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वर्ल्ड बैंक से मिले 29 लाख खुद डकार गए अधिकारी

Fri, 22 Jul 2016 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा Updated Fri, 22 Jul 2016 12:47 AM IST
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रुपये डबल - फोटो : Desk
कचरा प्रबंधन प्लांट के लिए वर्ल्ड बैंक से मिली 55 लाख रुपये की सहायता राशि में से 29 लाख रुपये अधिकारी तथा कर्मचारी मिलकर खुद ही खा गए। फर्जी रिकॉर्ड तैयार हुआ। यहां तक एचसीएस स्तर के अधिकारी ने कागजों में ही सामान का निरीक्षण करके सर्टिफिकेट दे दिया, जबकि सामान की डिलीवरी तक नहीं हुई थी। असली बिलों को दबाकर लेटर पेड पर बिल इश्यू करवा लिए गए। एक साल दो माह चली जांच के बाद डबवाली नगर पालिका में हुए घोटालों की पोल खोलकर रख दी है। पुलिस हाऊसिंग कॉरर्पोरेशन, लोक निर्माण विभाग की मैकेनिकल तथा इलेक्ट्रिकल विंग के सहयोग से सीएम फ्लाइंग ने घोटालेबाजों के चेहरों से नाकाब उतार दिए हैं। देखना होगा कि अब पुलिस क्या करती है।
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    जांच में सामने आया है कि सबसे अधिक घपला वर्ल्ड बैंक से मिली सहायता राशि में हुआ है। वर्ष 2006-07 में कूड़ा कचरा प्रबंधन प्लांट के लिए यह सहायता राशि मिली थी। वर्ष 2011 तक पहुंचते-पहुंचते 50 लाख से ज्यादा हो गई। नियमों में तब्दीली के बाद सरकार ने इस राशि का प्रयोग कचरा प्रबंधन के लिए सामान खरीदने पर प्रयोग करने की अनुमति प्रदान की। 30 जून 2012 तक इस राशि को खर्च किया जाना था। ऐसे में अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने मिलीभगत करके लाखों रुपये हड़पने की योजना तैयार की। प्लान के अनुसार कार्य शुरू हुआ।
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योजना के अनुसार पांच महिंद्रा गाड़ी, 50 डस्टबिन, एक रिफ्यूज कंपेक्टर खरीदा जाना था। इसके लिए टेंडर जारी हुआ।

तीन फर्मों ने अप्लाई किया। कुरुक्षेत्र तथा अंबाला की दो फर्मों से सेटिंग करके टेंडर जारी किया गया। फिर फर्जी तरीके से रिकॉर्ड तैयार हुआ। फर्जी रिकॉर्ड के अनुसार कुरुक्षेत्र की फर्म ने मोहाली की एक कंपनी से पांच महिंद्रा गाड़ियां 22 जून 2012 को खरीद ली थी। इसी प्रकार 25 जून 2012 को अंबाला से 50 डस्टबिन की आपूर्ति दिखाई गई है। 26 जून 2012 को पूर्व एसडीएम सुभाष श्योराण, वर्क्स मैनेजर मनोज शर्मा, नगरपालिका सचिव राजा राम भुक्कल तथा जिला उद्योग विभाग के फील्ड इंवेस्टिगेट ज्ञान चंद ने उपरोक्त सामान का निरीक्षण भी कर लिया। फर्जी रिकॉर्ड में उपरोक्त फर्मों ने बिल 22 जून 2012 को जारी कर दिए थे। सीएम फ्लाईंग जांच करते हुए मोहाली पहुंची। पूरे मामले का भंड़ाफोड़ हो गया। तथ्य सामने आए कि महिंद्रा गाडिय़ों की डिलीवरी 25 जुलाई 2012 को हुई थी। रिफ्यूज कंपेक्टर 28 अगस्त 2012 को डबवाली पहुंचा था। इसी प्रकार डस्टबिन भी अंबाला से जुलाई 2012 मे आए थे। इसका सबूत सीएम फ्लाईंग ने दिया है। चूंकि जिस ट्रक की बिल्टी लगाई गई है, उसके मालिक से पूछताछ की गई है। मालिक का कहना है कि उनका ट्रक डबवाली गया ही नहीं। ऐसे में बिल्टी भी फर्जी निकली है। फर्जी रिकॉर्ड की बात यहीं खत्म नहीं होती, कंपनियों से मिले बिलों को लगाने की अपेक्षा फर्मों ने अपनी ही लेटर पेड पर बिल जारी कर दिए। गाडिय़ों का इंजन नंबर, चैसिस नंबर दर्ज नहीं किया। फिर फार्म नं. 21 भरने के बाद आरसी कार्यालय से आरसी जारी करवा ली गईं।
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फर्जी रिकॉर्ड के साथ खरीद में घोटाला
कचरा प्रबंधन के लिए सामान 55 लाख 79 हजार 640 रुपये से खरीदा गया था। जांच में सामने आया है कि 14 हजार 400 रुपये  के डस्टबिन को 25 हजार 800 रुपये, 18 लाख रुपये  के रिफ्यूज कंपेक्टर को 27 लाख 71 हजार रुपये में, दो लाख 45 हजार रुपये की महेंद्रा गाड़ी को पांच लाख 27 हजार रुपये  में खरीदा गया है। अधिकारी तथा कर्मचारियों ने मिलकर 19 लाख रुपये का घोटाला किया है।

बंदर पकड़ने में घपला
डबवाली में बंदर पकड़ने में भी घपला हुआ है। रिकॉर्ड की वेरिफिकेशन के बाद नगरपालिका का पूर्व सीनेटरी इंस्पेक्टर अविनाश सिंगला खुद ही फंस गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार बंदर पकड़ने पर एक लाख 44 हजार रुपये खर्च दिखाए गए हैं। इसे उत्तर प्रदेश के दो ठेकेदारों के जरिए सूरतिया तथा पानीपत के नजदीक स्थित कलेसर में छोड़ा दिखाया गया। कर्मचारी जिस चश्मदीद की देखरेख में बंदर छोड़े गए बता रहे थे, उससे पूछताछ की गई, तो उसने बताया कि उसके सामने बंदर नहीं छोड़े गए हैं।

गलियों के सैंपल फेल आए
गलियों की जांच के सैंपल भी फेल आए हैं। जांच की शुरूआत मीना बाजार की महिंद्रा ऑटो वाली गली से हुई थी। उस गली में दो लाख 13 हजार का घपला उजागर हुआ है। इसके साथ ही बिहारी लाल कानूनगो वाली गली तथा एक अन्य गली में चार लाख 99 हजार रुपये का घपला सिद्ध हुआ है। करीब 38 लाख 18 हजार 854 रुपये का घपला उजागर हुआ है।

सीनेटरी इंस्पेक्टर की सर्विस पर लग सकता है ब्रेक
भ्रष्टाचार के मामले में फंसे पूर्व सीनेटरी इंस्पेक्टर अविनाश सिंगला ने नौकरी मिलने के बाद पहली ज्वाइनिंग डबवाली नगरपालिका में की थी। भ्रष्टाचार की सारी हदें पार करते हुए जमकर घपला किया। वर्ल्ड बैंक की सहायता राशि या फिर बंदर पकड़ने में फर्जी बिल जारी करने में अहम रोल इसी का था। चूंकि दोनों मामले सीनेटरी विंग से संबंधित हैं। मोटा घपला सामने आने के बाद सिंगला की सर्विस पर ब्रेक लग सकते हैं।


शिकायत में 11 बिंदु दर्ज थे। 10 बिंदुओं की जांच हमने की थी। 11वें बिंदु की जांच एडीसी कार्यालय सिरसा की टीम कर रही है। मैंने जांच रिपोर्ट भेज दी है। इसके बारे में उच्च अधिकारी ही बता सकते हैं। मैं कुछ नहीं बता सकता।
-गुरमीत सिंह चोटियां, एसआई, सीएम फ्लाइंग, हिसार
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