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पड़ोसी गांव के किसान से प्रेरणा लेकर शुरू की तरबूज की खेती, कमा रहा लाखों रुपये

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2022 11:21 PM IST
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Watermelon cultivation started taking inspiration from the farmer of neighboring village, earning lakhs of rupees
पना खेत दिखात गांव जसानियां के किसान भरत सिंह सहारण। - फोटो : Sirsa
चोपटा (सिरसा)। राजस्थान की सीमा से सटे हरियाणा के पैंतालिसा क्षेत्र में परंपरागत खेती में घाटे के चलते घर की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। ऐसे में गांव जसानियां के किसान भरत सिंह सहारण ने पड़ोसी गांव के किसान से प्रेरणा लेकर तरबूज की खेती शुरू की। किसान ने 1 एकड़ में तरबूज लगाए। जिसमें 150 क्विंटल तरबूज की पैदावार से करीब 2 लाख रुपये की कमाई हुई। खास बात यह है कि इन तरबूजों की पैदावार में किसान ने रसायनिक खाद्य का प्रयोग नहीं किया है।
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ऑर्गेनिक तरबूज के कारण किसान भरत सिंह सहारण को हरियाणा के साथ-साथ निकटवर्ती राजस्थान के आसपास के गांवों में अलग पहचान बनाई है। इनका कहना है कि किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तरीके से खेती करके आत्मनिर्भर बन सकते हैं। वहीं उन्होंने बताया कि नहरी पानी की कमी के कारण उनके क्षेत्र की अधिकतर जमीन बरानी है। ज्यादातर खेती बारिश पर निर्भर होती है। समय पर बारिश होने से फसलों का उत्पादन अच्छा हो जाता है और बारिश न होने पर जमीन खाली रह जाती है। ऐसे में किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर रहती है।
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गांव जोड़कियां के ही किसान राकेश कुमार से प्रेरणा लेकर शुरू की तरबूज की खेती
गांव जसानिया के किसान भरत सिंह ने बताया कि रेतीली जमीन व नहरी पानी की कमी के कारण परंपरागत खेती में घाटा हो रहा था। इस केती में अच्छी बारिश होने पर ही बचत होती है वरना घाटा ही लगता है। ऐसे में उसने खेती के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई करने का जरिया खोजना शुरू किया तो आधुनिक तरीके से खेती करने वालों किसानों से विचार विमर्श शुरू किया। ऐसे में गांव जोड़कियां के किसान राकेश कुमार जिसने कई वर्षों से ऑर्गेनिक तरबूज की खेती शुरू की हुई है से प्रेरणा लेकर अपने खेत में 1 एकड़ जमीन में तरबूज लगाने का फैसला किया। उन्होंने फतेहाबाद से तरबूज के बीज लाकर 1 एकड़ जमीन में रोपे। समय आने पर उन बेलों से 150 क्विंटल के लगभग तरबूज की पैदावार हुई। जिन्हें बेचकर करीब 2 लाख रुपये की कमाई हुई। भरत ने बताया कि उसने अपने खर्च से खेत में पानी की डिग्गी बनाई हुई है। जिसमें पानी एकत्रित कर लिया जाता है और जरूरत पड़ने पर फसल को पानी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि अब वह मौसमी सब्जियां लगाने के लिए और जमीन तैयार कर रहा है। आधुनिक तरीके और बिना रासायनिक खाद के प्रयोग किए उगाए गए तरबूज मीठे, स्वादिष्ट व स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होते हैं। जिससे आसपास के कुम्हारिया, राजपुरा साहनी, जमानियां इत्यादि गांवों के लोग उनके खेत से तरबूज लेने के लिए आते हैं। भरत ने बताया कि किसान खेती के साथ-साथ आधुनिक तरीके से खेती कर कमाई करके आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
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समय पर मिले सरकारी सहायता तो बढ़ाया जा सकता है सब्जी का व्यवसाय
भरत सिंह ने बताया कि सरकारी सहायता मिल जाए तो सब्जी के व्यवसाय को और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है। जिससे अन्य लोगों को भी रोजगार दिया जा सकता है। इसके अलावा नाथूसरी चोपटा के आसपास फ्रूट प्रोसेसिंग सेंटर या सब्जी मंडी विकसित हो जाए तो किसानों को काफी फायदा होने लगेगा। यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी।
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