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Rohtak News: हिमांशु उर्फ भाऊ सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव, आसानी से नहीं मिल पाती लोकेशन
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रोहतक।
कुख्यात हिमांशु उर्फ भाऊ पुलिस से बचने के लिए मोबाइल कॉल की जगह सोशल मीडिया का ज्यादा प्रयोग करता है। क्योंकि इससे पुलिस आसानी से पुलिस को उसकी लोकेशन नहीं मिल पाती। यहीं कारण है कि 24 साल की उम्र में भाऊ जिला पुलिस का सबसे बड़ा मोस्टवांटेड अभियुक्त बन गया है।
जिला पुलिस की तरफ से भाऊ को दबोचने के लिए कई बार प्रयास किए। सबसे पहले वर्ष 2019 में उसे गांव के युवक पर फायरिंग के आरोप में काबू किया गया, लेकिन वह वर्ष 2020 में हिसार की बोस्टल जेल की दीवार फांदकर साथियों सहित फरार हो गया। उसके साथ भागने वाले ज्यादा अभियुक्त दबोचे जा चुके हैं, लेकिन हिमांशु उर्फ भाऊ हाथ नहीं आया। जबकि वह लगातर अपनी गैंग को ऑपरेट कर रहा है।
हंसराज हत्याकांड में आया नाम, पुलिस नहीं लगा सकी लोकेशन का पता
एक साल पहले रिटौली गांव में दोहरे हत्याकांड के बाद बस ड्राइवर हंसराज की हत्या हुई। वारदात के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को काबू किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वारदात की साजिश हिमांशु उर्फ भाऊ के इशारे पर रची गई। इसके बावजूद पुलिस भाऊ तक नहीं पहुंच सकी।
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सोशल मीडिया के माध्यम से करता है संपर्क
पुलिस सूत्रों का कहना है कि भाऊ को दबोचने के लिए कई बार मोबाइल लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया गया। लेकिन आरोपी न केवल बार-बार जगह बदलता है, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से ही गैंग के सदस्यों से संपर्क करता है। यहीं कारण है कि वह हाथ नहीं आ रहा है।
अब विदेश में बैठकर चला रहा गैंग
पुलिस ने मोखरा गांव के सरपंच नीटू से 50 लाख की रंगदारी मांगने के मामले की जांच की। जांच में पता चला कि वारदात के पीछे भाऊ का ही हाथ है। उसने पुर्तगाल से सरपंच को मैसेज भेजा है। इतना ही नहीं, पिछले साल नवंबर माह में पुलिस के हाथ कागजात लगे थे कि भाऊ ने यूपी के मुरादाबाद के युवक के पते पर पासपोर्ट बनवाया है। इससे उसके विदेश जाने की संभावना और ज्यादा पुख्ता हो रही है।
60 मोबाइल व 40 सिम से सुराग मिलने की उम्मीद
पुलिस ने भाऊ गैंग को दबोचने के लिए वीरवार को एक साथ 30 जगह छापे मारे, लेकिन कोई गैंग सदस्य हाथ नहीं आ सका। पुलिस 60 मोबाइल व 40 सिम बरामद करने में जरूर कामयाब रही। अब मोबाइल व सिम की पुलिस गहराई से जांच कर रही है। इससे भाऊ का पुख्ता सुराग मिलने की उम्मीद है।
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कुख्यात हिमांशु उर्फ भाऊ पुलिस से बचने के लिए मोबाइल कॉल की जगह सोशल मीडिया का ज्यादा प्रयोग करता है। क्योंकि इससे पुलिस आसानी से पुलिस को उसकी लोकेशन नहीं मिल पाती। यहीं कारण है कि 24 साल की उम्र में भाऊ जिला पुलिस का सबसे बड़ा मोस्टवांटेड अभियुक्त बन गया है।
जिला पुलिस की तरफ से भाऊ को दबोचने के लिए कई बार प्रयास किए। सबसे पहले वर्ष 2019 में उसे गांव के युवक पर फायरिंग के आरोप में काबू किया गया, लेकिन वह वर्ष 2020 में हिसार की बोस्टल जेल की दीवार फांदकर साथियों सहित फरार हो गया। उसके साथ भागने वाले ज्यादा अभियुक्त दबोचे जा चुके हैं, लेकिन हिमांशु उर्फ भाऊ हाथ नहीं आया। जबकि वह लगातर अपनी गैंग को ऑपरेट कर रहा है।
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हंसराज हत्याकांड में आया नाम, पुलिस नहीं लगा सकी लोकेशन का पता
एक साल पहले रिटौली गांव में दोहरे हत्याकांड के बाद बस ड्राइवर हंसराज की हत्या हुई। वारदात के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को काबू किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वारदात की साजिश हिमांशु उर्फ भाऊ के इशारे पर रची गई। इसके बावजूद पुलिस भाऊ तक नहीं पहुंच सकी।
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सोशल मीडिया के माध्यम से करता है संपर्क
पुलिस सूत्रों का कहना है कि भाऊ को दबोचने के लिए कई बार मोबाइल लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया गया। लेकिन आरोपी न केवल बार-बार जगह बदलता है, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से ही गैंग के सदस्यों से संपर्क करता है। यहीं कारण है कि वह हाथ नहीं आ रहा है।
अब विदेश में बैठकर चला रहा गैंग
पुलिस ने मोखरा गांव के सरपंच नीटू से 50 लाख की रंगदारी मांगने के मामले की जांच की। जांच में पता चला कि वारदात के पीछे भाऊ का ही हाथ है। उसने पुर्तगाल से सरपंच को मैसेज भेजा है। इतना ही नहीं, पिछले साल नवंबर माह में पुलिस के हाथ कागजात लगे थे कि भाऊ ने यूपी के मुरादाबाद के युवक के पते पर पासपोर्ट बनवाया है। इससे उसके विदेश जाने की संभावना और ज्यादा पुख्ता हो रही है।
60 मोबाइल व 40 सिम से सुराग मिलने की उम्मीद
पुलिस ने भाऊ गैंग को दबोचने के लिए वीरवार को एक साथ 30 जगह छापे मारे, लेकिन कोई गैंग सदस्य हाथ नहीं आ सका। पुलिस 60 मोबाइल व 40 सिम बरामद करने में जरूर कामयाब रही। अब मोबाइल व सिम की पुलिस गहराई से जांच कर रही है। इससे भाऊ का पुख्ता सुराग मिलने की उम्मीद है।