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महिला ने एक साथ निभाई दो जिम्मेदारी तो आज तक इस गांव में नहीं घुस सका कोरोना
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सोनीपत। कोरोना ने जहां अब गांवों में ज्यादा कहर बरपाया हुआ है, वहीं मौजमनगर ऐसा गांव है, जहां एक महिला सुनीता के कारण कोरोना आज तक नहीं घुस सका है। उस महिला ने एक साथ पूर्व सरपंच व आंगनबाड़ी वर्कर की जिम्मेदारी निभाते हुए पहले घर-घर जाकर लोगों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक किया। जिसका असर यह दिखा कि गांव में सभी मास्क या मुंह पर कपड़ा बांधकर रहते हैं और कोई जरूरी काम होने के बाद ही बाहर निकलते हैं। वहीं अब सुनीता गांव के हर घर में जाकर जांच कराने में जुटी है और किसी के बीमार होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को सूचना देकर उपचार कराया जाता है। प्रशासनिक अधिकारी भी कहते हैं कि इस तरह सभी गांवों के लोग जागरूक रहेंगे तो कोरोना पूरी तरह से खत्म करना आसान होगा।
खरखौदा क्षेत्र के मौजमनगर गांव की सुनीता आंगनबाड़ी वर्कर है तो इसके साथ ही वह सरपंच थी। तीन महीने पहले कार्यकाल खत्म होने के बावजूद वह अपनी जिम्मेदारी नहीं भूली है। यही कारण है कि जब कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया तो सुनीता ने आंगनबाड़ी वर्कर व पूर्व सरपंच की जिम्मेदारियों को निभाने का बीड़ा उठा लिया और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने लगी। लोगों को बताया गया कि घर से कोई जरूरी काम होने पर ही बाहर निकला जाए। इसके साथ ही मास्क व सैनिटाइजर का इस्तेमाल जरूर करें और हाथों को साबुन से जरूर धोते रहें। सुनीता को इसमें सभी ग्रामीणों का सहयोग मिला और गांव में सभी मास्क लगाते हैं या मुंह पर कपड़ा बांधकर रहते हैं। इसके साथ ही सुनीता अब हर घर में जाकर जांच करने में जुटी है, जिसमें देखा जा रहा है कि किसी को बुखार, जुकाम, खांसी तो नहीं है। अगर कोई बीमार मिलता है तो उसका स्वास्थ्य विभाग को सूचित करके उपचार कराया जाता है। लेकिन गांव में कोरोना को लेकर लोग इतने जागरूक है कि वह किसी भी तरह से लापरवाही नहीं बरतते है और इसलिए ही कोरोना संक्रमण की शुरूआत से लेकर अभी तक यहां एक भी केस नहीं मिला है।
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गांव में हुक्का पीना व ताश खेलना छोड़ा
मौजमनगर के लोगों में जागरूकता का इससे ही पता चलता है कि जहां पहले लोग साथ बैठकर हुक्का पीते थे और ताश खेलते थे। वहीं कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद से लोगों ने साथ बैठना बंद किया हुआ है और हुक्का नहीं पीते है तो ताश खेलना भी बंद है। गांव के नंबरदार धर्मचंद कहते हैं कि लोगों को खुद ही जागरूक होना पड़ेगा, तभी कोरोना को हम हरा सकेंगे।
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इस समय भले ही मैं सरपंच नहीं हूं, लेकिन पूर्व सरपंच होने के नाते मेरी जिम्मेदारी थी कि लोगों को जागरूक किया जाए। इसके साथ ही आंगनबाड़ी वर्कर होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है कि हर घर में जाकर जांच की जाए और कोई बीमार है तो उसका उपचार कराया जाए। यह हमारे लिए अच्छा है कि यहां अभी तक एक भी केस नहीं मिला है।
- सुनीता, पूर्व सरपंच व आंगनबाड़ी वर्कर मौजमनगर
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मौजमनगर के लोगों में जिस तरह से कोरोना को लेकर जागरूकता है और वहां लोग मास्क लगाकर या कपड़ा बांधकर रहते हैं। हुक्का साथ पीना बंद किया हुआ है और ताश भी फिलहाल साथ बैठकर नहीं खेलते हैं। इस तरह से सभी गांव के लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। जिससे कोरोना संक्रमण को रोका जा सके।
- श्यामलाल पूनिया, डीसी
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खरखौदा क्षेत्र के मौजमनगर गांव की सुनीता आंगनबाड़ी वर्कर है तो इसके साथ ही वह सरपंच थी। तीन महीने पहले कार्यकाल खत्म होने के बावजूद वह अपनी जिम्मेदारी नहीं भूली है। यही कारण है कि जब कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया तो सुनीता ने आंगनबाड़ी वर्कर व पूर्व सरपंच की जिम्मेदारियों को निभाने का बीड़ा उठा लिया और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने लगी। लोगों को बताया गया कि घर से कोई जरूरी काम होने पर ही बाहर निकला जाए। इसके साथ ही मास्क व सैनिटाइजर का इस्तेमाल जरूर करें और हाथों को साबुन से जरूर धोते रहें। सुनीता को इसमें सभी ग्रामीणों का सहयोग मिला और गांव में सभी मास्क लगाते हैं या मुंह पर कपड़ा बांधकर रहते हैं। इसके साथ ही सुनीता अब हर घर में जाकर जांच करने में जुटी है, जिसमें देखा जा रहा है कि किसी को बुखार, जुकाम, खांसी तो नहीं है। अगर कोई बीमार मिलता है तो उसका स्वास्थ्य विभाग को सूचित करके उपचार कराया जाता है। लेकिन गांव में कोरोना को लेकर लोग इतने जागरूक है कि वह किसी भी तरह से लापरवाही नहीं बरतते है और इसलिए ही कोरोना संक्रमण की शुरूआत से लेकर अभी तक यहां एक भी केस नहीं मिला है।
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गांव में हुक्का पीना व ताश खेलना छोड़ा
मौजमनगर के लोगों में जागरूकता का इससे ही पता चलता है कि जहां पहले लोग साथ बैठकर हुक्का पीते थे और ताश खेलते थे। वहीं कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद से लोगों ने साथ बैठना बंद किया हुआ है और हुक्का नहीं पीते है तो ताश खेलना भी बंद है। गांव के नंबरदार धर्मचंद कहते हैं कि लोगों को खुद ही जागरूक होना पड़ेगा, तभी कोरोना को हम हरा सकेंगे।
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इस समय भले ही मैं सरपंच नहीं हूं, लेकिन पूर्व सरपंच होने के नाते मेरी जिम्मेदारी थी कि लोगों को जागरूक किया जाए। इसके साथ ही आंगनबाड़ी वर्कर होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है कि हर घर में जाकर जांच की जाए और कोई बीमार है तो उसका उपचार कराया जाए। यह हमारे लिए अच्छा है कि यहां अभी तक एक भी केस नहीं मिला है।
- सुनीता, पूर्व सरपंच व आंगनबाड़ी वर्कर मौजमनगर
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मौजमनगर के लोगों में जिस तरह से कोरोना को लेकर जागरूकता है और वहां लोग मास्क लगाकर या कपड़ा बांधकर रहते हैं। हुक्का साथ पीना बंद किया हुआ है और ताश भी फिलहाल साथ बैठकर नहीं खेलते हैं। इस तरह से सभी गांव के लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। जिससे कोरोना संक्रमण को रोका जा सके।
- श्यामलाल पूनिया, डीसी