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Sirsa News: मेहनत और हौसले से चमकी सरोज की आत्मनिर्भरता, मनियारी की दुकान से बढ़ाई परिवार की आय
Fri, 06 Mar 2026 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 06 Mar 2026 11:01 PM IST
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सरोज रानी।
सिरसा। गांव मेहनाखेड़ा की सरोज ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कभी परिवार पर निर्भर रहने वाली सरोज ने अब अपने घर पर ही मनियारी का सामान बेचने की छोटी सी दुकान शुरू कर अपनी अलग पहचान बना ली है। मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर वह अब प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में मदद कर रही हैं।
सरोज वर्ष 2021 में भारत सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी थीं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत और छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद उन्होंने 20 हजार रुपये का ऋण लेकर अपने घर के एक हिस्से में दुकान शुरू की। शुरुआत में संकोच भी था, लेकिन धीरे-धीरे गांव की महिलाएं उनकी दुकान पर सामान लेने आने लगीं और अब रोजाना ग्राहक आते हैं। सरोज की दुकान में महिलाओं के लिए चूड़ियां, बिंदी, कंघी, क्लिप, काजल, नेल पॉलिश समेत हर जरूरत का सामान उपलब्ध है। अब महिलाओं को छोटे सामान के लिए दूर बाजार नहीं जाना पड़ता, जिससे उन्हें सुविधा भी मिली है।
पहले परिवार पर निर्भर, अब आत्मनिर्भर
सरोज बताती हैं कि पहले वह पूरी तरह परिवार पर निर्भर थीं और घर के कामों तक ही सीमित थीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनका नजरिया बदला। समूह की बैठकों ने उन्हें बचत, ऋण और कारोबार के बारे में जानकारी दी, जिससे उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का हौसला मिला।
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भविष्य की योजनाएं और प्रेरणा
सरोज का कहना है कि वह अपनी दुकान को और बड़ा करना चाहती हैं और उसमें अधिक प्रकार का सामान शामिल करना चाहती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और थोड़ा आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो वे भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
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रानियां खंड की महिलाएं हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर अपनी नई पहचान बना रही है। आज सरोज की छोटी सी दुकान न केवल उनके परिवार की आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। - बालूराम, ब्लॉक इंचार्ज रानियां।
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सरोज वर्ष 2021 में भारत सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी थीं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत और छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद उन्होंने 20 हजार रुपये का ऋण लेकर अपने घर के एक हिस्से में दुकान शुरू की। शुरुआत में संकोच भी था, लेकिन धीरे-धीरे गांव की महिलाएं उनकी दुकान पर सामान लेने आने लगीं और अब रोजाना ग्राहक आते हैं। सरोज की दुकान में महिलाओं के लिए चूड़ियां, बिंदी, कंघी, क्लिप, काजल, नेल पॉलिश समेत हर जरूरत का सामान उपलब्ध है। अब महिलाओं को छोटे सामान के लिए दूर बाजार नहीं जाना पड़ता, जिससे उन्हें सुविधा भी मिली है।
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पहले परिवार पर निर्भर, अब आत्मनिर्भर
सरोज बताती हैं कि पहले वह पूरी तरह परिवार पर निर्भर थीं और घर के कामों तक ही सीमित थीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनका नजरिया बदला। समूह की बैठकों ने उन्हें बचत, ऋण और कारोबार के बारे में जानकारी दी, जिससे उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का हौसला मिला।
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भविष्य की योजनाएं और प्रेरणा
सरोज का कहना है कि वह अपनी दुकान को और बड़ा करना चाहती हैं और उसमें अधिक प्रकार का सामान शामिल करना चाहती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और थोड़ा आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो वे भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
रानियां खंड की महिलाएं हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर अपनी नई पहचान बना रही है। आज सरोज की छोटी सी दुकान न केवल उनके परिवार की आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। - बालूराम, ब्लॉक इंचार्ज रानियां।