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Sonipat: ठेकेदार की हत्या करने के दोषी मजदूर को उम्रकैद, घर न जाने देने की रंजिश में की थी वारदात

Tue, 20 Sep 2022 10:58 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 20 Sep 2022 10:58 PM IST
सार

अन्य मजदूरों को घर भेजने व उसे को अपने साथ रखने की रंजिश में हत्या कर दी थी। गांव थरिया के खेतों में वारदात की थी। दोषी बिहार से गिरफ्तार हुआ था। ठेकेदार के सिर पर वार करने के बाद परना से गला दबाकर हत्या कर गन्ने के खेत में शव फेंक दिया था।

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laborer convicted of killing the contractor sentenced life imprisonment in Sonipat
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

हरियाणा के सोनीपत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय पराशर की अदालत ने धान कटाई करने आए ठेकेदार की हत्या के मामले सुनवाई करते हुए आरोपी मजदूर को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी ने अन्य मजदूरों को घर भेजने व उसे अपने साथ रखने की रंजिश में ठेकेदार की हत्या कर डाली थी। 

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मूलरूप से बिहार के जिला पूर्णिया के गांव जमीर निवासी मुजफ्फर ने अक्तूबर 2020 में पुलिस को बताया था कि उनका पिता शरीफुल किसान रामचंद्र के खेत में गांव थरिया में रह रहे थे। वह यहां हर साल धान की कटाई करने आते थे। 15 अक्तूबर, 2020 को उनके पिता शरीफुल का शव गन्ने के खेत में क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था।
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उसने शिकायत दी थी कि उसके गांव के ही गोताई महलदार उर्फ गोतातीर ने उसके पिता की हत्या कर दी है और वह भाग गया है। पुलिस ने हत्या व शव को खुर्द-बुर्द करने का मुकदमा दर्ज कर लिया था। मामले में तत्कालीन जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह की टीम ने कार्रवाई करते हुए गोताई महलदार को बिहार से गिरफ्तार कर लिया था।
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आरोपी ने पूछताछ में बताया था कि शरीफुल उसके गांव का रहने वाला था। वह उनका ठेकेदार था। उसने अन्य मजदूरों को उनके घर भेज दिया था। वह भी घर जाना चाहता था लेकिन शरीफुल ने उसे जाने नहीं दिया था जिसके चलते उसकी शरीफुल से कहासुनी हुई थी। उसने रात को उसके सिर में वार कर दिया था। बाद में परने (गमछा) से उसका गला दबाकर हत्या कर दी थी।

यह भी पढ़ें : Sonipat: हत्या के दोषी को दूसरी बार उम्रकैद, पहले की थी भाई की हत्या, फिर पैरोल पर आकर ग्रामीण को मार डाला

आरोपी गोताई ने पहले पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया था। उसने बताया था कि 12 अक्तूबर, 2020 को शरीफुल जिंदा था। वह दोपहर को उसे बस में बैठाकर गया था जबकि पोस्टमार्टम में साफ हो गया था कि हत्या 11 अक्तूबर, 2020 को ही कर दी गई थी।


शरीफुल का फोन 12 अक्तूबर, 2020 को एक बार उठाया गया था। शरीफुल के साले का कहना है कि गोताई से उसे गुमराह करने के लिए शरीफुल बनकर बात की थी लेकिन जब उसने आवाज शरीफुल की नहीं होने की बात कही तो उसने फोन काट दिया था। उसके बाद फोन नहीं उठाया गया था।

मामले में सुनवाई के बाद एएसजे अजय पराशर की अदालत ने गोताई महलदार को दोषी करार दिया। अदालत ने मंगलवार को दोषी को उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो साल अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।

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