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Sirsa News: 251 महिलाओं ने निकाली भव्य मंगल कलश यात्रा
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सिरसा। कलश यात्रा में भाग लेते हुए श्रद्धालु। संस्था।
सिरसा। अखिल भारतीय धर्मसभा के तत्वावधान में श्री मद्भागवत कथा का आयोजन शुक्रवार को अनाज मंडी स्थित श्री श्याम बगीची धाम में किया गया। श्री मद्भागवत कथा से पूर्व विशाल मंगल कलश यात्रा निकाली गई। मंगल कलश यात्रा नेहरू पार्क से आंरभ हुई। शुक्रवार प्रात: श्रद्धालु महिलाएं नेहरु पार्क स्थित रामा क्लब स्थित श्री राम मंदिर में एकत्रित हुई।
शोभा यात्रा में 251 महिलाएं अपने सिर पर मंगल कलश धारण किए चल रहीं थी। उनके पीछे श्रद्धालु महिलाएं व पुरुष हाथ में धर्म पताका लिए हुए चल रहे थे। धर्म प्रेमी लोग सुंदर भजनों का उच्चारण कर रहे थे। बैंड बाजों और ढोल नगाड़ों, धार्मिक धुनों ने माहौल को भक्तिनुमा बना दिया। इस दौरान रथ पर कथावाचक अखिल भारतीय धर्मसभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी दिनेशानंद शास्त्री विराजमान थे।
यह मंगल कलश यात्रा नेहरु पार्क से आरंभ होकर अनाज मंडी स्कूल, अनाज मंडी होते हुए श्री श्याम बगीची धाम में कथा स्थल पर पहुंची। शोभा यात्रा का नगर में जगह-जगह स्वागत किया गया।
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प्रवचन करते हुए स्वामी दिनेशानंद शास्त्री ने कहा कि 5000 हजार वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के गांव नैमिषारण्य में 88,000 हजार ऋषियों ने एक हजार साल की कथा की। उस समय भी कथा से पूर्व हजारों की संख्या में ऋषियों, मुनियों ने महिलाओं के साथ शामिल होकर मंगल कलश यात्रा निकाली थी।
मंगल कलश धारण करने से जहां आत्मा शुद्ध एवं पवित्र होती है, वहीं इसके धारण करने से अनेक बीमारियों से भी मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि मंगल कलश में भरा हुआ जल आम पानी न होकर सात दिनों की भागवत के उपरांत अमृत बन जाता है। उन्होंने कहा कि इस जल को पीने से बीमारी दूर होती है, इससे स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और इस पवित्र जल को घर में छिड़कने से दुखों का नाश होता है, घर में सुख समद्धि का वास होता है।
कथा का पाठ करने और सुनने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, पापों से मुक्ति मिलती है। कथा के श्रवण से जीवन का निर्माण होता है। संत का आदर करने से उसे सुखों की प्राप्ति होती है और उसके अवगुणों का नाश होता है। इस अवसर पर धर्म सभा के जिला संरक्षक महेश सुरेेकां, हनुमान बंसल, रतन सिंगला, घनश्याम बंसल, हेमंत डरोलिया, पवन मित्तल, अशोक गोयल आदि मौजूद रहे।
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शोभा यात्रा में 251 महिलाएं अपने सिर पर मंगल कलश धारण किए चल रहीं थी। उनके पीछे श्रद्धालु महिलाएं व पुरुष हाथ में धर्म पताका लिए हुए चल रहे थे। धर्म प्रेमी लोग सुंदर भजनों का उच्चारण कर रहे थे। बैंड बाजों और ढोल नगाड़ों, धार्मिक धुनों ने माहौल को भक्तिनुमा बना दिया। इस दौरान रथ पर कथावाचक अखिल भारतीय धर्मसभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी दिनेशानंद शास्त्री विराजमान थे।
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यह मंगल कलश यात्रा नेहरु पार्क से आरंभ होकर अनाज मंडी स्कूल, अनाज मंडी होते हुए श्री श्याम बगीची धाम में कथा स्थल पर पहुंची। शोभा यात्रा का नगर में जगह-जगह स्वागत किया गया।
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प्रवचन करते हुए स्वामी दिनेशानंद शास्त्री ने कहा कि 5000 हजार वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के गांव नैमिषारण्य में 88,000 हजार ऋषियों ने एक हजार साल की कथा की। उस समय भी कथा से पूर्व हजारों की संख्या में ऋषियों, मुनियों ने महिलाओं के साथ शामिल होकर मंगल कलश यात्रा निकाली थी।
मंगल कलश धारण करने से जहां आत्मा शुद्ध एवं पवित्र होती है, वहीं इसके धारण करने से अनेक बीमारियों से भी मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि मंगल कलश में भरा हुआ जल आम पानी न होकर सात दिनों की भागवत के उपरांत अमृत बन जाता है। उन्होंने कहा कि इस जल को पीने से बीमारी दूर होती है, इससे स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और इस पवित्र जल को घर में छिड़कने से दुखों का नाश होता है, घर में सुख समद्धि का वास होता है।
कथा का पाठ करने और सुनने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, पापों से मुक्ति मिलती है। कथा के श्रवण से जीवन का निर्माण होता है। संत का आदर करने से उसे सुखों की प्राप्ति होती है और उसके अवगुणों का नाश होता है। इस अवसर पर धर्म सभा के जिला संरक्षक महेश सुरेेकां, हनुमान बंसल, रतन सिंगला, घनश्याम बंसल, हेमंत डरोलिया, पवन मित्तल, अशोक गोयल आदि मौजूद रहे।