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कर्मचारियों के जेल भरो आंदोलन में पुरुषों की बजाए महिला कर्मचारियों ने अधिक गिरफ्तारियां हल्की बरसात में 907 कर्मचारियों ने जेल
Updated Fri, 29 Jun 2018 01:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। सर्व कर्मचारी संघ से जुड़े विभिन्न विभागों के 907 कर्मचारियों ने वीरवार को सिरसा में जेल भरो आंदोलन के तहत गिरफ्तारियां दी। डेढ़ बजे कर्मचारियों ने शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में अपनी गिरफ्तारियां दी। पुलिस ने मौके पर उनके हस्ताक्षर करके साथ के साथ ही छोड़ दिया। जेल भरो आंदोलन का नेतृत्व सर्व कर्मचारी संघ के मदन लाल खोथ ने किया।
इससे पहले विभिन्न विभागों के कर्मचारी वीरवार सुबह करीब 10 बजे से ही चौधरी देवीलाल पार्क में एकत्रित होना शुरू हो गए। भाषणबाजी और नारेबाजी के बाद बूंदाबांदी के बीच करीब 12 बजे पार्क से कर्मचारी रवाना हुए। पुलिस ने कर्मचारियों को भगत सिंह खेल स्टेडियम के पास रोकने का प्रयास किया। लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि वे डीसी कार्यालय के पास ही गिरफ्तारियां देंगे। कर्मचारी डीसी कार्यालय पहुंच गए। वहां पर आधा घंटा यूनियन नेताओं ने भाषणबाजी की। यूनियन नेताओं ने ड्यूटी मैजिस्ट्रेट से कहा कि जहां पर उनके चाय-पानी का प्रबंध किया जाए। ड्यूटी मैजिस्ट्रेट संजय चौधरी ने कहा कि उनका काम तो गिरफ्तारी के बाद जमानत लेना है। इसके बाद कर्मचारी डीसी कार्यालय से पैदल ही शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम की ओर चल पड़े। पुलिस ने कर्मचारियों को बसों में बैठने के लिए कहा। लेकिन कर्मचारी बसों में नहीं बैठे। खेल स्टेडियम में अपनी गिरफ्तारियां दी। ड्यूटी मैजिस्ट्रेट संजय चौधरी ने कहा कि जगह के अभाव में वे उन्हें रख नहीं सकते। इसलिए उन्हें पर जमानत दी जाती है।
907 ने दी गिरफ्तारियां
पुलिस के समक्ष 907 कर्मचारियों ने गिरफ्तारियां दी। ज्यादातर संख्या महिलाओं की थी। करीब 559 महिला कर्मचारियों ने गिरफ्तारियां दी जबकि पुरुष कर्मचारियों की संख्या 348 थी। ऐसे में गिरफ्तारी देने में पुरुष कर्मचारियों के बजाए महिला कर्मचारी आगे रहीं। पुलिस विभाग ने कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए करीब सात बसों का इंतजाम किया था।
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भाजपा सरकार समझौते से मुकर रही है
प्रधान मदनलाल खोथ ने बताया कि आज पूरे भारत के 742 जिलों में जिला मुख्यालयों के सामने सभी विभागों के कर्मचारियों ने मांगों को लेकर जेल भरो आंदोलन किया है। खोथ ने कहा कि भाजपा सरकार कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान समझौता करके मुकर जाती है। कर्मचारियों ने सरकार को चेताया है कि समय रहते यदि सरकार ने मांगों को लागू नहीं किया तो सभी विभागों के कर्मचारी लाखों की तादाद में विधानसभा शुरू होते ही अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। इस मौके पर लछमन दास चलाना, करणी सिंह भाटी, सुभाष, प्रताप, बाबूलाल, रामराज राय, रिटायर संघ से किशोरी लाल मेहता, मिड डे मिल से राजरानी, आंगनबाड़ी नेता शंकुतला जागलान, प्रमिला चौधरी, बिजली यूनियन से अविनाश कंबोज, नगरपालिका से चंद्रशेखर, सुखदेव, राजेश, ग्रामीण चौकीदार से सुभाष भट्टी, वन विभाग से हरि सिंह कसवां, हेमसा से टेकचंद मेहता, किसान सभा से राजकुमार शेखुपुरिया, सुरजीत सिंह, सीटू नेता विजय ढुकड़ा, भवन निर्माण से नथूराम भारुखेड़ा, रोडवेज से सुरजीत अरोड़ा, पब्लिक हेल्थ से कृपा शंकर, जनवादी समिति से बलवीर कौर, फायर ब्रिगेड से रणवीर फगोडिया उपस्थित थे।
ये हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें:
सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए। उच्च न्यायालय के 31 मई 2018 के निर्णय को निरस्त किया जाये। सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर विधायी पावर का उपयोग करके कानून बनाकर सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करें। समान काम समान वेतन दिया जाए। ठेका प्रथा व निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाई जाए। नई पेंशन योजना समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए। खाली पदों पर स्थायी भर्ती की जाए। सातवें वेतन आयोग के सभी भत्ते जनवरी 2016 से लागू किए जाए। सेवानिवृत्त कर्मचारियों व परियोजनाओं में आंगनबाड़ी आशा वर्कर मिड डे मिल कर्मचारियों से बातचीत में बनी सहमति को तुरंत लागू किया जाए। जोखिम पूर्ण कार्य करने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता 5000 रुपये मासिक दिया जाए। पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करें और एनपीएस को बंद करें। एक्सग्रेसिया योजना को लागू करें। पंजाब के समान वेतन मान लागू किया जाए।
सिरसा। सर्व कर्मचारी संघ से जुड़े विभिन्न विभागों के 907 कर्मचारियों ने वीरवार को सिरसा में जेल भरो आंदोलन के तहत गिरफ्तारियां दी। डेढ़ बजे कर्मचारियों ने शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में अपनी गिरफ्तारियां दी। पुलिस ने मौके पर उनके हस्ताक्षर करके साथ के साथ ही छोड़ दिया। जेल भरो आंदोलन का नेतृत्व सर्व कर्मचारी संघ के मदन लाल खोथ ने किया।
इससे पहले विभिन्न विभागों के कर्मचारी वीरवार सुबह करीब 10 बजे से ही चौधरी देवीलाल पार्क में एकत्रित होना शुरू हो गए। भाषणबाजी और नारेबाजी के बाद बूंदाबांदी के बीच करीब 12 बजे पार्क से कर्मचारी रवाना हुए। पुलिस ने कर्मचारियों को भगत सिंह खेल स्टेडियम के पास रोकने का प्रयास किया। लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि वे डीसी कार्यालय के पास ही गिरफ्तारियां देंगे। कर्मचारी डीसी कार्यालय पहुंच गए। वहां पर आधा घंटा यूनियन नेताओं ने भाषणबाजी की। यूनियन नेताओं ने ड्यूटी मैजिस्ट्रेट से कहा कि जहां पर उनके चाय-पानी का प्रबंध किया जाए। ड्यूटी मैजिस्ट्रेट संजय चौधरी ने कहा कि उनका काम तो गिरफ्तारी के बाद जमानत लेना है। इसके बाद कर्मचारी डीसी कार्यालय से पैदल ही शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम की ओर चल पड़े। पुलिस ने कर्मचारियों को बसों में बैठने के लिए कहा। लेकिन कर्मचारी बसों में नहीं बैठे। खेल स्टेडियम में अपनी गिरफ्तारियां दी। ड्यूटी मैजिस्ट्रेट संजय चौधरी ने कहा कि जगह के अभाव में वे उन्हें रख नहीं सकते। इसलिए उन्हें पर जमानत दी जाती है।
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907 ने दी गिरफ्तारियां
पुलिस के समक्ष 907 कर्मचारियों ने गिरफ्तारियां दी। ज्यादातर संख्या महिलाओं की थी। करीब 559 महिला कर्मचारियों ने गिरफ्तारियां दी जबकि पुरुष कर्मचारियों की संख्या 348 थी। ऐसे में गिरफ्तारी देने में पुरुष कर्मचारियों के बजाए महिला कर्मचारी आगे रहीं। पुलिस विभाग ने कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए करीब सात बसों का इंतजाम किया था।
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भाजपा सरकार समझौते से मुकर रही है
प्रधान मदनलाल खोथ ने बताया कि आज पूरे भारत के 742 जिलों में जिला मुख्यालयों के सामने सभी विभागों के कर्मचारियों ने मांगों को लेकर जेल भरो आंदोलन किया है। खोथ ने कहा कि भाजपा सरकार कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान समझौता करके मुकर जाती है। कर्मचारियों ने सरकार को चेताया है कि समय रहते यदि सरकार ने मांगों को लागू नहीं किया तो सभी विभागों के कर्मचारी लाखों की तादाद में विधानसभा शुरू होते ही अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। इस मौके पर लछमन दास चलाना, करणी सिंह भाटी, सुभाष, प्रताप, बाबूलाल, रामराज राय, रिटायर संघ से किशोरी लाल मेहता, मिड डे मिल से राजरानी, आंगनबाड़ी नेता शंकुतला जागलान, प्रमिला चौधरी, बिजली यूनियन से अविनाश कंबोज, नगरपालिका से चंद्रशेखर, सुखदेव, राजेश, ग्रामीण चौकीदार से सुभाष भट्टी, वन विभाग से हरि सिंह कसवां, हेमसा से टेकचंद मेहता, किसान सभा से राजकुमार शेखुपुरिया, सुरजीत सिंह, सीटू नेता विजय ढुकड़ा, भवन निर्माण से नथूराम भारुखेड़ा, रोडवेज से सुरजीत अरोड़ा, पब्लिक हेल्थ से कृपा शंकर, जनवादी समिति से बलवीर कौर, फायर ब्रिगेड से रणवीर फगोडिया उपस्थित थे।
ये हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें:
सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए। उच्च न्यायालय के 31 मई 2018 के निर्णय को निरस्त किया जाये। सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर विधायी पावर का उपयोग करके कानून बनाकर सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करें। समान काम समान वेतन दिया जाए। ठेका प्रथा व निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाई जाए। नई पेंशन योजना समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए। खाली पदों पर स्थायी भर्ती की जाए। सातवें वेतन आयोग के सभी भत्ते जनवरी 2016 से लागू किए जाए। सेवानिवृत्त कर्मचारियों व परियोजनाओं में आंगनबाड़ी आशा वर्कर मिड डे मिल कर्मचारियों से बातचीत में बनी सहमति को तुरंत लागू किया जाए। जोखिम पूर्ण कार्य करने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता 5000 रुपये मासिक दिया जाए। पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करें और एनपीएस को बंद करें। एक्सग्रेसिया योजना को लागू करें। पंजाब के समान वेतन मान लागू किया जाए।