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Sirsa News: बहुलता वन्यजीवों की और अभाव सुविधाओं का

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Dec 2023 10:44 PM IST
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Abundance of wildlife and lack of facilities
गांव गुसाईंआना में पौधरोपण करते ग्रामीण।
चोपटा। हरियाणा के गांवों में छोटी सरकार के गठन को एक साल हो गया है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार खत्म करने का नारा देकर ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों में ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू करके सरपंचों के वित्तीय अधिकार कम करके निगरानी का काम ज्यादा सौंपा है। इसी कड़ी में राजस्थान की सीमा पर बसा हरियाणा के पैंतालिसा क्षेत्र का अंतिम गांव गुसाईंआना वन्यजीवों के प्रति प्रेम और भक्ति भावना की खुशबू से महकता रहता है। इस गांव के लोग वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते है। सरपंच रघुवीर सिंह भी गांव में विकास कार्य करवाने में जुटे हैं।
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राज्य के अंतिम छोर पर बसा होने के कारण विकास कार्यों के मामले में गांव काफी पिछड़ा है। गांव में मुख्य गली कच्ची है। यातायात के लिए बस सुविधा नहीं है। बिजली के खंबे टूटे हैं। लटकते तार से हादसे का खतरा है। शिक्षा, स्वास्थ्य आदि मूलभूत सेवाएं बेहद लचर हैं। ग्रामीण सरकार से सुविधाएं मांग रहे हैं। गांव में विकास के लिए लोग नए सरपंच पर आस लगाए बैठे हैं।
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गांव की ढाणियों में पीने के पानी की व्यवस्था की गई है। तीन शेड बनवाए गए। जलघर की डिग्गी में अतिरिक्त पाइपलाइन की व्यवस्था की गई है। वन्यजीवों के लिए पानी की एक टंकी बनवाई गई है। दो टंकी और बनवाई जाएंगी। ग्रामीणों के बैठने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर डेस्क लगवाए गए। स्कूल में रंगरोगन और गांव में सफाई करवाई गई है। मुख्य गली को पक्का करवाने, श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण, स्कूल के उच्चीकरण, बस सेवा, लघु अभयारण्य बनाने की मांग की गई है। बजट आते ही कई विकास कार्य शुरू करवाए जाएंगे। - रघुवीर सिंह, सरपंच, गांव गुसाईंआना।
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गांव में सरकार के सहयोग से कई विकास कार्य करवाए गए हैं। गांव के वन्यजीव प्रेमी क्षेत्र में लघु अभयारण्य बनाने की मांग करते रहते हैं। गांव में पांचवीं और आठवीं कक्षा तक के ही दो स्कूल हैं। इससे आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गावों में जान पड़ता है, जिससे विशेषकर लड़कियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कॉलेज स्तर की पढ़ाई के लिए तो गांव से 40 किमी दूर सिरसा जाना पड़ता है। बस सुविधा न होने के कारण अधिकतर माता-पिता बेटियों की पढ़ाई छुड़वा लेते है। गांव में फिरनी भी नहीं है। - अंजना रजनीश जांगड़ा, ब्लॉक समिति सदस्य।
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नहरी पानी कम मात्रा में पहुंचने के कारण ज्यादातर जमीन बिना बिजाई रह जाती है। किसी वन्यजीव के साथ कोई दुर्घटना होने पर ग्रामीण उसका इलाज अपने खर्च पर करवाते हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति में अपने ही खर्चे पर हिसार या अन्य स्थानों पर ले जाना पड़ता है। अगर गांव में वन्यजीव अभयारण्य बन जाता तो ऐसा नहीं करना पड़ता। गांव में सफाई की व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। गांव में शिक्षा के लिए स्कूल को अपग्रेड किया जाए। -

दिनेश कुमार, ग्रामीण।
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धार्मिक आस्था


गांव में गुसाईंआना महाराज के समाधि लेने के बाद ग्रामीणों ने उस स्थान पर एक मंदिर बनवा दिया। मंदिर में गुसाईंजी की याद में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मेला लगता है। वहां प्राचीन कुआं और गुसाईं के माध्यम से खोदा गया जोहड़ भी है। गांव के लोग पूरी आस्था के साथ यहां पूजा, अर्चना करते हैं। गांव में हनुमान मंदिर, रामदेव का रामदेवरा, भगवान जंभेश्वर मंदिर, ठाकुरजी मंदिर, शिवजी मंदिर, जाहरवीर गोगाजी की गोगामेड़ी, माताजी का मंदिर और अखाड़ा बाबा का मंदिर है। वहां गांववासी पूजा, अर्चना करते हैं। गांव में मिट्टी का प्राचीन अखाड़ा है।
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