{"_id":"5a020b4e4f1c1b97678b9e8e","slug":"131510083406-sonipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्मॉग व कोहरा बना मुसीबत, हाईवे पर टकराए आधा दर्जन वाहन","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
स्मॉग व कोहरा बना मुसीबत, हाईवे पर टकराए आधा दर्जन वाहन
Updated Wed, 08 Nov 2017 01:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
वातावरण में स्मॉग व कोहरा छाने से लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। स्मॉग के चलते मंगलवार सुबह कई जगह दृश्यता 7 मीटर से भी कम रही। जिसके कारण जगह-जगह हुए हादसों में एक दर्जन वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। इसमें 12 से ज्यादा लोगों को चोटें आई हैं। हादसों से बचने के लिए हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आए। स्मॉग के कारण ट्रेन भी काफी देरी से चली। सुबह स्मॉग होने के चलते स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह के समय स्कूल बस आधा घंटा से अधिक समय देरी से गंतव्य तक पहुंची।
मंगलवार सुबह जब लोग सोकर उठे तो चारों तरफ कोहरे व स्मॉग की चादर लिपटी थी। हालात यह थे कि 7 मीटर आगे तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। शहर के साथ आसपास के आसमान में अधिक स्मॉग रहा। लोग आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायत कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो प्रदेश में लगातार पराली जलाए जाने व मौसम में आए बदलाव के चलते फॉग ने स्मॉग का रूप ले लिया है। जिसके कारण धुएं से पैदा हुई जहरीली गैसें व सस्पेंडेड पार्टिकल्स ऊपर जाने की बजाए नीचे ही रह गए हैं। आसमान में स्मॉग छाए रहने के कारण मंगलवार को करीब 11 बजे तक सूरज नजर आया और शाम होते ही अंधेरा सा हो गया। वहीं पूरे दिन हल्की धुंध जैसा आवरण बना रहा, जिसके कारण लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी तो साथ ही आंखों में जलन भी महसूस हुई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर तो स्मॉग चार से पांच दिन के बाद खुद चला जाता है। मगर कई बार बारिश होने तक स्मॉग का असर वातावरण में बना रहता है। पहले जहां दिन के वक्त तेज धूप रहती थी। वहीं अब उत्तरी-पश्चिमी हवाओं के अपने साथ नमी लाने से ऐसा वातावरण बन गया है।
ऐसे बनता है स्मॉग
धुएं व फॉग से मिलकर स्मॉग बनता है। गर्म हवा ऊपर की ओर उठने की कोशिश करती है, जबकि ठंडी हवा नीचे आती है। थोड़ी ही देर में ऐसी हलचल होती रहती है और हवा की इन दोनों गर्म और ठंडी परतों के बीच हरकतें रुक जाती हैं। इसी के चलते स्मॉग बनता है।
विज्ञापन
दमा रोगियों को दिक्कत
स्मॉग के दौरान वातावरण में प्रदूषण करने वाले नुकसान दायक तत्व हवा में मौजूद रहते हैं। पराली जलाने या जलने से पैदा हुए धुएं से सस्पेंडेड पार्टिकल्स, नाइट्रोजन मोनो ऑक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड बढ़ जाती है। जो लोगों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं। धुएं में एसपीएम 2.5 एमएम भी होते हैं जो सांस के साथ फेफड़ों में घुस जाते हैं। इन्हीं गैसों व पार्टिकल्स के कारण न केवल आंखों में जलन बल्कि आंखें लाल होना, आंखों में एलर्जी हो सकती है। टीबी व दमा के रोगियों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है।
यह रखनी चाहिए सावधानी
सामान्य अस्पताल के पीएमओ डा.सीपी अरोड़ा का कहना है कि एनसीआर की हवा में स्मॉग गहरा गया है। इस मौसम में बुजुर्गों व स्वांस के रोगियों को बचाना बेहद आवश्यक है। साथ ही बच्चों को भी इस मौसम में बाहर न घूमने दे। इससे परेशानी हो सकती है। इसमें कुछ सावधानी रखनी चाहिए।
- दिन में 3 बार नींबू पानी पीना चाहिए।
-40 मिनट बाद आधा लीटर पानी जरुर पीये।
-मास्क पहन कर बाहर निकले
-आंखों पर काला चश्मा लगाये
-प्रत्येक एक घंटे बाद ठंडे पानी से आंखों को धोये।
-जहां तक हो सके घर से कम निकले।
हाईवे पर थमी रहे वाहनों के पहिये
हाईवे पर सुबह के समय घना कोहरा होने के चलते वाहनों के पहिये थमे रहे। सुबह के समय दृश्यता महज 7 मीटर थी। जिसके चलते वाथहनष कतारों में लाइट जलाकर चल रहे थे। कोहरे के कारण अलग-अलग स्थानों पर आधा दर्जन से अधिक वाहन टकरा गए। मनीमत रही कि किसी कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। हादसों में करीब दर्जन भर लोगों को हल्की चोट आई। हाईवे पर सेक्टर-7 व मोड़ के पास तीन वाहन टकरा गए। गांव कुमासपुर के पास भी दो कार आपस में टकरा गई। वहीं मुरथल फ्लाईओवर की शुरुआत में कोई संकेतक नहीं होने से एक कार डिवाइडर में जा घुसी।
उधर गन्नौर में चौकी ढाणी के पास दो शिक्षण संस्थानों की बस व कैंटर में टक्कर हो गई। गीता कॉलेज पानीपत की बस दिल्ली से विद्यार्थियों को लेकर आ रही थी। ब बस चौकी ढाणी होटल के पास पहुंची तो आगे चल रहे ट्रक चालक ने ब्रेक लगा दिया। जिससे उसके पीछे चल रहे कैंटर की टक्कर ट्रक से हो गई। उसके पीछे गीता कॉलेज की बस की टक्कर कैंटर से हो गई और गीता कॉलेज की बस में पाईट कॉलेज की बस ने टक्कर मार दी। गनीमत रही कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई।
स्कूली बच्चों को हुई परेशानी, बढ़ा स्कूल का समय
कोहरे व स्मॉग के कारण मंगलवार सुबह विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पडऱ। स्कूल बसों के इंतजार में विद्यार्थी व उनके अभिभावक काफी देर तक खड़े रहे। आधा से पौने घंटा की देरी से स्कूल बस पहुंची। जिसके बाद ही वह गंतव्य की तरफ जा सके। विद्यार्थी एक से डेढ़ घंटा की देरी से स्कूल पहुंचे। उधर प्रदेश सरकार ने स्कूलों का टाइम बढ़ा दिया है। सुबह स्कूलों का समय साढ़े नौ बजे व छुट्टी का समय साढ़े तीन बजे कर दिया गया है।
हाईवे पुलिस ने लगाई रिफ्लेक्टर टेप
हाईवे पुलिस ने मंगलवार सुबह हाईवे थाना मुरथल के पास नाका लगाकर वाहन चालकों को धीमी गति में कतार में चलने व निश्चित दूरी पर रहने की हिदायत दी। साथ ही ट्रैफिक थाना प्रभारी धीरेंद्र की अगुवाई में वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप भी लगाई गई। जिससे हादसों में कमी लाई जा सके।
स्मॉग के चलते देरी से चली ट्रेन
अंबाला की तरफ जाने वाली गाड़ियां
गाड़ी संख्या लेट
14731 15.25 घंटे
11057 1.20 घंटे
12311 9 घंटे
64531 1.40 घंटे
18101 10 घंटे
12497 2 घंटे
14217 4.30 घंटे
12919 3.40 घंटे
दिल्ली की तरफ जाने वाली गाड़ियां
14034 1.50 घंटे
12312 2 घंटे
18102 3.50 घंटे
64464 1.40 घंटे
64002 1 घंटा
64470 1.25 घंटे
64452 2.10 घंटे
64462 2.40 घंटे
12058 1.10 घंटे
64536 1.30 घंटे
विज्ञापन
सोनीपत।
वातावरण में स्मॉग व कोहरा छाने से लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। स्मॉग के चलते मंगलवार सुबह कई जगह दृश्यता 7 मीटर से भी कम रही। जिसके कारण जगह-जगह हुए हादसों में एक दर्जन वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। इसमें 12 से ज्यादा लोगों को चोटें आई हैं। हादसों से बचने के लिए हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आए। स्मॉग के कारण ट्रेन भी काफी देरी से चली। सुबह स्मॉग होने के चलते स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह के समय स्कूल बस आधा घंटा से अधिक समय देरी से गंतव्य तक पहुंची।
मंगलवार सुबह जब लोग सोकर उठे तो चारों तरफ कोहरे व स्मॉग की चादर लिपटी थी। हालात यह थे कि 7 मीटर आगे तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। शहर के साथ आसपास के आसमान में अधिक स्मॉग रहा। लोग आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायत कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो प्रदेश में लगातार पराली जलाए जाने व मौसम में आए बदलाव के चलते फॉग ने स्मॉग का रूप ले लिया है। जिसके कारण धुएं से पैदा हुई जहरीली गैसें व सस्पेंडेड पार्टिकल्स ऊपर जाने की बजाए नीचे ही रह गए हैं। आसमान में स्मॉग छाए रहने के कारण मंगलवार को करीब 11 बजे तक सूरज नजर आया और शाम होते ही अंधेरा सा हो गया। वहीं पूरे दिन हल्की धुंध जैसा आवरण बना रहा, जिसके कारण लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी तो साथ ही आंखों में जलन भी महसूस हुई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर तो स्मॉग चार से पांच दिन के बाद खुद चला जाता है। मगर कई बार बारिश होने तक स्मॉग का असर वातावरण में बना रहता है। पहले जहां दिन के वक्त तेज धूप रहती थी। वहीं अब उत्तरी-पश्चिमी हवाओं के अपने साथ नमी लाने से ऐसा वातावरण बन गया है।
विज्ञापन
ऐसे बनता है स्मॉग
धुएं व फॉग से मिलकर स्मॉग बनता है। गर्म हवा ऊपर की ओर उठने की कोशिश करती है, जबकि ठंडी हवा नीचे आती है। थोड़ी ही देर में ऐसी हलचल होती रहती है और हवा की इन दोनों गर्म और ठंडी परतों के बीच हरकतें रुक जाती हैं। इसी के चलते स्मॉग बनता है।
विज्ञापन
दमा रोगियों को दिक्कत
स्मॉग के दौरान वातावरण में प्रदूषण करने वाले नुकसान दायक तत्व हवा में मौजूद रहते हैं। पराली जलाने या जलने से पैदा हुए धुएं से सस्पेंडेड पार्टिकल्स, नाइट्रोजन मोनो ऑक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड बढ़ जाती है। जो लोगों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं। धुएं में एसपीएम 2.5 एमएम भी होते हैं जो सांस के साथ फेफड़ों में घुस जाते हैं। इन्हीं गैसों व पार्टिकल्स के कारण न केवल आंखों में जलन बल्कि आंखें लाल होना, आंखों में एलर्जी हो सकती है। टीबी व दमा के रोगियों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है।
यह रखनी चाहिए सावधानी
सामान्य अस्पताल के पीएमओ डा.सीपी अरोड़ा का कहना है कि एनसीआर की हवा में स्मॉग गहरा गया है। इस मौसम में बुजुर्गों व स्वांस के रोगियों को बचाना बेहद आवश्यक है। साथ ही बच्चों को भी इस मौसम में बाहर न घूमने दे। इससे परेशानी हो सकती है। इसमें कुछ सावधानी रखनी चाहिए।
- दिन में 3 बार नींबू पानी पीना चाहिए।
-40 मिनट बाद आधा लीटर पानी जरुर पीये।
-मास्क पहन कर बाहर निकले
-आंखों पर काला चश्मा लगाये
-प्रत्येक एक घंटे बाद ठंडे पानी से आंखों को धोये।
-जहां तक हो सके घर से कम निकले।
हाईवे पर थमी रहे वाहनों के पहिये
हाईवे पर सुबह के समय घना कोहरा होने के चलते वाहनों के पहिये थमे रहे। सुबह के समय दृश्यता महज 7 मीटर थी। जिसके चलते वाथहनष कतारों में लाइट जलाकर चल रहे थे। कोहरे के कारण अलग-अलग स्थानों पर आधा दर्जन से अधिक वाहन टकरा गए। मनीमत रही कि किसी कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। हादसों में करीब दर्जन भर लोगों को हल्की चोट आई। हाईवे पर सेक्टर-7 व मोड़ के पास तीन वाहन टकरा गए। गांव कुमासपुर के पास भी दो कार आपस में टकरा गई। वहीं मुरथल फ्लाईओवर की शुरुआत में कोई संकेतक नहीं होने से एक कार डिवाइडर में जा घुसी।
उधर गन्नौर में चौकी ढाणी के पास दो शिक्षण संस्थानों की बस व कैंटर में टक्कर हो गई। गीता कॉलेज पानीपत की बस दिल्ली से विद्यार्थियों को लेकर आ रही थी। ब बस चौकी ढाणी होटल के पास पहुंची तो आगे चल रहे ट्रक चालक ने ब्रेक लगा दिया। जिससे उसके पीछे चल रहे कैंटर की टक्कर ट्रक से हो गई। उसके पीछे गीता कॉलेज की बस की टक्कर कैंटर से हो गई और गीता कॉलेज की बस में पाईट कॉलेज की बस ने टक्कर मार दी। गनीमत रही कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई।
स्कूली बच्चों को हुई परेशानी, बढ़ा स्कूल का समय
कोहरे व स्मॉग के कारण मंगलवार सुबह विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पडऱ। स्कूल बसों के इंतजार में विद्यार्थी व उनके अभिभावक काफी देर तक खड़े रहे। आधा से पौने घंटा की देरी से स्कूल बस पहुंची। जिसके बाद ही वह गंतव्य की तरफ जा सके। विद्यार्थी एक से डेढ़ घंटा की देरी से स्कूल पहुंचे। उधर प्रदेश सरकार ने स्कूलों का टाइम बढ़ा दिया है। सुबह स्कूलों का समय साढ़े नौ बजे व छुट्टी का समय साढ़े तीन बजे कर दिया गया है।
हाईवे पुलिस ने लगाई रिफ्लेक्टर टेप
हाईवे पुलिस ने मंगलवार सुबह हाईवे थाना मुरथल के पास नाका लगाकर वाहन चालकों को धीमी गति में कतार में चलने व निश्चित दूरी पर रहने की हिदायत दी। साथ ही ट्रैफिक थाना प्रभारी धीरेंद्र की अगुवाई में वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप भी लगाई गई। जिससे हादसों में कमी लाई जा सके।
स्मॉग के चलते देरी से चली ट्रेन
अंबाला की तरफ जाने वाली गाड़ियां
गाड़ी संख्या लेट
14731 15.25 घंटे
11057 1.20 घंटे
12311 9 घंटे
64531 1.40 घंटे
18101 10 घंटे
12497 2 घंटे
14217 4.30 घंटे
12919 3.40 घंटे
दिल्ली की तरफ जाने वाली गाड़ियां
14034 1.50 घंटे
12312 2 घंटे
18102 3.50 घंटे
64464 1.40 घंटे
64002 1 घंटा
64470 1.25 घंटे
64452 2.10 घंटे
64462 2.40 घंटे
12058 1.10 घंटे
64536 1.30 घंटे