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Rohtak News: डीएपी के लिए किसान लाइन में, अगेती किस्मों की बुवाई प्रभावित
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रोहतक। जिले में रबी की फसलों की बुवाई का काम चल रहा है। पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद नहीं मिलने के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। खाद केंद्रों पर किसान चक्कर लगा रहे हैं।
केंद्रों पर खाद का रैक आने पर किसानों को घंटेभर लाइन में लगने के बाद भी आवश्यकता के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है। इस कारण किसान चिंतित हैं। खाद की कमी को लेकर किसानों ने बताया कि गेहूं की अगेती किस्म की बुवाई का समय 15 अक्टूबर से लेकर 5 नवंबर तक होता है। ऐसे में खाद नहीं मिलने के कारण अगेती किस्म की बुवाई समय पर नहीं हो पाएगी।
डीएपी की कमी ने किसानों को चिंता में डाल दिया है। चना, जौ, सरसों और गेहूं की फसलों मे बिजाई के दौरान डीएपी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। किसान हरपाल, जयबीर गुलिया, प्रदीप, मनजीत और संदीप का कहना है कि पिछले एक माह से डीएपी उन्हें नहीं मिल रही है। खाद और कृषि उत्पादों के व्यापारी भी सीजन के बावजूद उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति न कर पाने से निराश हैं।
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मंगलवार को तीन दिन बाद पहुंचा डीएपी खाद
मंगलवार को एक रैक डीएपी खाद का मंडी में पहुंचा है, लेकिन सभी किसानों को नहीं मिल पाया। ज्यादातर को मायूस होकर ही लौटना पड़ा है। किसान शिकायत तक कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है।
सुबह खाद लेने आया था, आज भी नहीं मिला। बोल रहे हैं 300 नंबर है, आज खाद नहीं मिलेगा। अब इंतजार कर वापस घर जा रहा हूं।
बलजीत सिंह, बडौदी
सुबह साढ़े पांच बजे गांव से खाद लेने आए थे। आज भी खाद नहीं मिली। सारे काम रुके हुए हैं। सीएम ने बोला है कि 20 नवंबर तक पूर्ति कर देंगे, लेकिन तब तक आधी बिजाई हो जाएगी।
सुरेंद्र, सुंडाणा
दो दिन से चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन खाद नहीं मिल रही है। बुवाई के लिए जमीन तैयार कर दी थी, लेकिन फिर से इसे तैयार करना पड़ेगा। दोबारा खर्च उठाना पड़ेगा।
गिरधारी, बनियाणी
तीन दिन से खाद के लिए चक्कर लगा रहा हूं, आज एक आधार कार्ड पर तीन कट्टे मिले हैं। अब दोबारा से ट्यूबवेल चलाकर खेत की सिंचाई करनी पड़ेगी। कम से कम दोबारा से दस हजार रुपये का खर्चा होगा।
महीपाल, शिमली
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केंद्रों पर खाद का रैक आने पर किसानों को घंटेभर लाइन में लगने के बाद भी आवश्यकता के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है। इस कारण किसान चिंतित हैं। खाद की कमी को लेकर किसानों ने बताया कि गेहूं की अगेती किस्म की बुवाई का समय 15 अक्टूबर से लेकर 5 नवंबर तक होता है। ऐसे में खाद नहीं मिलने के कारण अगेती किस्म की बुवाई समय पर नहीं हो पाएगी।
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डीएपी की कमी ने किसानों को चिंता में डाल दिया है। चना, जौ, सरसों और गेहूं की फसलों मे बिजाई के दौरान डीएपी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। किसान हरपाल, जयबीर गुलिया, प्रदीप, मनजीत और संदीप का कहना है कि पिछले एक माह से डीएपी उन्हें नहीं मिल रही है। खाद और कृषि उत्पादों के व्यापारी भी सीजन के बावजूद उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति न कर पाने से निराश हैं।
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मंगलवार को तीन दिन बाद पहुंचा डीएपी खाद
मंगलवार को एक रैक डीएपी खाद का मंडी में पहुंचा है, लेकिन सभी किसानों को नहीं मिल पाया। ज्यादातर को मायूस होकर ही लौटना पड़ा है। किसान शिकायत तक कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है।
सुबह खाद लेने आया था, आज भी नहीं मिला। बोल रहे हैं 300 नंबर है, आज खाद नहीं मिलेगा। अब इंतजार कर वापस घर जा रहा हूं।
बलजीत सिंह, बडौदी
सुबह साढ़े पांच बजे गांव से खाद लेने आए थे। आज भी खाद नहीं मिली। सारे काम रुके हुए हैं। सीएम ने बोला है कि 20 नवंबर तक पूर्ति कर देंगे, लेकिन तब तक आधी बिजाई हो जाएगी।
सुरेंद्र, सुंडाणा
दो दिन से चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन खाद नहीं मिल रही है। बुवाई के लिए जमीन तैयार कर दी थी, लेकिन फिर से इसे तैयार करना पड़ेगा। दोबारा खर्च उठाना पड़ेगा।
गिरधारी, बनियाणी
तीन दिन से खाद के लिए चक्कर लगा रहा हूं, आज एक आधार कार्ड पर तीन कट्टे मिले हैं। अब दोबारा से ट्यूबवेल चलाकर खेत की सिंचाई करनी पड़ेगी। कम से कम दोबारा से दस हजार रुपये का खर्चा होगा।
महीपाल, शिमली