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लेबर पलायन के बाद गेहूं खरीद का बना संकट, डीसी बोले- आढ़तियों को ही करना होगा इंतजाम, वे बाहर से भी मजदूर ला सकते हैं

Fri, 10 Apr 2020 01:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 10 Apr 2020 01:45 AM IST
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trader get out side labour for wheat purchaseing
gehu ki katayi me lage kisan aur majdur - फोटो : RohtakCity
रोहतक। जिले के कई गांवों में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने बीस अप्रैल से अधिकारिक खरीद का एलान भी कर दिया है। लेकिन आढ़तियों से लेकर प्रशासन अब तक एक सवाल का हल नहीं ढूंढ सके हैं कि लेबर के बिना गेहूं की खरीद कैसे हो पाएगी।
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जिले में फसलों की खरीद के लिए चार मंडियां हैं, जिनमें सिर्फ मंडी के कामकाज में स्किल्ड सिर्फ करीब सौ मजदूर हैं। रोहतक में पचास, सांपला में तीस और महम मंडी में 25 लेबर हैं, कलानौर में एक भी नहीं है। इस बार जिले में गेहूं का रकबा एक लाख हेक्टेयर है। पिछले साल जिले की मंडियों में करीब तीस लाख टन गेहूं आया था, इस बार भी उतना ही आने का अनुमान है। रोहतक मंडी में ही 85 आढ़ती हैं, हरेक के पास क्षमता के मुताबिक दस से पचास लेबर काम करते हैं। इस तरह जिले की सभी मंडियों में खरीद प्रबंद के लिए कम से कम ढाई हजार मजदूर चाहिए। जिनका इंतजाम करना फिलहाल बहुत मुश्किल लग रहा है। आढ़तियों के मुताबिक यहां 90-95 फीसदी मजदूर बिहार से आते हैं। हर फसल सीजन में वे ठेकेदारों के जरिए यहां आते हैं और काम निपटाने के बाद वापस लौट जाते हैं। कोरोना को लेकर देश भर में किए गए लॉक डाउन के चलते कोई भी यहां आने को तैयार नहीं है। हर आढ़ती के अपने कॉन्टैक्ट में कुछ ठेकेदार होते हैं, जो उनके लिए मजदूर का इंतजाम करते हैं। आढ़तियों ने सभी ठेकेदारों को फोन कर लिया, लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर दिए। कोई भी मजदूर यहां आने को तैयार नहीं है। आढ़तियों को आशंका है कि अगर सरकार ने मजदूरों के आने के लिए एक दिन भी लॉक डाउन खोला तो जो मजदूर यहां हैं, वे भी चले जाएंगे। अगर आढ़ती स्थानीय मजूदूरों से काम लेते हैं तो उनसे सिर्फ भरवाई ही करवाई जा सकती है। लोडिंग, अन-लोडिंग और तोलाई उनके बस का काम नहीं है। इसलिए यह विकल्प भी कारगर नहीं है। बुधवार को आढ़ती एसो सिएशन ने डीसी आरएस वर्मा से मीटिंग कर समस्या बताई थी। तो उनका कहना था कि लेबर बुलाओ, उनके परमिट का इंतजाम प्रशासन कर देगा। लेकिन दूसरे राज्यों से मजदूर लाने के मामले में प्रशासन भी बेबस है। जब तक हरियाणा सरकार केंद्र से बात कर इस बारे में कोई नीतिगत फैसला नहीं लेती, समस्या का हल मुश्किल है।
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पिछले साल आया था तीस लाख टन गेहूं
जिले की मंडियों में पिछले साल करीब तीस लाख टन गेहूं आया था। जिसमें से 21 लाख टन रोहतक, करीब चार-चार लाख टन महम और सांपला और बाकी कलानौर में आया था। फूड सप्लाई विभाग के अलावा वेयरहाउस, हेफेड और एफसीआई ने गेहूं की खरीद की थी।
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हर बार फसल खरीद के समय लेबर का इंतजाम आढ़ती ही खुद करते हैं। इस बार भी उन्हें इंतजाम करने को कहा गया है। वे बाहर से लेबर ला सकते हैं, उनके रहने-खाने का इंतजाम आढ़तियों को करना होगा। प्रशासन मजदूरों की स्वास्थ्य जांच करवाएगा।

- आरएस वर्मा, डीसी, रोहतक
90-95 प्रतिशत लेबर यहां बिहार से आती है। वहां के सभी ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं, कोई भी आने को तैयार नहीं है। स्थानीय लेबर से मंडी का काम नहीं लिया जा सकता। राज्य सरकार को इस बारे में जल्द दखल देकर समाधान ढूंढना चा हिए।
- डिंपल, प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन, रोहतक
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