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Sirsa News: रोते बच्चे की सुनें पुकार...पेसिफायर की मिठास नहीं, लोरी की थपकी दें, विशेषज्ञ बोले- लंबे समय तक पेसिफायर के इस्तेमाल से बोलने की क्षमता पर असर और दांतों के बीच बढ़ रहा गैप

Wed, 24 Jun 2026 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Wed, 24 Jun 2026 10:50 PM IST
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Not the sweetness of a pacifier, but the lullaby's pat, experts say - long-term use of a pacifier affects speaking ability and increases the gap between teeth.
सिरसा। नवजात और छोटे बच्चों को शांत रखने के लिए पेसिफायर (चुसनी) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। रोते हुए बच्चे को चुप कराने, सुलाने या व्यस्त रखने के लिए माता-पिता इसका सहारा ले रहे हैं लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका लंबे समय तक और अत्यधिक उपयोग बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।
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बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार पेसिफायर का लगातार उपयोग बच्चों की प्राकृतिक विकास प्रक्रिया में बाधा बन सकता है। कई अभिभावक बच्चे के रोने का कारण जाने बिना तुरंत पेसिफायर दे देते हैं जिससे उसकी वास्तविक जरूरतें अनदेखी रह जाती हैं। लंबे समय तक पेसिफायर के उपयोग से दांतों और जबड़ों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे दांतों के बीच गैप, ओपन बाइट जैसी समस्याएं और दांतों के असामान्य विकास की आशंका रहती है। यह भविष्य में चबाने और निगलने में भी कठिनाई पैदा कर सकता है। इसके अलावा, लगातार पेसिफायर उपयोग से बच्चे बोलने और ध्वनियां निकालने का अभ्यास कम कर पाते हैं जिससे भाषा विकास में देरी और उच्चारण संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
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संक्रमण का खतरा भी बढ़ता है
विशेषज्ञों ने बताया कि पेसिफायर की साफ-सफाई में लापरवाही संक्रमण का कारण बन सकती है। गंदा पेसिफायर मुंह में जाने से बैक्टीरिया और वायरस प्रवेश कर सकते हैं जिससे कान के संक्रमण, मुंह के संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
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मुख्य समस्याएं
दांतों के बीच गैप
ओपन बाइट की समस्या
बोलने और भाषा विकास में देरी
शब्दों के उच्चारण में कठिनाई
दांतों व जबड़ों की संरचना में बदलाव
चबाने और निगलने में परेशानी
कान और मुंह के संक्रमण का खतरा
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बच्चे के रोने पर उसकी जरूरत समझकर उसे पूरा करना चाहिए। लोरी सुनाना या बातचीत करना बेहतर विकल्प है। पेसिफायर का अधिक उपयोग बच्चों के भावनात्मक और भाषाई विकास पर भी असर डालता है व संक्रमण का खतरा बढ़ाता है क्योंकि अक्सर इसकी उचित सफाई नहीं की जाती। - डॉ. अमित गुप्ता, बाल विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, सिरसा।
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