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विदेश में बैठे गैंगस्टर सियार नहीं हैं, मां का दूध पिया है तो सामने आएं : डीजीपी
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि विदेश में छुपकर बैठे गैंगस्टर सियार नहीं हैं। मां का दूध पिया है तो सामने आएं। वह बुधवार को गुरुग्राम से चंडीगढ़ जाते समय रोहतक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। साथ में एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया, एडीसी नरेंद्र कुमार, एसडीएम आशीष कुमार व अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
डीजीपी ने कहा कि प्रदेश की जनता को डरने की जरूरत नहीं है। बाइक पर सवार होकर युवक आते हैं और गोली चलाकर भाग जाते हैं। फिर गीदड़ की तरह छुप जाते हैं और कुत्ते की मौत मारे जाते हैं। ऐसे लोग कायर होते हैं।
डीजीपी ने कहा कि पुलिस प्रशासन को कह रखा है कि अगर कोई गोली चलाता है तो उसे जवाब देने के लिए फ्री हैं। यदि कोई सरेंडर करता है तो उसे गिरफ्तार करें, चाहे कितना ही बड़ा अपराध क्यों न हो। उन्होंने कहा कि आम लोग शिकायत करें। कोई अपराधी 20 या 40 दिन भाग लेगा। ऐसे कायर व गद्दार लोगों से डरने की जरूरत नहीं है।
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माहौल खराब नहीं करने देंगे, पुलिस की कड़ी निगाह
डीजीपी ने कहा कि किसी के कहने से कानून व्यवस्था खराब नहीं हो जाती। एक भी व्यक्ति बताएं, क्या उसे हरियाणा से गुजरते समय लूटपाट का डर लगता है। ऐसा माहौल न पहले था और न अब है। सोशल मीडिया से लेकर संचार के दूसरे साधनों पर भी पुलिस की कड़ी निगाह है। झूठ फैलाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने आम लोगों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को समझाएं। सलाह दें कि अपराध की दुनिया से दूर रहें। नशा तस्करी करने वालों से भी पुलिस सख्ती से निपट रही है।
पुलिस की एक जाति खाकी, काम का दबाव मानने वाले बन जाएं हलवाई
एक सवाल के जवाब में डीजीपी ने कहा कि पुलिस प्रशासन की कोई जाति नहीं है। पुलिस की एक जाति है खाकी। अगर कोई पुलिसकर्मी काम का दबाव मानता या तनाव में रहता है तो उसे सलाह है कि पुलिस की नौकरी छोड़कर हलवाई बन जाएं। विभाग भी मदद करेगा। डीजीपी ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव या तनाव की बात को तिल का ताड़ बनाया गया है। ऐसा कुछ नहीं है।
एडीजीपी व एएसआई के साथ हुईं घटनाओं से दुख होता है, किसी परिवार से अन्याय नहीं होगा
डीजीपी ने कहा कि एडीजीपी पूरण कुमार व एएसआई के साथ हुईं घटनाओं से दुख होता है। एएसआई संदीप की मौत के मामले की एसआईटी जांच कर रही है। जांच के बीच में तथ्यों को उजागर करना उचित नहीं होता। वह परिवार को विश्वास दिलाते हैं कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।
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रोहतक। डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि विदेश में छुपकर बैठे गैंगस्टर सियार नहीं हैं। मां का दूध पिया है तो सामने आएं। वह बुधवार को गुरुग्राम से चंडीगढ़ जाते समय रोहतक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। साथ में एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया, एडीसी नरेंद्र कुमार, एसडीएम आशीष कुमार व अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
डीजीपी ने कहा कि प्रदेश की जनता को डरने की जरूरत नहीं है। बाइक पर सवार होकर युवक आते हैं और गोली चलाकर भाग जाते हैं। फिर गीदड़ की तरह छुप जाते हैं और कुत्ते की मौत मारे जाते हैं। ऐसे लोग कायर होते हैं।
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डीजीपी ने कहा कि पुलिस प्रशासन को कह रखा है कि अगर कोई गोली चलाता है तो उसे जवाब देने के लिए फ्री हैं। यदि कोई सरेंडर करता है तो उसे गिरफ्तार करें, चाहे कितना ही बड़ा अपराध क्यों न हो। उन्होंने कहा कि आम लोग शिकायत करें। कोई अपराधी 20 या 40 दिन भाग लेगा। ऐसे कायर व गद्दार लोगों से डरने की जरूरत नहीं है।
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माहौल खराब नहीं करने देंगे, पुलिस की कड़ी निगाह
डीजीपी ने कहा कि किसी के कहने से कानून व्यवस्था खराब नहीं हो जाती। एक भी व्यक्ति बताएं, क्या उसे हरियाणा से गुजरते समय लूटपाट का डर लगता है। ऐसा माहौल न पहले था और न अब है। सोशल मीडिया से लेकर संचार के दूसरे साधनों पर भी पुलिस की कड़ी निगाह है। झूठ फैलाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने आम लोगों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को समझाएं। सलाह दें कि अपराध की दुनिया से दूर रहें। नशा तस्करी करने वालों से भी पुलिस सख्ती से निपट रही है।
पुलिस की एक जाति खाकी, काम का दबाव मानने वाले बन जाएं हलवाई
एक सवाल के जवाब में डीजीपी ने कहा कि पुलिस प्रशासन की कोई जाति नहीं है। पुलिस की एक जाति है खाकी। अगर कोई पुलिसकर्मी काम का दबाव मानता या तनाव में रहता है तो उसे सलाह है कि पुलिस की नौकरी छोड़कर हलवाई बन जाएं। विभाग भी मदद करेगा। डीजीपी ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव या तनाव की बात को तिल का ताड़ बनाया गया है। ऐसा कुछ नहीं है।
एडीजीपी व एएसआई के साथ हुईं घटनाओं से दुख होता है, किसी परिवार से अन्याय नहीं होगा
डीजीपी ने कहा कि एडीजीपी पूरण कुमार व एएसआई के साथ हुईं घटनाओं से दुख होता है। एएसआई संदीप की मौत के मामले की एसआईटी जांच कर रही है। जांच के बीच में तथ्यों को उजागर करना उचित नहीं होता। वह परिवार को विश्वास दिलाते हैं कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।