पंजीकरण केंद्र में इस सेवा की शुरुआत की थी। पिछले सप्ताह अस्पताल की लैब में भी इस सेवा की शुरुआत की गई। सोमवार को अस्पताल की लैब में सुविधा के लिए यह सेवा चालू तो थी, लेकिन मरीजों को यह सेवा रास नहीं आयी। प्रत्येक मरीज की एंट्री में 10-15 मिनट का समय लग रहा था।
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क्या है ई-उपचार सेवा
मरीज पहले की तरह ओपीडी काउंटर पर पहले पांच रुपये देकर रजिस्ट्रेशन कराएगा। इस दौरान रजिस्ट्रेशन के साथ हर मरीज को यूएचआईडी (यूनीक हेल्थ आइडेंटिफिकेशन नंबर) दिया जाएगा। इस यूएचआईडी के जरिए मरीज प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में इलाज करा सकता है। एचएमआईएस (हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफारमेशन सिस्टम) के जरिए कोई भी डॉक्टर मरीज का डाटा खोल सकता है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, पीजीआई, मेडिकल कॉलेजों को इस सेवा को जोड़कर ऑनलाइन करने से मरीजों को फायदा मिलेगा।
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अब परेशानी से मिलेगी निजात
इससे पहले यदि कोई मरीज इलाज किसी दूसरे जिले में जाकर करवाता था तो उसे संबंधित डॉक्टर को पहले अपनी बीमारी के बारे में पूरी जानकारी देनी पड़ती थी। साथ ही अस्पताल द्वारा दिए जा रहे इलाज के बारे में भी बताना पड़ता था जिसमें कई बार मरीज डॉक्टर को सही जानकारी नहीं दे पाता था। इस कारण डॉक्टर को उपचार करने में परेशानी आती थी। ऑनलाइन हो जाने के बाद मरीज का डॉटा सभी ऑनलाइन किए गए अस्पतालों में होगा, जिससे डॉक्टर मरीज द्वारा लिए जा रहे उपचार की जानकारी देखकर उसके उपचार को आगे बढ़ा सकेंगे। यह सिर्फ मरीज की हेल्थ आइडेंटिफिकेशन नंबर को एचएमआईएस पर फीड़ करना होगा। जिसे राज्य के किसी हिस्से के मरीजों को दूसरे अस्पताल में ऑनलाइन मिल सकेगा जिससे मरीजों के प्रतीक्षा समय में कमी आएगी। इस प्रणाली के तहत मरीजों को अपना एक्स-रे और अन्य जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा होगी जिससे चिकित्सक को भी इलाज मुहैया कराने में सुविधा होगी।
मरीजों की सुविधा को देखते हुए लैब में भी ई-उपचार सेवा को ऑनलाइन कर दिया गया है। सोमवार को मरीजों को परेशानी तो हुई है, आने वाले दिनों में लैब भी भीड़ भी कम हो जाएगी। लैब में काम करने वाले कर्मचारी पहली बार इस ऑनलाइन सेवा का प्रयोग कर रहे हैं।
- डॉ. सुखबीर, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल।