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राजकीय सम्मान के साथ शहीद निशान सिंह को नम आंखों से हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई
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सिरसा। कश्मीर के अनंतनाग में शनिवार को आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए जिला सिरसा के गांव भावदीन के जवान निशान सिंह का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव लाया गया। शहीद निशान सिंह का तिरंगे में लिपटा हुआ शव उनके पैतृक गांव पहुंचा तो क्षेत्र वासियों ने जय जवान के नारे के साथ शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके शव पर फूलों की वर्षा की और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
गौरतलब है कि भावदीन के सेवा सिंह के पुत्र 26 वर्षीय शहीद निशान सिंह 26 जून 2013 को आर्मी में भर्ती हुए थे और दो महीने पहले ही फतेहाबाद के मड़गंधान निवासी रमनदीप से उनकी शादी हुई थी। निशान सिंह 19 राइफल्स के जवान थे और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में तैनात थे। शनिवार को मुठभेड़ के दौरान निशान सिंह आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हो गए। बेटे के शहीद होने की सूचना मिलते ही परिवार के साथ साथ गांव में मातम का माहौल बन गया। हाजारों की संख्या में लोग शहीद जवान निशान सिंह की अंतिम विदाई में शामिल हुए। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम जयवीर यादव, डीएसपी साधु राम, एसएचओ डिंग कश्मीरी लाल सहित अन्य गणमान्य लोगों ने शहीद निशान सिंह को पुष्प अर्पित कर के श्रद्धांजलि दी।
पिता और भाई ने किया सेल्यूट, बहन बोली पूत तू क्यों चला गया, हुई बेहोश
उनका पार्थिव शरीर रविवार दोपहर बाद ढ़ाई बजे गांव में पहुंचा। अंतिम संस्कार के समय सेना के जवानों ने सलामी दी। वहीं पिता और भाई ने भी बेटे निशान सिंह को सेल्यूट किया। इस दौरान बड़ी बहन ने जब शहीद भाई का चेहरा देखा तो बोली पूत तू क्यो चला गया। इसी दौरान वह चक्कर खाकर गिर गई। वहीं पिता ने कहा कि उसकी दो दिन पहले ही बेटे निशान सिंह से बात हुई थी। वह कह रहा था की गेहूं खरीदकर घर में रख ले और वह पैसे ऑनलाइन भेज देगा। वहीं उन्होंने कहा कि दोपहर के समय भी निशान सिंह की घर पर बात हुई थी। बहनों और उसकी मां ने ही उनके साथ बात की। वहीं उसके भाई खजान सिंह ने कहा की कब तक बेटे इस तरह से शहीद होते रहेंगे। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
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टोल प्लाजा से गांव तक फूलों की वर्षा के साथ दी गई अंतिम विदाई
शहीद जवान का पार्थिव शरीर बठिंडा तक हवाई जहाज के माध्यम से लगाया गया। जिसके बाद गाड़ियों से हिसार रोड टोल प्लाजा तक पहुंचाया गया। यहां पर फूलों से सजी सेना की गाड़ी पर उनके पार्थिव शरीर को गांव भावदीन तक ले जाया गया। इस दौरान टोल प्लाजा पर ही काफी संख्या में लोग जमा था। जवान की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने नम आंखों से फूलों की वर्षा की। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से उनको विदाई दी गई।
परिवार में छाया मातम, मां व पत्नी की हुई बेसुध
बेटे की शहादत होने की सूचना मिलने के बाद परिवार में मातम का माहौल छा गया। जवान के परिवार में पिता डॉ. सेवा सिंह, मां प्रकाश कौर और छोटा भाई खजान सिंह व तीन बड़ी बहने हैं। भाई और बहनों की पहले ही शादी हो चुकी है। दो माह पहले (18 फरवरी) को निशान सिंह की शादी फतेहाबाद के मड़गंधा की रमनदीप के साथ हुई थी। शादी होने के आठ दिन बाद ही 26 मार्च को वह ड्यूटी पर लौट गया था। निशान सिंह के शहादत की सूचना मिलने पर मां, पत्नी और बहने बेसुध हो गई। वहीं परिवार सहित पूरे गांव को ही निशान सिंह के शहीद होने पर गहरा सदमा लगा है।
आर्मी की नेशनल हॉकी टीम का गोलकीपर था शहीद जवान निशान सिंह
कश्मीर के अनंतनाग में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुआ निशान सिंह आर्मी में नेशनल हॉकी टीम का गोलकीपर था। करीब नौ वर्ष पहले निशान सिंह की हिसार में ट्रायल देने के दौरान सेना भर्ती हुई थी। इससे पहले उसने सिरसा में सेना की भर्ती के लिया ट्रायल दिया। लेकिन आयु कम होने के कारण वह सेना में शामिल नहीं हो पाया। वहीं उनके परिजनों का कहना है कि निशान सिंह बचपन से ही सेना में भर्ती होने के लिए कहता था। मातृभूमि की सेवा करने के लिए कहता था।
शहीद निशान सिंह 12वीं तक अपने ही गांव भावदीन में पढ़ा और इसके बाद सिरसा के नेशनल कॉलेज से बीए कर रहा था। उसकी अंतिम वर्ष की परीक्षा का परिणाम आना शेष था। भर्ती के दो वर्ष बाद ही वह सेना की नेशनल हॉकी टीम में सिलेक्ट हो गया और गोलकीपर बन गया। हालांकि गांव में ही वह फुटबाल खेता था। भर्ती के बाद के बाद दो वर्ष तक वह सिक्किम में तैनात रहा। इसके बाद उसकी ड्यूटी जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में लगा दी गई। यहां आतंकवादियों से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गया। संवाद
गांव में एक ही नाम के दो जवान, पहले नहीं हुआ किसी को विश्वास
भावदीन गांव के दो जवान सेना में भर्ती है और दोनों का नाम निशान सिंह है हालांकि की दोनों की पोस्टिंग कश्मीर में अलग-अलग स्थानों पर है। दोस्तों के पास जब निशान सिंह के शहीद होने की सूचना मिली तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ और दूसरे निशान सिंह के होने की जानकारी देते रहे। जिसके कारण गांव वासियों भी ब्रह्म में रहे। वहीं निशान सिंह के दोस्त कुलदीप सिंह ने बताया कि वह दोनों एक साथ भर्ती देखने के लिए गए थे और साथ ही पढ़ाई करते थे। उसने बताया बीते दिन शाम को उसकी निशान सिंह के साथ बात हुई थी। उसके शहीद होने की दोस्तों ने जानकारी दी तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ। उसने निशान सिंह को फोन किया तो वह बंद आ रहा था। जिसके बाद उसने गांव के दूसरे निशान सिंह से बात की। तो उसने अपनी बटालियन के अन्य अधिकारियों से जानकारी ली तो बात सहीं पाई गई। जिसके बाद निशान सिंह के शहीद होने का फोटो भी वायरल हो गया।
घरों की छतों पर खड़े होकर लोगों ने किया अंतिम दर्शन
निशान सिंह के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ा पड़ा। लोग घरों की छतों और दीवारों पर खड़े होकर उनके अंतिम दर्शन करते हुए नजर आए। वहीं लोगों ने अंतिम यात्रा के दौरान भारत माता और इंकलाब जिंदाबाद के नारे भी लगाए। वहीं लोगों की संख्या काफी अधिक बढ़ती तो अंतिम दर्शन करने के लिए एक दूसरे के साथ धक्का मुक्की भी करते हुए नजर आए।
चाचा को देख कर फौज में हुआ था भर्ती, बोला आरपार की हो लड़ाई
निशान सिंह का चाचा देवा सिंह सीआरपीएफ के रिटायर्ड जवान है। वहीं उन्होंने कहा कि निशान सिंह के साथ काफी प्यार था। देश के लिए उसने बहुत बड़ी शहादत दी है। उसने अपने माता पिता और देश का नाम रोशन किया है। वहीं उन्होंने कहा कि इस तरह के बेटों का जन्म हर घर में होना चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि कब तक इस तरह से जवान शहीद होते रहेंगे। कब तक मां के बेटे, बहनों के भाई और पत्नियों के सुहाग उजड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि अब आरपार की होनी चाहिए।
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गौरतलब है कि भावदीन के सेवा सिंह के पुत्र 26 वर्षीय शहीद निशान सिंह 26 जून 2013 को आर्मी में भर्ती हुए थे और दो महीने पहले ही फतेहाबाद के मड़गंधान निवासी रमनदीप से उनकी शादी हुई थी। निशान सिंह 19 राइफल्स के जवान थे और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में तैनात थे। शनिवार को मुठभेड़ के दौरान निशान सिंह आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हो गए। बेटे के शहीद होने की सूचना मिलते ही परिवार के साथ साथ गांव में मातम का माहौल बन गया। हाजारों की संख्या में लोग शहीद जवान निशान सिंह की अंतिम विदाई में शामिल हुए। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम जयवीर यादव, डीएसपी साधु राम, एसएचओ डिंग कश्मीरी लाल सहित अन्य गणमान्य लोगों ने शहीद निशान सिंह को पुष्प अर्पित कर के श्रद्धांजलि दी।
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पिता और भाई ने किया सेल्यूट, बहन बोली पूत तू क्यों चला गया, हुई बेहोश
उनका पार्थिव शरीर रविवार दोपहर बाद ढ़ाई बजे गांव में पहुंचा। अंतिम संस्कार के समय सेना के जवानों ने सलामी दी। वहीं पिता और भाई ने भी बेटे निशान सिंह को सेल्यूट किया। इस दौरान बड़ी बहन ने जब शहीद भाई का चेहरा देखा तो बोली पूत तू क्यो चला गया। इसी दौरान वह चक्कर खाकर गिर गई। वहीं पिता ने कहा कि उसकी दो दिन पहले ही बेटे निशान सिंह से बात हुई थी। वह कह रहा था की गेहूं खरीदकर घर में रख ले और वह पैसे ऑनलाइन भेज देगा। वहीं उन्होंने कहा कि दोपहर के समय भी निशान सिंह की घर पर बात हुई थी। बहनों और उसकी मां ने ही उनके साथ बात की। वहीं उसके भाई खजान सिंह ने कहा की कब तक बेटे इस तरह से शहीद होते रहेंगे। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
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टोल प्लाजा से गांव तक फूलों की वर्षा के साथ दी गई अंतिम विदाई
शहीद जवान का पार्थिव शरीर बठिंडा तक हवाई जहाज के माध्यम से लगाया गया। जिसके बाद गाड़ियों से हिसार रोड टोल प्लाजा तक पहुंचाया गया। यहां पर फूलों से सजी सेना की गाड़ी पर उनके पार्थिव शरीर को गांव भावदीन तक ले जाया गया। इस दौरान टोल प्लाजा पर ही काफी संख्या में लोग जमा था। जवान की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने नम आंखों से फूलों की वर्षा की। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से उनको विदाई दी गई।
परिवार में छाया मातम, मां व पत्नी की हुई बेसुध
बेटे की शहादत होने की सूचना मिलने के बाद परिवार में मातम का माहौल छा गया। जवान के परिवार में पिता डॉ. सेवा सिंह, मां प्रकाश कौर और छोटा भाई खजान सिंह व तीन बड़ी बहने हैं। भाई और बहनों की पहले ही शादी हो चुकी है। दो माह पहले (18 फरवरी) को निशान सिंह की शादी फतेहाबाद के मड़गंधा की रमनदीप के साथ हुई थी। शादी होने के आठ दिन बाद ही 26 मार्च को वह ड्यूटी पर लौट गया था। निशान सिंह के शहादत की सूचना मिलने पर मां, पत्नी और बहने बेसुध हो गई। वहीं परिवार सहित पूरे गांव को ही निशान सिंह के शहीद होने पर गहरा सदमा लगा है।
आर्मी की नेशनल हॉकी टीम का गोलकीपर था शहीद जवान निशान सिंह
कश्मीर के अनंतनाग में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुआ निशान सिंह आर्मी में नेशनल हॉकी टीम का गोलकीपर था। करीब नौ वर्ष पहले निशान सिंह की हिसार में ट्रायल देने के दौरान सेना भर्ती हुई थी। इससे पहले उसने सिरसा में सेना की भर्ती के लिया ट्रायल दिया। लेकिन आयु कम होने के कारण वह सेना में शामिल नहीं हो पाया। वहीं उनके परिजनों का कहना है कि निशान सिंह बचपन से ही सेना में भर्ती होने के लिए कहता था। मातृभूमि की सेवा करने के लिए कहता था।
शहीद निशान सिंह 12वीं तक अपने ही गांव भावदीन में पढ़ा और इसके बाद सिरसा के नेशनल कॉलेज से बीए कर रहा था। उसकी अंतिम वर्ष की परीक्षा का परिणाम आना शेष था। भर्ती के दो वर्ष बाद ही वह सेना की नेशनल हॉकी टीम में सिलेक्ट हो गया और गोलकीपर बन गया। हालांकि गांव में ही वह फुटबाल खेता था। भर्ती के बाद के बाद दो वर्ष तक वह सिक्किम में तैनात रहा। इसके बाद उसकी ड्यूटी जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में लगा दी गई। यहां आतंकवादियों से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गया। संवाद
गांव में एक ही नाम के दो जवान, पहले नहीं हुआ किसी को विश्वास
भावदीन गांव के दो जवान सेना में भर्ती है और दोनों का नाम निशान सिंह है हालांकि की दोनों की पोस्टिंग कश्मीर में अलग-अलग स्थानों पर है। दोस्तों के पास जब निशान सिंह के शहीद होने की सूचना मिली तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ और दूसरे निशान सिंह के होने की जानकारी देते रहे। जिसके कारण गांव वासियों भी ब्रह्म में रहे। वहीं निशान सिंह के दोस्त कुलदीप सिंह ने बताया कि वह दोनों एक साथ भर्ती देखने के लिए गए थे और साथ ही पढ़ाई करते थे। उसने बताया बीते दिन शाम को उसकी निशान सिंह के साथ बात हुई थी। उसके शहीद होने की दोस्तों ने जानकारी दी तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ। उसने निशान सिंह को फोन किया तो वह बंद आ रहा था। जिसके बाद उसने गांव के दूसरे निशान सिंह से बात की। तो उसने अपनी बटालियन के अन्य अधिकारियों से जानकारी ली तो बात सहीं पाई गई। जिसके बाद निशान सिंह के शहीद होने का फोटो भी वायरल हो गया।
घरों की छतों पर खड़े होकर लोगों ने किया अंतिम दर्शन
निशान सिंह के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ा पड़ा। लोग घरों की छतों और दीवारों पर खड़े होकर उनके अंतिम दर्शन करते हुए नजर आए। वहीं लोगों ने अंतिम यात्रा के दौरान भारत माता और इंकलाब जिंदाबाद के नारे भी लगाए। वहीं लोगों की संख्या काफी अधिक बढ़ती तो अंतिम दर्शन करने के लिए एक दूसरे के साथ धक्का मुक्की भी करते हुए नजर आए।
चाचा को देख कर फौज में हुआ था भर्ती, बोला आरपार की हो लड़ाई
निशान सिंह का चाचा देवा सिंह सीआरपीएफ के रिटायर्ड जवान है। वहीं उन्होंने कहा कि निशान सिंह के साथ काफी प्यार था। देश के लिए उसने बहुत बड़ी शहादत दी है। उसने अपने माता पिता और देश का नाम रोशन किया है। वहीं उन्होंने कहा कि इस तरह के बेटों का जन्म हर घर में होना चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि कब तक इस तरह से जवान शहीद होते रहेंगे। कब तक मां के बेटे, बहनों के भाई और पत्नियों के सुहाग उजड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि अब आरपार की होनी चाहिए।

सिरसा शहीद लांस नायक निशान सिंह पार्थिव शरीर को देखकर विलाप करती शहीद की पत्नी व अन्य परिजन। - फोटो : Sirsa

भावदीन के श्मशान घाट जाने के दौरान विलाप करती शहीद की पत्नी व बहन।- फोटो : Sirsa

साढे दिलां विच सदा वसदा रहेंगा पुत्त... श्मशान घाट में पंचत्तव में विलीन होने से पहले शहीद निशान सि- फोटो : Sirsa

सिरसा शहीद निशान सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित करते हुए एसडीएम।- फोटो : Sirsa

सदा अमर रही पुत्त... सिरसा पुष्प चक्र अर्पित के दौरान शहीद निशान सिंह के पार्थिव शरीर को आशीर्वाद ?- फोटो : Sirsa

सिरसा शहीद लांस नायक निशान सिंह को सलामी देते सेना के जवान।- फोटो : Sirsa

पार्थिव शरीर के दर्शन के बाद विलाप करती शहीद की बहन- फोटो : Sirsa

सिरसा श्मशान घाट जाने के दौरान शहीद निशान सिंह जनाजे में उमड़ी भीड़।- फोटो : Sirsa