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मुंबई जाने को गढ़ी अपहरण की झूठी कहानी, पुलिस को दिनभर दौड़ाया
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 21 Jan 2017 01:52 AM IST
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child abuse
- फोटो : file photo
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अपने मौसा-मौसी से मिलने मुंबई जाने के लिए सातवीं के एक छात्रा के खुद के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ ली। यही नहीं, उसने पुलिस को भी पूरे दिन गुमराह किए रखा। पुलिस टीम उसके माता-पिता को खोजने के लिए शहर की खाक छानती रही, मुंबई भी संपर्क किया। छात्र ने सगे माता-पिता को ही अपहरणकर्ता बताया। हालांकि बाद में पता चला कि छात्र शहर के सेक्टर-1 का निवासी है। पुलिस ने छात्र को परिजनों को सौंप दिया है।
दरअसल, शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे थाना शिवाजी कॉलोनी में तैनात राइडर को गश्त के दौरान एक बच्चा मिला। बच्चे ने पुलिसकर्मी से बताया कि उसका अपहरण कर रोहतक लाया गया है। तभी राइडर उसे थाना प्रभारी नवीन के पास ले गया। बच्चे ने इंस्पेक्टर नवीन से बताया कि उसका मच्छी बाजार मुंबई (महाराष्ट्र) से अपहरण हुआ है। अपहरणकर्ता उसे रेल से रोहतक लेकर आए हैं। रेलवे स्टेशन से वह उनके चुंगल से भागने में सफल हुआ है। तभी नवीन ने उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। इसके बाद मुंबई पुलिस से संपर्क किया गया। लेकिन वहां अपहरण की कोई शिकायत दर्ज नहीं मिली। बच्चे का फोटो पुलिस के सोशल मीडिया ग्रुप पर शेयर किया गया।
इसके बाद पुलिस बच्चे को गाड़ी में बैठाकर शहर में घुमाने लगी। बच्चे की भाषा में हरियाणा भाषा का प्रभाव आने के बाद पुलिस को उस पर शक हो गया। बच्चा दिनभर पुलिस को गुमराह कर शहर में घूमता रहा। बच्चे ने बताया कि वह कभी रोहतक नहीं आया है। जब पुलिस बच्चे को लेकर दिल्ली बाईपास की तरफ पहुंची तो उसने दिल्ली रोड पर जाने की बात कही। साथ ही कहा कि दिल्ली रोड पर साईं बाबा मंदिर का है। यहां पर पुलिस का शक पुख्ता हो गया। लेकिन बच्चे ने फिर कह दिया कि उसने इंटरनेट पर मंदिर के बारे में देखा था।
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आधार कार्ड मशीन पर ले जाने की बात कही तो हुआ खुलासा
दिनभर घूमने के बाद पुलिस ने बच्चे से कहा कि उसे आधार कार्ड मशीन पर लेकर चलते हैं। ताकि उसके पते के बारे में जानकारी मिल सके । इस पर बच्चे ने कहा कि दो महीने पहले ही अपहरण करने वालों ने उसका आधार कार्ड में पता बदलवा दिया था। इस पर पुलिस को बच्चे पर ही शक हो गया। क्योंकि बच्चे ने सुबह कहा था कि दो दिन पहले ही उसका अपहरण हुआ है। जब पुलिस ने बच्चे पर दबाव बनाया तो उसने बताया कि वह मुंबई में अपने मौसा-मौसी के पास जाना चाहता था। उनसे मिले काफी समय हो गया था। इस कारण सारा खेल रचा।
जांच में पता चला कि बच्चे के पिता वैश्य कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल हैं जबकि माता एक कॉलेज में ही लेक्चरर है। फिलहाल बच्चे के पिता दिल्ली के एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं। बच्चे ने एक बार तो अपनी माता के बारे में भी पुलिस को बताया था। बच्चे ने कहा था कि जिस महिला ने उसका अपहरण किया है वह वैश्य कॉलेज में पढ़ाती है। इसके बाद बच्चे के माता-पिता को मामले की सूचना देकर बुलाया गया और उन्हें सौंपा गया। माता-पिता ने कहा कि बच्चे को हाईपर टेंशन नामक बीमारी है। इसी कारण ही उसने अपने अपहरण की झूठी कहानी सुनाई है। बच्चा काफी समय से मुंबई स्थित अपने मौसा-मौसी से मिलने की जिद कर रहा था।
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दरअसल, शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे थाना शिवाजी कॉलोनी में तैनात राइडर को गश्त के दौरान एक बच्चा मिला। बच्चे ने पुलिसकर्मी से बताया कि उसका अपहरण कर रोहतक लाया गया है। तभी राइडर उसे थाना प्रभारी नवीन के पास ले गया। बच्चे ने इंस्पेक्टर नवीन से बताया कि उसका मच्छी बाजार मुंबई (महाराष्ट्र) से अपहरण हुआ है। अपहरणकर्ता उसे रेल से रोहतक लेकर आए हैं। रेलवे स्टेशन से वह उनके चुंगल से भागने में सफल हुआ है। तभी नवीन ने उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। इसके बाद मुंबई पुलिस से संपर्क किया गया। लेकिन वहां अपहरण की कोई शिकायत दर्ज नहीं मिली। बच्चे का फोटो पुलिस के सोशल मीडिया ग्रुप पर शेयर किया गया।
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इसके बाद पुलिस बच्चे को गाड़ी में बैठाकर शहर में घुमाने लगी। बच्चे की भाषा में हरियाणा भाषा का प्रभाव आने के बाद पुलिस को उस पर शक हो गया। बच्चा दिनभर पुलिस को गुमराह कर शहर में घूमता रहा। बच्चे ने बताया कि वह कभी रोहतक नहीं आया है। जब पुलिस बच्चे को लेकर दिल्ली बाईपास की तरफ पहुंची तो उसने दिल्ली रोड पर जाने की बात कही। साथ ही कहा कि दिल्ली रोड पर साईं बाबा मंदिर का है। यहां पर पुलिस का शक पुख्ता हो गया। लेकिन बच्चे ने फिर कह दिया कि उसने इंटरनेट पर मंदिर के बारे में देखा था।
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आधार कार्ड मशीन पर ले जाने की बात कही तो हुआ खुलासा
दिनभर घूमने के बाद पुलिस ने बच्चे से कहा कि उसे आधार कार्ड मशीन पर लेकर चलते हैं। ताकि उसके पते के बारे में जानकारी मिल सके । इस पर बच्चे ने कहा कि दो महीने पहले ही अपहरण करने वालों ने उसका आधार कार्ड में पता बदलवा दिया था। इस पर पुलिस को बच्चे पर ही शक हो गया। क्योंकि बच्चे ने सुबह कहा था कि दो दिन पहले ही उसका अपहरण हुआ है। जब पुलिस ने बच्चे पर दबाव बनाया तो उसने बताया कि वह मुंबई में अपने मौसा-मौसी के पास जाना चाहता था। उनसे मिले काफी समय हो गया था। इस कारण सारा खेल रचा।
जांच में पता चला कि बच्चे के पिता वैश्य कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल हैं जबकि माता एक कॉलेज में ही लेक्चरर है। फिलहाल बच्चे के पिता दिल्ली के एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं। बच्चे ने एक बार तो अपनी माता के बारे में भी पुलिस को बताया था। बच्चे ने कहा था कि जिस महिला ने उसका अपहरण किया है वह वैश्य कॉलेज में पढ़ाती है। इसके बाद बच्चे के माता-पिता को मामले की सूचना देकर बुलाया गया और उन्हें सौंपा गया। माता-पिता ने कहा कि बच्चे को हाईपर टेंशन नामक बीमारी है। इसी कारण ही उसने अपने अपहरण की झूठी कहानी सुनाई है। बच्चा काफी समय से मुंबई स्थित अपने मौसा-मौसी से मिलने की जिद कर रहा था।