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Sirsa News: तापमान में गिरावट और कूड़ा जलाने की घटनाओं ने बढ़ाया प्रदूषण का स्तर
Thu, 05 Nov 2026 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 05 Nov 2026 12:18 AM IST
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सिरसा। बस स्टैंड पर पुल के पास खाली पड़े प्लाट में झाडियों व कचरे में लगाई गई आग। एक घंटे तक ज
- शहर में सुबह शाम झाडू लगाकर कर्मचारी मुख्य सड़कों पर उड़ाते है धूल, वाहनों का होता है प्रदूषण
फोटो-- -- -- 35
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में तापमान में गिरावट और कूड़ा जलाने की घटनाओं के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। प्रशासन पराली प्रदूषण को लेकर सख्ती बरत रहा है लेकिन अब तक 11 मामले सामने आ चुके हैं। मौसम में आए बदलाव के कारण धुएं और धूल की परत दिन भर छाई रहती है।
त्योहारी सीजन में वाहनों का आवागमन बढ़ने से भी प्रदूषण में वृद्धि हुई है। अधिकारियों के अनुसार, पराली के अतिरिक्त शहरी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर कूड़ा जलाया जा रहा है। सुबह और शाम के समय मुख्य सड़कों पर झाड़ू लगाने से धूल उड़ती है।
कम तापमान के चलते यह धूल वातावरण में जमा हो जाती है। इसी कारण पूरे क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। बुधवार को एक्यूआई 260 तक पहुंच गया। मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए धुएं के कारण आमजन की परेशानी लगातार बढ़ने की आशंका है।
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बुधवार शाम चार बजे के बाद मौसम में अचानक बदलाव आया। बादल छाने और हल्की हवा चलने से ठंडक बढ़ गई। आईएमडी के अनुसार, अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री दर्ज किया गया।
पराली जलाने के मामले में सख्ती
प्रशासन पराली प्रदूषण को लेकर सख्ती अपनाए हुए है। इसके बावजूद अब तक 11 मामले पराली जलाने के सामने आ चुके हैं। बुधवार को कालांवाली क्षेत्र से पराली जलाने का एक और मामला मिला। पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड दिवाली और मौसम को देखते हुए हाई अलर्ट पर है। टीमें किसानों को पराली न जलाने के लिए लगातार जागरूक कर रही हैं। एसडीओ हरि प्रसाद ने बताया कि अधिकतर किसान पराली प्रबंधन की तकनीक अपना रहे हैं। हालांकि, वे पराली की गांठें उठाने के बाद बचे कचरे को खेत के आसपास जला देते हैं।
शहरी प्रदूषण के अन्य कारण
पराली के अलावा शहरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कूड़ा जलाया जा रहा है जो प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। सुबह और शाम मुख्य सड़कों पर झाड़ू लगाने से भी धूल उड़ती है। यह धूल कम तापमान के कारण वातावरण में जमा हो जाती है जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। त्योहारी सीजन के चलते वाहनों की आवाजाही भी काफी बढ़ गई है। इस कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 260 तक पहुंच गया है। बुधवार को शाम चार बजे के बाद मौसम में अचानक बदलाव देखा गया जिससे ठंडक बढ़ गई।
नगर परिषद की लापरवाही और जुर्माना कार्रवाई
नगर परिषद की ओर से खरीदी गई गनर मशीन का उपयोग बहुत कम किया जा रहा है। डेढ़ साल पहले खरीदी गई यह मशीन शहर में केवल एक या दो बार ही चलती हुई नजर आई है। इस मशीन का प्रयोग सड़कों पर झाड़ू लगाने से पहले पानी का छिड़काव करने के लिए किया जाता है, ताकि धूल बड़े स्तर पर न उठे। मुख्य सफाई निरीक्षक जयवीर सिंह ने बताया कि शहर में कहीं भी कूड़ा जलाता हुआ पाए जाने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सफाई दरोगा और कर्मचारियों को कूड़ा जलाने वालों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई कूड़ा जलाता है तो उसकी फोटो खींचकर अधिकारियों को देने को कहा गया है ताकि कार्रवाई हो सके। खाली प्लांटों में कूड़ा जलने पर प्लांट मालिक को नोटिस जारी किया जाएगा।
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में तापमान में गिरावट और कूड़ा जलाने की घटनाओं के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। प्रशासन पराली प्रदूषण को लेकर सख्ती बरत रहा है लेकिन अब तक 11 मामले सामने आ चुके हैं। मौसम में आए बदलाव के कारण धुएं और धूल की परत दिन भर छाई रहती है।
त्योहारी सीजन में वाहनों का आवागमन बढ़ने से भी प्रदूषण में वृद्धि हुई है। अधिकारियों के अनुसार, पराली के अतिरिक्त शहरी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर कूड़ा जलाया जा रहा है। सुबह और शाम के समय मुख्य सड़कों पर झाड़ू लगाने से धूल उड़ती है।
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कम तापमान के चलते यह धूल वातावरण में जमा हो जाती है। इसी कारण पूरे क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। बुधवार को एक्यूआई 260 तक पहुंच गया। मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए धुएं के कारण आमजन की परेशानी लगातार बढ़ने की आशंका है।
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बुधवार शाम चार बजे के बाद मौसम में अचानक बदलाव आया। बादल छाने और हल्की हवा चलने से ठंडक बढ़ गई। आईएमडी के अनुसार, अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री दर्ज किया गया।
पराली जलाने के मामले में सख्ती
प्रशासन पराली प्रदूषण को लेकर सख्ती अपनाए हुए है। इसके बावजूद अब तक 11 मामले पराली जलाने के सामने आ चुके हैं। बुधवार को कालांवाली क्षेत्र से पराली जलाने का एक और मामला मिला। पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड दिवाली और मौसम को देखते हुए हाई अलर्ट पर है। टीमें किसानों को पराली न जलाने के लिए लगातार जागरूक कर रही हैं। एसडीओ हरि प्रसाद ने बताया कि अधिकतर किसान पराली प्रबंधन की तकनीक अपना रहे हैं। हालांकि, वे पराली की गांठें उठाने के बाद बचे कचरे को खेत के आसपास जला देते हैं।
शहरी प्रदूषण के अन्य कारण
पराली के अलावा शहरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कूड़ा जलाया जा रहा है जो प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। सुबह और शाम मुख्य सड़कों पर झाड़ू लगाने से भी धूल उड़ती है। यह धूल कम तापमान के कारण वातावरण में जमा हो जाती है जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। त्योहारी सीजन के चलते वाहनों की आवाजाही भी काफी बढ़ गई है। इस कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 260 तक पहुंच गया है। बुधवार को शाम चार बजे के बाद मौसम में अचानक बदलाव देखा गया जिससे ठंडक बढ़ गई।
नगर परिषद की लापरवाही और जुर्माना कार्रवाई
नगर परिषद की ओर से खरीदी गई गनर मशीन का उपयोग बहुत कम किया जा रहा है। डेढ़ साल पहले खरीदी गई यह मशीन शहर में केवल एक या दो बार ही चलती हुई नजर आई है। इस मशीन का प्रयोग सड़कों पर झाड़ू लगाने से पहले पानी का छिड़काव करने के लिए किया जाता है, ताकि धूल बड़े स्तर पर न उठे। मुख्य सफाई निरीक्षक जयवीर सिंह ने बताया कि शहर में कहीं भी कूड़ा जलाता हुआ पाए जाने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सफाई दरोगा और कर्मचारियों को कूड़ा जलाने वालों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई कूड़ा जलाता है तो उसकी फोटो खींचकर अधिकारियों को देने को कहा गया है ताकि कार्रवाई हो सके। खाली प्लांटों में कूड़ा जलने पर प्लांट मालिक को नोटिस जारी किया जाएगा।