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जीएसटी में राहत का दावा जमीनी हकीकत में जुमला : सैलजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Sep 2025 10:22 PM IST
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Claims of relief in GST are mere rhetoric in reality: Selja
सिरसा। सांसद कुमारी सैलजा ने बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार ने हाल ही में जीएसटी की दरों में की गई कटौती को बड़ी राहत के रूप में प्रचारित किया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पैकेड खाद्य पदार्थ और आवश्यक दवाइयों जैसी वस्तुएं आज भी पुरानी कीमतों पर ही बिक रही हैं। वहीं, वाहन सेक्टर इस जीएसटी कटौती का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है।
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सांसद ने कहा कि सरकार और उसके प्रतिनिधि लोगों के बीच जाकर दावा कर रहे हैं कि जीएसटी दरों में कमी से उन्हें क्या क्या लाभ होगा। सरकार ने जीएसटी कटौती को जनता को राहत के नाम पर प्रचारित किया है, असलियत में यह एक जुमला साबित हो रहा है। पैक्ड फूड पर 47 प्रतिशत उपभोक्ताओं को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
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इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद पर केवल 34 प्रतिशत को ही राहत मिलने का दावा किया जा रहा है। दवाइयां पर उपभोक्ताओं के लिए कोई बदलाव नहीं, कंपनियां अपने स्तर पर पुराने दाम ही रखे हुए हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि करीब 78,000 से अधिक शिकायतें उपभोक्ताओं ने दी कि जीएसटी कटौती का फायदा उन्हें नहीं मिल रहा। इनमें से 3,000 से अधिक शिकायतें सिर्फ केंद्र सरकार तक पहुंची हैं।
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राहत से अधिक बोझ साबित हो रहा यह कदम

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि कागज पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि किताब बनाने का खर्च बढ़ गया और छपाई महंगी हो गई, जबकि जनता को दिखाने के लिए कहा गया कि किताबों पर टैक्स घटा दिया गया है। जीएसटी की दरों में संशोधन का लाभ जहां कुछ खास सेक्टरों को मिला है। वहीं आम उपभोक्ता के लिए यह कदम राहत से अधिक बोझ साबित हो रहा है। जब तक कंपनियां और बाजार स्तर पर ईमानदारी से नई दरों को लागू नहीं करेंगे, तब तक जीएसटी कटौती केवल एक प्रचार मात्र बनकर रह जाएगी।




एमएसपी पर कई मंडियों में धान व बाजरे की खरीद शुरू नहीं, किसानों में रोष



सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि प्रदेश की अनेक अनाज मंडियों में सरकारी खरीद व्यवस्था प्रभावित होने से किसानों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। भिवानी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, अंबाला और हिसार की मंडियों में अभी तक बाजरे की सरकारी खरीद प्रारंभ नहीं हो सकी है। इसी तरह कैथल जिले के गुहला-चीका व कलायत मंडियों में धान की खरीद शुरू न होने से किसान सोमवार को धरने पर बैठ गए। उन्होंने मार्केट कमेटी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन कर सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद समय पर न होने से उन्हें अपनी उपज व्यापारी को औने-पौने दामों में बेचनी पड़ रही है, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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