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Rohtak News: पांचवीं में पांच बार फेल, अब लिख रहे गांव का इतिहास
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12-गांव सुनारिया में बैठे ग्रामीण। संंवाद
- फोटो : shrinagar news
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अभिषेक कीरत
रोहतक। शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित सुनारिया गांव के सेवानिवृत्त सेवादार कुलदीप सिंह गांव के इतिहास को संजोने में जुटे हैं। पांचवीं कक्षा में पांच बार असफल होने के बावजूद कुलदीप अब गांव के इतिहास, सामाजिक बदलाव और गौरवशाली घटनाओं को किताब में संजोकर उसे अमर करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक का नाम मेरा गांव-मेरा देश व सुनारिया का इतिहास रखा है।
सुनारिया निवासी 62 वर्षीय कुलदीप सिंह जीएसटी बार एसोसिएशन में सेवादार के पद से सेवानिवृत्त हैं। गांव के इतिहास को संकलित करने का विचार आने पर उनके सामने लिखने की समस्या आई। इसके समाधान के लिए उन्होंने गांव के पढ़े-लिखे लोगों की मदद लेना शुरू किया। वह जानकारी जुटाकर सुनाते रहे और दूसरे लोग उसे डायरी में लिखते रहे। इसी तरह यह प्रयास धीरे-धीरे किताब का रूप लेता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव ने सैनिकों, खिलाड़ियों और विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 150 से अधिक बेटे-बेटियों के माध्यम से अलग पहचान बनाई है। इनमें पुलिस, रेलवे, शिक्षा और अन्य विभागों में कार्यरत या सेवानिवृत्त अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार, ब्रिटिश शासनकाल में सुनारिया निवासी अमर सिंह ने तत्कालीन डीसी एफई मोर का विरोध किया था। बताया जाता है कि डीसी महिलाओं पर गलत नजर रखता था, जिसका अमर सिंह कई बार विरोध कर चुके थे। विरोध के बावजूद जब उसकी हरकतें नहीं रुकीं तो वर्ष 1877 में अमर सिंह ने उस पर हमला कर उसकी हत्या कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद अंग्रेज अधिकारियों ने गांव खाली कराने का आदेश दिया। गांव वालों के पलायन को देखते हुए अमर सिंह स्वयं सामने आ गए। इसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें पकड़कर यातनाएं दीं और मौत के घाट उतार दिया। ग्रामीण आज भी अमर सिंह को गांव के साहसी व्यक्तियों में गिनते हैं।
पार्षद सुमन ने बताया कि गांव की बेटी डॉ. शशि बुधवार शिक्षा विभाग पंचकूला में ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। वह समय-समय पर गांव के स्कूलों का दौरा कर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के निर्देश देती रही हैं। इसके अलावा गांव के कई लोग विभिन्न विभागों में सेवाएं देकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
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क्या बोले ग्रामीण
गांव के अनेक बेटे-बेटियां अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। गांव की बेटी शशि बुधवार पंचकूला स्थित शिक्षा विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। इस पर गर्व महसूस होता है।
मुक्तराम, निवासी सुनारिया
गांव के लोग फौज और खेलों के अलावा हर क्षेत्र में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। वे गांव की शान बढ़ा रहे हैं।”
दिनेश बुधवार, निवासी सुनारिया
अमर सिंह मेरे परदादा थे। अंग्रेजी शासन में महिलाओं से छेड़छाड़ का विरोध करने पर उन्होंने डीसी पर हमला किया था। इसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें दर्दनाक मौत दी। गांव में उनके नाम से स्मारक बनना चाहिए।
राकेश बुधवार, परिजन अमर सिंह
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रोहतक। शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित सुनारिया गांव के सेवानिवृत्त सेवादार कुलदीप सिंह गांव के इतिहास को संजोने में जुटे हैं। पांचवीं कक्षा में पांच बार असफल होने के बावजूद कुलदीप अब गांव के इतिहास, सामाजिक बदलाव और गौरवशाली घटनाओं को किताब में संजोकर उसे अमर करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक का नाम मेरा गांव-मेरा देश व सुनारिया का इतिहास रखा है।
सुनारिया निवासी 62 वर्षीय कुलदीप सिंह जीएसटी बार एसोसिएशन में सेवादार के पद से सेवानिवृत्त हैं। गांव के इतिहास को संकलित करने का विचार आने पर उनके सामने लिखने की समस्या आई। इसके समाधान के लिए उन्होंने गांव के पढ़े-लिखे लोगों की मदद लेना शुरू किया। वह जानकारी जुटाकर सुनाते रहे और दूसरे लोग उसे डायरी में लिखते रहे। इसी तरह यह प्रयास धीरे-धीरे किताब का रूप लेता जा रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव ने सैनिकों, खिलाड़ियों और विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 150 से अधिक बेटे-बेटियों के माध्यम से अलग पहचान बनाई है। इनमें पुलिस, रेलवे, शिक्षा और अन्य विभागों में कार्यरत या सेवानिवृत्त अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार, ब्रिटिश शासनकाल में सुनारिया निवासी अमर सिंह ने तत्कालीन डीसी एफई मोर का विरोध किया था। बताया जाता है कि डीसी महिलाओं पर गलत नजर रखता था, जिसका अमर सिंह कई बार विरोध कर चुके थे। विरोध के बावजूद जब उसकी हरकतें नहीं रुकीं तो वर्ष 1877 में अमर सिंह ने उस पर हमला कर उसकी हत्या कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद अंग्रेज अधिकारियों ने गांव खाली कराने का आदेश दिया। गांव वालों के पलायन को देखते हुए अमर सिंह स्वयं सामने आ गए। इसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें पकड़कर यातनाएं दीं और मौत के घाट उतार दिया। ग्रामीण आज भी अमर सिंह को गांव के साहसी व्यक्तियों में गिनते हैं।
पार्षद सुमन ने बताया कि गांव की बेटी डॉ. शशि बुधवार शिक्षा विभाग पंचकूला में ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। वह समय-समय पर गांव के स्कूलों का दौरा कर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के निर्देश देती रही हैं। इसके अलावा गांव के कई लोग विभिन्न विभागों में सेवाएं देकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
क्या बोले ग्रामीण
गांव के अनेक बेटे-बेटियां अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। गांव की बेटी शशि बुधवार पंचकूला स्थित शिक्षा विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। इस पर गर्व महसूस होता है।
मुक्तराम, निवासी सुनारिया
गांव के लोग फौज और खेलों के अलावा हर क्षेत्र में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। वे गांव की शान बढ़ा रहे हैं।”
दिनेश बुधवार, निवासी सुनारिया
अमर सिंह मेरे परदादा थे। अंग्रेजी शासन में महिलाओं से छेड़छाड़ का विरोध करने पर उन्होंने डीसी पर हमला किया था। इसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें दर्दनाक मौत दी। गांव में उनके नाम से स्मारक बनना चाहिए।
राकेश बुधवार, परिजन अमर सिंह

12-गांव सुनारिया में बैठे ग्रामीण। संंवाद- फोटो : shrinagar news

12-गांव सुनारिया में बैठे ग्रामीण। संंवाद- फोटो : shrinagar news

12-गांव सुनारिया में बैठे ग्रामीण। संंवाद- फोटो : shrinagar news

12-गांव सुनारिया में बैठे ग्रामीण। संंवाद- फोटो : shrinagar news

12-गांव सुनारिया में बैठे ग्रामीण। संंवाद- फोटो : shrinagar news