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पीजीआई में तीन दिन से उपचाराधीन गर्भवती महिला कोरोना संक्रमित, लेबर रूम सील
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जिले में पीजीआईएमएस कोरोना के संक्रमण का हॉटस्पाट बनता जा रहा है। एक रोज पहले ही कोरोना वार्ड सी-ब्लॉक में काम करने वाले दो सफाई कर्मचारी, एक एंबुलेंस चालक के अलावा आपात विभाग के सीएमओ की पत्नी संक्रमित मिली थी। वहीं रविवार को वार्ड-2 के लेबर रूम में हाई डेफिसियेंसी यूनिट में गुरुग्राम की एक गर्भवती महिला की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है।
पीजीआईएमएस के वार्ड-दो स्थित लेबर रूम में कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के बाद पूरे एरिया को सील कर दिया गया। इस कारण रविवार को कोई नया डिलिवरी केस नहीं लिया गया। वेटिंग में चल रहे केसों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। इसके साथ ही कोरोना पॉजिटिव महिला के संपर्क में आए 15 डॉक्टर, छह स्टाफ नर्स सहित कई कर्मचारियों को क्वारंटीन किया गया है। वहीं पीजी डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट, इंटर्न भी स्वयं की कोरोना जांच कराने के साथ क्वारंटीन करने की बात कर रहे हैं। उधर, पीजीआईएमएस प्रशासन को मरीजों का कांटेक्ट तलाशने के साथ अपने स्टाफ व चिकित्सकों को कवारंटीन करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम रविवार सुबह क्योस्क बॉक्स लेकर संक्रमित सीएमओ की पत्नी के पड़ोस में पहुंची और लोगों के सैंपल जांचे। हालांकि सीएमओ व परिजनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। एहतियात के तौर पर सभी को होम क्वारंटीन किया गया है।
सूत्रों के अनुसार तीन दिन पहले गुरुग्राम से एक गर्भवती महिला को दाखिल किया गया था। कोरोना जांच में उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने से वार्ड में हड़कंप मच गया। इस दौरान करीब 40 डॉक्टर, नर्स, स्टाफ व वार्ड में दाखिल मरीज संक्रमित महिला के संपर्क में आए। जानकारी होने पर वार्ड में काम कर रहे सीनियर डॉक्टरों को तो क्वारंटीन कर दिया गया। लेकिन कुछ जूनियर डॉक्टर क्वारंटीन की जगह व अनुमति न दिए जाने का विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह ड्यूटी करने के बाद हॉस्टल में जाकर ठहर रहे हैं, ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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जिला अस्पताल भेजी डॉक्टरों की टीम, 13 डिलिवरी कराई
पीजीआईएमएस ने रविवार को अपना लेबर रूम बंद करने के दौरान एक सीनियर कंसलटेंट के साथ तीन पीजी डॉक्टरों को जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र ने बताया कि रविवार को 12 नार्मल व एक सिजेरियन डिलिवरी हुई है। अधिकारी ने बताया कि उनके पास जच्चा-बच्चा के 38 बेड हैं, यदि जरूरत पड़ती है तो संख्या बढ़ा दी जाएगी।
सैनिटाइज होने के बाद खुलेगा लेबर रूम
पीजीआईएमएस प्रशासन ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के बाद पूरे विभाग को सैनिटाइज किया गया है। जल्द ही वार्ड की सेवाओं को फिर से बहाल कर दिया जाएगा। वहीं बताया जा रहा है कि रविवार को नए मरीज नहीं लिए गए हैं, इसके अलावा जो मरीज दाखिल थे, उनमें से कुछ की डिलिवरी हुई है। वहीं बाहर से आने वाले मरीजों को दाखिल न किए जाने के कारण दिन में कई गर्भवती महिलाओं को परेशान होना पड़ा।
पीजीआईएमएस की महिला सफाईकर्मी ने जीती कोरोना से जंग
पीजीआईएमएस के ब्लाक-सी में बतौर सफाई कर्मचारी तैनात माड़ौदी की महिला की रविवार को कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। महिला को छुट्टी देकर दो सप्ताह के लिए होम क्वारंटीन किया है। संस्थान की महिला सफाई कर्मचारी को कोरोना से जंग जीतने पर स्टाफ ने बधाई दी है। वहीं झज्जर के दस और मरीजों की दूसरी जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्हें छुट्टी देकर घर भेज दिया है। फिलहाल संस्थान में गुरुग्राम का एक मरीज वेंटिलेटर पर, दो गुरुग्राम, एक दिल्ली व एक सोनीपत का मरीज ऑक्सीजन पर उपचाराधीन हैं।
एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हेल्थ को पीजीआईएमएस रोहतक लिखेगा पत्र
प्रदेशभर से बेवजह डिलिवरी केस रेफर कर बढ़ाया जा रहा लोड
रोहतक। प्रदेश भर के जिला अस्पताल व गुरुग्राम का ईएसआई अस्पताल कोरोना के संक्रमण काल में पीजीआईएमएस रोहतक के स्त्री रोग विभाग की मुसीबत बढ़ा रहा है। यहां कोरोना पीडित महिलाओं की डिलिवरी के अलावा नार्मल डिलिवरी केस भी रेफर किए जा रहे हैं। इससे विभाग की कार्य प्रणाली प्रभावित हो रही है। इस पर रोक लगाने के लिए संस्थान की ओर से एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हेल्थ को पत्र लिखा जाएगा कि वह स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दें कि बिना कारण केस को पीजीआई रेफ न किया जाए।
पीजीआईएमएस को कोविड अस्पताल बनाया जा चुका है। यहां नियमानुसार रोहतक, जींद व झज्जर के कोरोना संक्रमित डिलिवरी केसों की गंभीरता को देखते हुए भेजा जा सकता है। लेकिन स्थिति यह है कि संस्थान में प्रदेश के कई जिलों से रोजाना सामान्य केस भी रेफर होकर आते हैं। इससे डॉक्टरों की टीम कोरोना मरीजों के अलावा गंभीर मरीजों को पूरा समय नहीं दे पाती। महिला रोग विभाग के डॉक्टर स्वयं मानते हैं कि यदि कोई गंभीर केस आता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि नार्मल डिलिवरी के केस आते हैं तो सीरियस केसों के साथ न्याय नहीं हो पाता।
वार्ड दो के लेबर रूम में कोरोना संक्रमित की पुष्टि होने के बाद मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए एक टीम को जिला अस्पताल भेज दिया था। वहां पर मरीजों का कार्य किया गया है। इसके अलावा लेबर रूम को सैनिटाइज किया गया है, जल्द ही वह पहले की तरह काम करेगा। हमारे पास रोहतक के अलावा झज्जर, झज्जर व जींद की जिम्मेदारी है। लेकिन बाहर से मरीज आ रहे हैं, इसमें गुरुग्राम के अधिक मरीज हैं। इसके लिए डाटा निकलवाया गया है, इसकी रिपोर्ट एसीएस को भेजी जा रही है। इससे वह अपने स्वास्थ्य अधिकारियों को ऐसा न करने के निर्देश देंगे।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
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पीजीआईएमएस के वार्ड-दो स्थित लेबर रूम में कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के बाद पूरे एरिया को सील कर दिया गया। इस कारण रविवार को कोई नया डिलिवरी केस नहीं लिया गया। वेटिंग में चल रहे केसों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। इसके साथ ही कोरोना पॉजिटिव महिला के संपर्क में आए 15 डॉक्टर, छह स्टाफ नर्स सहित कई कर्मचारियों को क्वारंटीन किया गया है। वहीं पीजी डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट, इंटर्न भी स्वयं की कोरोना जांच कराने के साथ क्वारंटीन करने की बात कर रहे हैं। उधर, पीजीआईएमएस प्रशासन को मरीजों का कांटेक्ट तलाशने के साथ अपने स्टाफ व चिकित्सकों को कवारंटीन करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम रविवार सुबह क्योस्क बॉक्स लेकर संक्रमित सीएमओ की पत्नी के पड़ोस में पहुंची और लोगों के सैंपल जांचे। हालांकि सीएमओ व परिजनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। एहतियात के तौर पर सभी को होम क्वारंटीन किया गया है।
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सूत्रों के अनुसार तीन दिन पहले गुरुग्राम से एक गर्भवती महिला को दाखिल किया गया था। कोरोना जांच में उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने से वार्ड में हड़कंप मच गया। इस दौरान करीब 40 डॉक्टर, नर्स, स्टाफ व वार्ड में दाखिल मरीज संक्रमित महिला के संपर्क में आए। जानकारी होने पर वार्ड में काम कर रहे सीनियर डॉक्टरों को तो क्वारंटीन कर दिया गया। लेकिन कुछ जूनियर डॉक्टर क्वारंटीन की जगह व अनुमति न दिए जाने का विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह ड्यूटी करने के बाद हॉस्टल में जाकर ठहर रहे हैं, ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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जिला अस्पताल भेजी डॉक्टरों की टीम, 13 डिलिवरी कराई
पीजीआईएमएस ने रविवार को अपना लेबर रूम बंद करने के दौरान एक सीनियर कंसलटेंट के साथ तीन पीजी डॉक्टरों को जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र ने बताया कि रविवार को 12 नार्मल व एक सिजेरियन डिलिवरी हुई है। अधिकारी ने बताया कि उनके पास जच्चा-बच्चा के 38 बेड हैं, यदि जरूरत पड़ती है तो संख्या बढ़ा दी जाएगी।
सैनिटाइज होने के बाद खुलेगा लेबर रूम
पीजीआईएमएस प्रशासन ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के बाद पूरे विभाग को सैनिटाइज किया गया है। जल्द ही वार्ड की सेवाओं को फिर से बहाल कर दिया जाएगा। वहीं बताया जा रहा है कि रविवार को नए मरीज नहीं लिए गए हैं, इसके अलावा जो मरीज दाखिल थे, उनमें से कुछ की डिलिवरी हुई है। वहीं बाहर से आने वाले मरीजों को दाखिल न किए जाने के कारण दिन में कई गर्भवती महिलाओं को परेशान होना पड़ा।
पीजीआईएमएस की महिला सफाईकर्मी ने जीती कोरोना से जंग
पीजीआईएमएस के ब्लाक-सी में बतौर सफाई कर्मचारी तैनात माड़ौदी की महिला की रविवार को कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। महिला को छुट्टी देकर दो सप्ताह के लिए होम क्वारंटीन किया है। संस्थान की महिला सफाई कर्मचारी को कोरोना से जंग जीतने पर स्टाफ ने बधाई दी है। वहीं झज्जर के दस और मरीजों की दूसरी जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्हें छुट्टी देकर घर भेज दिया है। फिलहाल संस्थान में गुरुग्राम का एक मरीज वेंटिलेटर पर, दो गुरुग्राम, एक दिल्ली व एक सोनीपत का मरीज ऑक्सीजन पर उपचाराधीन हैं।
एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हेल्थ को पीजीआईएमएस रोहतक लिखेगा पत्र
प्रदेशभर से बेवजह डिलिवरी केस रेफर कर बढ़ाया जा रहा लोड
रोहतक। प्रदेश भर के जिला अस्पताल व गुरुग्राम का ईएसआई अस्पताल कोरोना के संक्रमण काल में पीजीआईएमएस रोहतक के स्त्री रोग विभाग की मुसीबत बढ़ा रहा है। यहां कोरोना पीडित महिलाओं की डिलिवरी के अलावा नार्मल डिलिवरी केस भी रेफर किए जा रहे हैं। इससे विभाग की कार्य प्रणाली प्रभावित हो रही है। इस पर रोक लगाने के लिए संस्थान की ओर से एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हेल्थ को पत्र लिखा जाएगा कि वह स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दें कि बिना कारण केस को पीजीआई रेफ न किया जाए।
पीजीआईएमएस को कोविड अस्पताल बनाया जा चुका है। यहां नियमानुसार रोहतक, जींद व झज्जर के कोरोना संक्रमित डिलिवरी केसों की गंभीरता को देखते हुए भेजा जा सकता है। लेकिन स्थिति यह है कि संस्थान में प्रदेश के कई जिलों से रोजाना सामान्य केस भी रेफर होकर आते हैं। इससे डॉक्टरों की टीम कोरोना मरीजों के अलावा गंभीर मरीजों को पूरा समय नहीं दे पाती। महिला रोग विभाग के डॉक्टर स्वयं मानते हैं कि यदि कोई गंभीर केस आता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि नार्मल डिलिवरी के केस आते हैं तो सीरियस केसों के साथ न्याय नहीं हो पाता।
वार्ड दो के लेबर रूम में कोरोना संक्रमित की पुष्टि होने के बाद मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए एक टीम को जिला अस्पताल भेज दिया था। वहां पर मरीजों का कार्य किया गया है। इसके अलावा लेबर रूम को सैनिटाइज किया गया है, जल्द ही वह पहले की तरह काम करेगा। हमारे पास रोहतक के अलावा झज्जर, झज्जर व जींद की जिम्मेदारी है। लेकिन बाहर से मरीज आ रहे हैं, इसमें गुरुग्राम के अधिक मरीज हैं। इसके लिए डाटा निकलवाया गया है, इसकी रिपोर्ट एसीएस को भेजी जा रही है। इससे वह अपने स्वास्थ्य अधिकारियों को ऐसा न करने के निर्देश देंगे।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस