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जिंदा को मुर्दा मानकर लौट गई एंबुलेंस, बाद में तोड़ा दम

Wed, 25 Nov 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Wed, 25 Nov 2015 12:24 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि विभाग की टीम पलड़ी गांव के पास सड़क हादसे में घायल युवक को मुर्दा समझकर छोड़कर आ गई। परिजनों का कहना है कि एक घंटे बाद जब घटनास्थल पर पहुंचे तो प्रवीण की धड़कन चल रही थी, लेकिन सिविल अस्पताल लाते समय उसकी मौत हो गई। नाराज परिजनों ने रात साढ़े नौ बजे जब इमरजेंसी में डॉक्टरों से इस संबंध में सवाल-जवाब किए तो डॉक्टरों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि सुबह मामले की शिकायत सीएमओ या एसएमओ से करें। वह अभी कुछ नहीं कर सकते हैं।
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ठरू के दिलावर, रवींद्र और अन्य ने बताया कि प्रवीण बड़ौत में चाऊमीन का काम करता है। ज्यादातर समय वहीं रहता है, लेकिन घर पर जरूरी काम के चलते मंगलवार शाम को बाइक से घर के लिए चला। रास्ते में पलड़ी गांव के पास उसका एक्सीडेंट हो गया। हादसे के तरीके के संबंध में अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। शाम करीब आठ बजे घर पर फोन आया कि उनके घर का युवक पलड़ी के पास घायल पड़ा है। वे मौके पर पहुंचे तो ग्रामीणों ने बताया कि हादसा करीब साढ़े छह बजे का है। कई बार पुलिस के कंट्रोल रूम नंबर 100 पर कॉल कर चुके हैं। वहां से सूचना पाकर करीब सात बजे स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन उसने युवक को वहीं मृत घोषित कर दिया और वापस आ गई। बाद में ग्रामीणों ने उन्हें फोन किया। खानपुर मेडिकल कालेज में काम करने वाले युवक रवींद्र ने बताया कि उस समय प्रवीण की धड़कन चल रही थी। वे आननफानन में उसे लेकर सिविल अस्पताल आया, लेकिन उसने बहालगढ़ रोड पर दम तोड़ दिया। अस्पताल में आकर जब उसने डॉक्टरों से पूछा तो मौखिक तौर पर उन लोगों ने बताया कि करीब 15-20 मिनट पहले ही युवक की मौत हुई है।
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अगर एंबुलेंस ले आती तो बच जाती युवक की जान
ग्रामीणों और युवक के परिजनों का आरोप है कि अगर एंबुलेंस उसी समय प्रवीण को अस्पताल में ले आती तो जान बच सकती थी। लापरवाही बरती गई है। ऐसे में एंबुलेंस में मौजूद संबंधित स्वास्थ्य विभाग की टीम के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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हमारे पास डाक्टर का नाम और एंबुलेंस का नंबर
परिजनों ने बताया कि उन्होंने एंबुलेंस के फोटो भी किए हैं। साथ में प्रवीण की मौके पर जांच करने वाले डॉक्टर का नाम भी पता है। बुधवार को सीएमओ या एसएमओ को लिखित में डॉक्टर का नाम बताएंगे।


हमें कुछ नहीं पता, एसएमओ के पास जाएं
इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने ग्रामीणों को बताया कि वे कुछ नहीं बता सकते। बुधवार को पोस्टमार्टम करने के बाद कुछ पता चल सकता है कि युवक की मौत किस समय हुई है। ऐसे में अस्पताल के एसएमओ के पास जाएं। वहीं जांच करवा सकते हैं।
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