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गरीब की समस्या, भूख लगे तो क्या खाएं अमीर की समस्या, क्या खाएं तो भूख लगे 

Sat, 02 Apr 2016 02:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sat, 02 Apr 2016 02:22 AM IST
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 The problem of poor , hungry , then eat The problem of the rich , then you are hungry eat
राष्ट्र संत तरुण सागर - फोटो : अमर उजाला
आदमी अमीर हो या गरीब, समस्याएं तो दोनों के सामने हैं। गरीब की समस्या है, भूख लगे तो क्या खाएं जबकि अमीर की समस्या है, क्या खाएं तो भूख लगे। 21वीं सदी का इतना प्रभाव है कि पहले अभावों में खुशियां थीं और आज खुशियों का अभाव है। अमीर और गरीब में फर्क इतना है कि अमीर मंदिरों के अंदर मांग रहा है, जबकि गरीब मंदिर के बाहर मांग रहा है। इसलिए अपने मन को संभालो, यह ही आदमी को गरीब और अमीर बनाता है।
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समस्याएं तो दोनों के जीवन में हैं, लेकिन हर समस्या का एक ही समाधान है ‘तपस्या’। यह प्रवचन क्रांतिकारी राष्ट्र संत मुनि तरुण सागर ने दिया। वे शुक्रवार को झज्जर रोड स्थित जैन जती में तीन दिवसीय कड़वे प्रवचन की श्रृंखला में बोल रहे थे।
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जैन मुनि के कड़वे प्रवचन सुनने के लिए दूसरे दिन विधायक मनीष ग्रोवर के साथ-साथ बाबा कपिलपुरी, बाबा कर्णपुरी, बाबा प्रेमदास, जैन साध्वी सुरुचि और साध्वी महाप्रज्ञा भी पहुंचीं। इसी के साथ सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शुक्रवार को सुबह 9:30 बजे शुरू हुए एक घंटे के प्रवचन के दौरान जैन मुनि ने अमीर-गरीब और शहर-गांवों पर तंज कसा।
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जैन मुनि ने कहा कि मैैंने छोड़ा ही छोड़ा है, जोड़ने के नाम पर आदमी से आदमी को जोड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत का विकास देखना है तो शहरों को देखिए और भारत का विश्वास देखना है तो गांवों को देखिए। गांव और शहर में बड़ा अंतर है। गांव में जहां भिखारी को साधु समझते हैं, वहीं शहर में लोग साधु को भी भिखारी समझते हैं। गांव में गरीब की झोपड़ी के द्वार पर लिखा होता है अतिथि देवो भय, जबकि शहर में अमीर के बंगले के  दरवाजे पर लिखा होता है कुत्ते से सावधान। जैन मुनि ने भारत और इंडिया में अंतर बताते हुए कहा कि साधना में जीना भारत है और साधनों में जीना इंडिया है।

आज हम साधनों में जीने के आदी हो गए हैं, इसलिए जीवन समस्याओं का बन गया है। आज के आदमी के पास देखने के लिए टीवी सेट, बैठने के लिए सोफा सेट, खाने के लिए डिनर सेट, पहनने के लिए डायमंड सेट है, इसके बावजूद आदमी का दिमाग अपसेट है। इसलिए मन को साधना में लगाओ। अगर मन को साधना यानी कुछ देर के लिए मौन रहना सिखा लिया तो समझ लेना कि आपको सबकुछ मिल गया है।

इससे पहले, जैन कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं ने मनमोहक नृत्य पेश किया। इस दौरान उद्योगपति राजेश जैन, प्रभाष जैन और द्वीप जैन अतिथियों व संतों का केसर तिलक, मनके की माला व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। 

रिश्तों में दरार आए तो नई दीवार होती है खड़ी
जैन मुनि ने कहा कि जब दीवारों में दरार आती है तो वह गिरती है। पर, रिश्तों में दरार आ जाए तो नई दीवार खड़ी हो जाती है। सुखी दांपत्य जीवन के लिए जरूरी है कि पति-पत्नी दोनों समय-समय पर एक समझदारी का परिचय दें। एक नरम स्वभाव का हो और दूसरा गरम स्वभाव का हो तो खुशियों को कभी किसी की नजर नहीं लग सकती है। 

संत नसीहत देकर जाता है
जैन मुनि ने कहा कि बाप दुनिया से जाता है तो अपनी औलाद को वसीयत देकर जाता है और जब कोई संत समाज से जाता है तो अपने अनुयायियों को नसीहत देकर जाता है। स्वयं जलकर दुनिया को रोशन करना दीपक का धर्म है और स्वयं जगकर दुनिया को जगाना संत का धर्म है। संत को किसी जाति, धर्म से बांधना संतत्व की हत्या करने जैसा है।


ये भी पहुंचे कड़वे प्रवचन सुनने
कड़वे प्रवचन सुनने के लिए शेलैंद्र जैन, दीपक जैन, सिद्धार्थ जैन, ईश्वर जैन, जोगेंद्र सैनी, ईश्वर सिंघल, संजय गौतम, सुभाष आहूजा, अशोक जैन, विजय जैन, राजीव जैन, सतीश, लोकेश जैन, विकास दलाल, नरेश जैन, अमित जैन, बबलू, दयाचंद जैन, अनिल लोहिया, प्रमोद जैन, नंद कपूर, पुष्पा जैन, संध्या जैन, विद्या सागर गुप्ता, अरुण जैन, चक्रेश जैन, अजित जैन विनोद भूषण पहुंचे।
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