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संस्कार चरित्र का करते हैं निर्माण, शिक्षा उसका साधन : प्रो. दीप्ति
Thu, 21 Nov 2024 03:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 21 Nov 2024 03:19 AM IST
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गोहाना। गांव खानपुर कलां स्थित भगत फूल सिंह (बीपीएस) महिला विश्वविद्यालय के माड़ू सिंह मेमोरियल (एमएसएम) आयुर्वेद संस्थान में पीजी पाठ्यक्रम की नवागंतुक छात्राओं के लिए शिष्य उपनयन संस्कार व ओरिएंटेशन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्यातिथि के रूप में भिवानी के चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुदेश ने की।
मुख्यातिथि प्रो. दीप्ति धर्माणी ने आयुर्वेद संस्थान के 50 वर्ष पूरे होने व 51वें वर्ष में पीजी पाठ्यक्रम शुरू किए जाने पर विचार रखे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कारों के महत्व से छात्राओं को अवगत कराते हुए कहा कि संस्कार चरित्र का निर्माण करते हैं, शिक्षा उसका साधन है। शिक्षा का संस्कारों से पोषित होना आवश्यक है, शिक्षा संस्कारित करेगी, तभी एक सकारात्मक समाज का निर्माण व राष्ट्र का विकास होगा। भारत अपने ज्ञान, वेदों, उपनिषदों, संहिताओं व आयुर्वेद जैसी पद्धतियों के कारण सोने की चिड़िया कहलाया।
कुलपति प्रो. सुदेश ने शिक्षकों व छात्राओं से आह्वान किया कि वह भगत फूल सिंह व पद्मश्री सुभाषिणी देवी की दूरदर्शिता व जन भागीदारी से निर्मित इस संस्थान को सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाने में हरसंभव योगदान दें। पीजी पाठ्यक्रम शुरू होने से संस्थान में गुणवत्तापूर्ण शोध की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे पूर्व हवन में सभी ने मंत्रोच्चारण के साथ आहुति डाली। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ममता रानी व डॉ. नेहा शर्मा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. अमित शर्मा, डॉ. भावना शर्मा सहित सभी प्राध्यापक, कर्मचारी व छात्राएं मौजूद रही।
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मुख्यातिथि प्रो. दीप्ति धर्माणी ने आयुर्वेद संस्थान के 50 वर्ष पूरे होने व 51वें वर्ष में पीजी पाठ्यक्रम शुरू किए जाने पर विचार रखे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कारों के महत्व से छात्राओं को अवगत कराते हुए कहा कि संस्कार चरित्र का निर्माण करते हैं, शिक्षा उसका साधन है। शिक्षा का संस्कारों से पोषित होना आवश्यक है, शिक्षा संस्कारित करेगी, तभी एक सकारात्मक समाज का निर्माण व राष्ट्र का विकास होगा। भारत अपने ज्ञान, वेदों, उपनिषदों, संहिताओं व आयुर्वेद जैसी पद्धतियों के कारण सोने की चिड़िया कहलाया।
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कुलपति प्रो. सुदेश ने शिक्षकों व छात्राओं से आह्वान किया कि वह भगत फूल सिंह व पद्मश्री सुभाषिणी देवी की दूरदर्शिता व जन भागीदारी से निर्मित इस संस्थान को सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाने में हरसंभव योगदान दें। पीजी पाठ्यक्रम शुरू होने से संस्थान में गुणवत्तापूर्ण शोध की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे पूर्व हवन में सभी ने मंत्रोच्चारण के साथ आहुति डाली। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ममता रानी व डॉ. नेहा शर्मा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. अमित शर्मा, डॉ. भावना शर्मा सहित सभी प्राध्यापक, कर्मचारी व छात्राएं मौजूद रही।
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