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Rohtak News: बम और डायनामाइट की जगह जैव विविधता और पानी रखने वाले देशों का होगा भविष्य
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के पर्यावरण विज्ञान विभाग में इंटरनेशनल डे फॉर बाॅयोलोजिकल डायवर्सिटी 2023 का आयोजन किया गया।
फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज की डीन एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. राजेश धनखड़ ने कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाषण देते हुए बाॅयो डायवर्सिटी की महता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मिट्टी में सबसे छोटे बैक्टीरिया से लेकर समुद्र में प्रवाल भित्तियों तक हर एक जीव का जीवन जैव विविधता का एक घटक है। पिछले 20 वर्षों में प्रदूषण, हैबीटेट डिस्ट्रक्शन व संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण जैव विविधता में भारी गिरावट आई है। उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को अधिक न्यायसंगत और सतत विकास के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। पर्यावरण विज्ञान विभाग के एलुमनी एवं हिमाचल प्रदेश विवि, शिमला के बाॅयोसाइंस विभाग के प्रोफेसर डाॅ. आनंद सागर ने कार्यक्रम में बाॅयोडायवर्सिटी: इंपोर्टेंस एंड कंजर्वेशन विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने मनुष्य की हर जरूरत को पूरा किया है। इसलिए मनुष्य की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी जरूरतों के साथ प्रकृति की सुरक्षा और स्वच्छता का भी ख्याल रखे।
उन्होंने कहा कि मनुष्य प्राकृतिक संसाधनों का मालिक नहीं है, बल्कि केयर टेकर है और उसकी जिम्मेदारी है कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्राकृतिक संसाधनों को बचाकर रखे। उन्होंने कहा कि जब दुनिया संघर्ष और हिंसक प्रकृति का सामना कर रही है, ऐसे में भविष्य उन देशों का होगा, जिनके पास बम और डायनामाइट की जगह जैव विविधता और पानी होगा। पर्यावरण विज्ञान विभाग की प्राध्यापक डाॅ. बबीता खोसला ने कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वयन किया। इस मौके पर प्रो. जितेंद्र सिंह लौरा, डाॅ. मीनाक्षी नांदल, डाॅ. रचना भटेरिया, डाॅ. गीता, डाॅ. सुरेंद्र कुमार यादव, प्रो. ऐमिरेट्स डाॅ. विनोद शर्मा समेत शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज की डीन एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. राजेश धनखड़ ने कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाषण देते हुए बाॅयो डायवर्सिटी की महता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मिट्टी में सबसे छोटे बैक्टीरिया से लेकर समुद्र में प्रवाल भित्तियों तक हर एक जीव का जीवन जैव विविधता का एक घटक है। पिछले 20 वर्षों में प्रदूषण, हैबीटेट डिस्ट्रक्शन व संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण जैव विविधता में भारी गिरावट आई है। उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को अधिक न्यायसंगत और सतत विकास के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। पर्यावरण विज्ञान विभाग के एलुमनी एवं हिमाचल प्रदेश विवि, शिमला के बाॅयोसाइंस विभाग के प्रोफेसर डाॅ. आनंद सागर ने कार्यक्रम में बाॅयोडायवर्सिटी: इंपोर्टेंस एंड कंजर्वेशन विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने मनुष्य की हर जरूरत को पूरा किया है। इसलिए मनुष्य की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी जरूरतों के साथ प्रकृति की सुरक्षा और स्वच्छता का भी ख्याल रखे।
उन्होंने कहा कि मनुष्य प्राकृतिक संसाधनों का मालिक नहीं है, बल्कि केयर टेकर है और उसकी जिम्मेदारी है कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्राकृतिक संसाधनों को बचाकर रखे। उन्होंने कहा कि जब दुनिया संघर्ष और हिंसक प्रकृति का सामना कर रही है, ऐसे में भविष्य उन देशों का होगा, जिनके पास बम और डायनामाइट की जगह जैव विविधता और पानी होगा। पर्यावरण विज्ञान विभाग की प्राध्यापक डाॅ. बबीता खोसला ने कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वयन किया। इस मौके पर प्रो. जितेंद्र सिंह लौरा, डाॅ. मीनाक्षी नांदल, डाॅ. रचना भटेरिया, डाॅ. गीता, डाॅ. सुरेंद्र कुमार यादव, प्रो. ऐमिरेट्स डाॅ. विनोद शर्मा समेत शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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