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Sirsa News: 327 गांवों को पराली प्रबंधन से मिला ग्रीन जोन, येलो जोन में बस तीन गांव
Wed, 16 Sep 2026 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 16 Sep 2026 11:38 PM IST
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- 3000 के करीब सुपर सीडर किसानों को करवाए जा चुके है उपलब्ध
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। पराली प्रबंधन पर कृषि विभाग ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिले को पूरी तरह से ग्रीन जोन में लाना कृषि विभाग का इस साल का लक्ष्य है। इसको को लेकर 500 से 600 के बीच कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा चुकी है।
गांव स्तर पर पंचायत और अधिकारियों के ग्रुप बनाए जा रहे हैं। व्हाट्सएप ग्रुप में 100 किसानों को जोड़ा जाएगा और उन्हें प्रबंधन व सरकारी पराली पर मिलने वाले पैसे को लेकर जानकारी दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों पर गौर करते तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।
जिले के 330 गांवों में 327 गांव पूरी तरह से पराली प्रदूषण से मुक्त हैं। यहां पर पराली नहीं जलाई जाती है और ये ग्रीन जोन में आते हैं। यह दावा कृषि विभाग के अधिकारी कर रहे हैं। पिछले साल पांच गांव रेड जोन में थे। इनमें से तीन गांव अब येलो जोन में हैं। दो गांव ग्रीन जोन में आ चुके हैं। ऐसा पहली बार हुआ है, जब रेड जोन में कोई गांव नहीं आया है।
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3000 के करीब सुपर सीडर दे चुका है प्रशासन
एईई विजय कुमार जैन ने बताया कि मशीनरी की मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले तीन से चार सालों के अंदर-अंदर प्रशासन 300 के आसपास बेलर व 3000 के करीब सुपर सीडर किसानों को दे चुके हैं। इतने बड़े स्तर पर किसानों तक मशीनरी पहुंचने का परिणाम है कि सिरसा जिला इस बार पूरी तरह से पराली प्रदूषण हो पाएगा। यही कारण है कि रजिस्ट्रेशन भी किसान बड़े स्तर पर करवा रहे हैं।
40 से 45 पैलेट्स यूनिट लग चुकी हैं
अधिकारियों के अनुसार, सिरसा में बायो फ्यूल के साथ-साथ 40 से 45 के आसपास पैलेट्स यूनिट लग चुकी हैं। इन यूनिटों के लगने के साथ ही पराली की मांग बढ़ गई है। ऐसे में इस साल बड़े स्तर पर मांग होने के कारण पराली का प्रबंधन शत-प्रतिशत हो पाएगा। साथ ही उम्मीद है कि किसान को पराली से मुनाफा होगा। इसलिए वह भी पराली में आग लगाने से गुरेज करेगा। अहम बात यह है कि तीन से चार गांवों के बीच में एक पैलेट्स यूनिट लग चुकी हैं। ऐसे में इंडस्ट्री वाले गांवों में अपने स्तर पर भी प्रमुखता के साथ काम कर रहे हैं। यही कारण है कि जिन गांवों के आसपास पैलेट्स यूनिट है। उन्हें अब इंतजार नहीं करना पड़ेगा और दिन-रात पराली प्रबंधन का काम हो पाएगा।
ये तीन गांव येलो जोन
ऐलनाबाद - रताखेड़ा
सिरसा-- नरेलखेड़ा
रानियां - गांव रानियां
कोट्स
पराली प्रबंधन के लिए टीमें बनाने का काम शुरू किया जा चुका है। किसानों के सहयोग से 327 गांव ग्रीन जोन में आ चुके हैं। पिछले वर्ष पांच गांव रेड जोन में थे। इस बार महज तीन गांव ही येलो जोन में हैं। किसानों के साथ मिलकर इन गांवों को भी ग्रीन जोन में लाया जाएगा। वर्ष 2025 में 54 के आसपास ही पराली जलाने के मामले सामने आए थे। इस बार मशीनरी व पैलेट्स यूनिट की पराली की मांग को शत-प्रतिशत सिरसा जिला ग्रीन जोन में आ जाएगा।
-डॉ. विनोद फोगाट, उप निदेशक कृषि विभाग
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। पराली प्रबंधन पर कृषि विभाग ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिले को पूरी तरह से ग्रीन जोन में लाना कृषि विभाग का इस साल का लक्ष्य है। इसको को लेकर 500 से 600 के बीच कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा चुकी है।
गांव स्तर पर पंचायत और अधिकारियों के ग्रुप बनाए जा रहे हैं। व्हाट्सएप ग्रुप में 100 किसानों को जोड़ा जाएगा और उन्हें प्रबंधन व सरकारी पराली पर मिलने वाले पैसे को लेकर जानकारी दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों पर गौर करते तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।
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जिले के 330 गांवों में 327 गांव पूरी तरह से पराली प्रदूषण से मुक्त हैं। यहां पर पराली नहीं जलाई जाती है और ये ग्रीन जोन में आते हैं। यह दावा कृषि विभाग के अधिकारी कर रहे हैं। पिछले साल पांच गांव रेड जोन में थे। इनमें से तीन गांव अब येलो जोन में हैं। दो गांव ग्रीन जोन में आ चुके हैं। ऐसा पहली बार हुआ है, जब रेड जोन में कोई गांव नहीं आया है।
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3000 के करीब सुपर सीडर दे चुका है प्रशासन
एईई विजय कुमार जैन ने बताया कि मशीनरी की मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले तीन से चार सालों के अंदर-अंदर प्रशासन 300 के आसपास बेलर व 3000 के करीब सुपर सीडर किसानों को दे चुके हैं। इतने बड़े स्तर पर किसानों तक मशीनरी पहुंचने का परिणाम है कि सिरसा जिला इस बार पूरी तरह से पराली प्रदूषण हो पाएगा। यही कारण है कि रजिस्ट्रेशन भी किसान बड़े स्तर पर करवा रहे हैं।
40 से 45 पैलेट्स यूनिट लग चुकी हैं
अधिकारियों के अनुसार, सिरसा में बायो फ्यूल के साथ-साथ 40 से 45 के आसपास पैलेट्स यूनिट लग चुकी हैं। इन यूनिटों के लगने के साथ ही पराली की मांग बढ़ गई है। ऐसे में इस साल बड़े स्तर पर मांग होने के कारण पराली का प्रबंधन शत-प्रतिशत हो पाएगा। साथ ही उम्मीद है कि किसान को पराली से मुनाफा होगा। इसलिए वह भी पराली में आग लगाने से गुरेज करेगा। अहम बात यह है कि तीन से चार गांवों के बीच में एक पैलेट्स यूनिट लग चुकी हैं। ऐसे में इंडस्ट्री वाले गांवों में अपने स्तर पर भी प्रमुखता के साथ काम कर रहे हैं। यही कारण है कि जिन गांवों के आसपास पैलेट्स यूनिट है। उन्हें अब इंतजार नहीं करना पड़ेगा और दिन-रात पराली प्रबंधन का काम हो पाएगा।
ये तीन गांव येलो जोन
ऐलनाबाद - रताखेड़ा
सिरसा
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पराली प्रबंधन के लिए टीमें बनाने का काम शुरू किया जा चुका है। किसानों के सहयोग से 327 गांव ग्रीन जोन में आ चुके हैं। पिछले वर्ष पांच गांव रेड जोन में थे। इस बार महज तीन गांव ही येलो जोन में हैं। किसानों के साथ मिलकर इन गांवों को भी ग्रीन जोन में लाया जाएगा। वर्ष 2025 में 54 के आसपास ही पराली जलाने के मामले सामने आए थे। इस बार मशीनरी व पैलेट्स यूनिट की पराली की मांग को शत-प्रतिशत सिरसा जिला ग्रीन जोन में आ जाएगा।
-डॉ. विनोद फोगाट, उप निदेशक कृषि विभाग