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डेरा प्रकरण:
Updated Tue, 01 May 2018 01:40 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
पंचकूला और सिरसा हिंसा मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के पीए राकेश अरोड़ा और डेरा आईटी विंग हेड विनीत सहित तीन मुख्य आरोपियों ने जमानत के लिए जिला अदालत में याचिका दायर की है। उक्त तीनों काफी समय से जेल में बंद हैं।
सोमवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगभूषण गुप्ता की अदालत ने तीनों आरोपियों की याचिका पर सुनाई की। अदालत तीन मई को याचिका पर फैसला सुनाएगी। हिंसा के आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए गठित एसआईटी ने डेरा मुखी के पीए राकेश अरोड़ा को सितंबर 2017 को सिरसा से गिरफ्तार किया था। आरोपी राकेश अरोड़ा पंजाब के संगरूर जिले की दड़वा मंडी का रहने वाला है। उस पर हिंसा की साजिश रचने और पंचकूला में हिंसा भड़काने का आरोप है। 25 अगस्त 2017 को हिंसा के दिन राकेश अरोड़ा लगातार हनीप्रीत और आदित्य इंसां के संपर्क में था।
वहीं, डेरा की आईटी विंग हेड विनीत को सिरसा एसआईटी ने मार्च 2018 को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया था। विनीत ने सिरसा एसआईटी के समक्ष खुलासा किया था कि उसने प्रमुख गुरमीत सिंह के पीए राकेश अरोड़ा के आदेश पर ही डेरे की सभी हार्ड डिस्क को हथोड़ा मारकर तोड़ा था। वहीं, कुछ हार्ड डिस्क खेतों में बनी कुईं में फेंक दी थी। विनीत ने डेरा में इंटरनेट सेवा बहाल रखने के लिए दिल्ली से हाईटेक उपकरण मंगवाए और उन्हें राजस्थान सीमा पर लगे मोबाइल टॉवर पर लगा दिया। 25 अगस्त 2017 को जब पूरे हरियाणा में सरकार ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी थी, तब इन हाईटेक उपकरणों के कारण डेरा सच्चा सौदा इंटरनेट सेवा से जुड़ा रहा। हिंसा का तीसरा आरोपी गुरुदत हनीप्रीत का भांजा है। उसने भी जमानत के लिए अदालत में याचिका लगाई है। आरोपी गुरुदत की गिरफ्तारी के लिए हरियाणा पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये इनाम रखा था।
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ये है पूरा मामला
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पिछले साल 25 अगस्त को पंचकूला की सीबीआई अदालत ने दो साध्वियों के साथ रेप करने का दोषी पाया था। सीबीआई के फैसले सुनाने के साथ ही पंचकूला और सिरसा में हजारों डेरा अनुयायियों ने हिंसा शुरू कर दी। खासतौर से पंचकूला में भारी हिंसा हुई थी। पंचकूला में कई गाड़ियां और दुकानें जला दी गईं। सिरसा में बिजली घर व वीटा मिल्क प्लांट को आग के हवाले कर दिया गया। उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में सिरसा में छह उपद्रवियों की मौत हो गई। पूरी हिंसा में 40 से ज्यादा लोगों की जाने चली गई।
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सिरसा।
पंचकूला और सिरसा हिंसा मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के पीए राकेश अरोड़ा और डेरा आईटी विंग हेड विनीत सहित तीन मुख्य आरोपियों ने जमानत के लिए जिला अदालत में याचिका दायर की है। उक्त तीनों काफी समय से जेल में बंद हैं।
सोमवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगभूषण गुप्ता की अदालत ने तीनों आरोपियों की याचिका पर सुनाई की। अदालत तीन मई को याचिका पर फैसला सुनाएगी। हिंसा के आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए गठित एसआईटी ने डेरा मुखी के पीए राकेश अरोड़ा को सितंबर 2017 को सिरसा से गिरफ्तार किया था। आरोपी राकेश अरोड़ा पंजाब के संगरूर जिले की दड़वा मंडी का रहने वाला है। उस पर हिंसा की साजिश रचने और पंचकूला में हिंसा भड़काने का आरोप है। 25 अगस्त 2017 को हिंसा के दिन राकेश अरोड़ा लगातार हनीप्रीत और आदित्य इंसां के संपर्क में था।
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वहीं, डेरा की आईटी विंग हेड विनीत को सिरसा एसआईटी ने मार्च 2018 को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया था। विनीत ने सिरसा एसआईटी के समक्ष खुलासा किया था कि उसने प्रमुख गुरमीत सिंह के पीए राकेश अरोड़ा के आदेश पर ही डेरे की सभी हार्ड डिस्क को हथोड़ा मारकर तोड़ा था। वहीं, कुछ हार्ड डिस्क खेतों में बनी कुईं में फेंक दी थी। विनीत ने डेरा में इंटरनेट सेवा बहाल रखने के लिए दिल्ली से हाईटेक उपकरण मंगवाए और उन्हें राजस्थान सीमा पर लगे मोबाइल टॉवर पर लगा दिया। 25 अगस्त 2017 को जब पूरे हरियाणा में सरकार ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी थी, तब इन हाईटेक उपकरणों के कारण डेरा सच्चा सौदा इंटरनेट सेवा से जुड़ा रहा। हिंसा का तीसरा आरोपी गुरुदत हनीप्रीत का भांजा है। उसने भी जमानत के लिए अदालत में याचिका लगाई है। आरोपी गुरुदत की गिरफ्तारी के लिए हरियाणा पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये इनाम रखा था।
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डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पिछले साल 25 अगस्त को पंचकूला की सीबीआई अदालत ने दो साध्वियों के साथ रेप करने का दोषी पाया था। सीबीआई के फैसले सुनाने के साथ ही पंचकूला और सिरसा में हजारों डेरा अनुयायियों ने हिंसा शुरू कर दी। खासतौर से पंचकूला में भारी हिंसा हुई थी। पंचकूला में कई गाड़ियां और दुकानें जला दी गईं। सिरसा में बिजली घर व वीटा मिल्क प्लांट को आग के हवाले कर दिया गया। उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में सिरसा में छह उपद्रवियों की मौत हो गई। पूरी हिंसा में 40 से ज्यादा लोगों की जाने चली गई।