डेरामुखी फैमिली आईडी विवाद: सरकार के आदेश पर जांच शुरू, नोटिस भेजकर किया तलब
जिला प्रशासन ने फैमिली आईडी के जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाया है। शिकायतकर्ताओं को अपना पक्ष रखने के लिए आना होगा।
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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में हुए बदलाव को लेकर उठे विवाद के बाद जांच शुरू हो गई है। डेरा अनुयायियों की ओर से मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। अब स्थानीय अधिकारियों ने इस संबंध में न केवल शिकायतकर्ताओं को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है, बल्कि फैमिली आईडी से संबंधितों को भी नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
सात दिन का नोटिस भेजकर आदेश दिए गए हैं कि किस आधार पर बदलाव किया गया, वे कागजात लेकर पेश हों। अब अधिकारी फैमिली आईडी में होने वाले बदलाव के नियम खंगालने में भी जुट गया हैं। हालांकि अधिकारिक रूप से कोई भी प्रशासनिक अधिकारी इस संबंध में कुछ भी बताने से बच रहे हैं।
डेरामुखी गुरमीत सिंह ने जून में मिली पैरोल अवधि के दौरान अपनी फैमिली आईडी में बदलाव करवाया। इसमें उन्होंने परिवार के किसी भी सदस्य को शामिल नहीं किया है, बल्कि मुंह बोली बेटी हनीप्रीत को शामिल किया है। इतना ही नहीं अपने पिता का नाम, स्थान भी दर्ज करवाया है। फैमिली आईडी की प्रति सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया है।
डेरा अनुयायी भी दो धड़ों में बंट गए हैं। पंजाब के अनुयायियों में भी कई लोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिया। इस पत्र में आरोप लगे हैं कि किसी ने डेरामुखी का फर्जी पीपीपी तैयार करवा दिया है। इतना ही नहीं आरोप लगे कि डेरामुखी की संपत्ति हड़पने के लिए ये सब किया गया है। इस पत्र में हनीप्रीत पर भी भी गंभीर आरोप लगे।
सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत के बाद सरकार ने इस मामले के जांच के आदेश दे दिए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि मामले में जांच के आदेश आ गए हैं। बताया जा रहा है कि पहले चरण में डेरामुखी के परिवार पहचान पत्र की प्रशासन अपने स्तर पर जांच करेगा कि असली है या नकली। इसके साथ ही परिवार पहचान पत्र से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को भी नोटिस जारी किया गया है।
डेरामुखी से भी हो सकती है पूछताछ, अधिकारी जानेंगे सच्चाई
सूत्र बताते हैं कि इस मामले में अधिकारी जेल में सजा काट रहे डेरामुखी से सबसे पहले पूछताछ कर सकते हैं। इसमें डेरामुखी से पूछा जाएगा कि क्या वाकई उन्होंने परिवार पहचान पत्र में बदलाव करवाया है या नहीं। डेरामुखी के बयान से ही स्पष्ट हो जाएगा कि ये फैमिली आईडी फर्जी है या असली। यदि असली है तो उसके बाद आगे की जांच में ये जानने का प्रयास किया जाएगा कि आखिर जिस आधार पर फैमिली आईडी में बदलाव हुए हैं, वे किन डोक्यूमेंट्स के आधार पर हुए हैं।