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जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही ने ली एक की जान
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 30 Jun 2016 02:28 AM IST
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बिना मास्क और सुरक्षा बेल्ट के 40 फुट गहरे सीवर में उतरा, छह घंटे बाद निकला शव
- फोटो : amar ujala
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जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (सीवरेज शाखा) के अधिकारी और ठेकेदार लगातार नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इसका खामियाजा बुधवार को एक 45 वर्षीय व्यक्ति को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। बिना सुरक्षा इंतजाम के इस व्यक्ति को सीवर ठीक करने के लिए करीब 40 फुट गहरे गड्डे में उतार दिया गया। आक्सीजन मास्क नहीं पहने होने की वजह से वह जहरीली गैस की चपेट में आ गया और नीचे फंस गया। सुरक्षा बेल्ट नहीं पहनने के कारण उसके साथी तुरंत उसे बाहर भी नहीं खींच पाए। करीब छह घंटे बाद जब उसे बाहर निकाला गया तो उसकी मौत हो चुकी थी। जबकि उसके साथ सीवर में उतर रहा व्यक्ति गैस का आभास होते ही बाहर आ गया था। विभाग और प्रशासन ने डीसी रेट पर नौकरी और मुआवजे का आश्वासन दिया तो उसके परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया। मरने वाला व्यक्ति परिवार में इकलौता कमाने वाला था।
रोहतक-पानीपत एक्सप्रेस वे के समीप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सामने मंगलवार रात आठ बजे से नाला सफाई का कार्य चल रहा था। बुधवार सुबह तकरीबन छह बजे सैमण पुट्ठी निवासी जितेंद्र और पाड़ा मोहल्ला निवासी अशोक नाले में उतरे। दोनों के पास सुरक्षा यंत्रों के नाम पर कुछ नहीं था। जितेंद्र को बेल्ट दी गई थी लेकिन अशोक के पास कुछ नहीं था। जितेंद्र ने बताया कि वह जैसे ही नीचे उतरा गैस के चलते बेहोशी आने लगी। इसके बाद उसने इशारा किया और उसे ऊपर निकाल लिया गया, लेकिन अशोक वहीं फंस गया। नाले के बाहर उन्हें ऊपर खींचने के लिए मकड़ौली निवासी गुलशन और लाहली निवासी प्रदीप भी थे। अशोक के फंसने पर मदद के लिए दूसरे ठेकेदार के आदमी मौके पर पहुंचे और करीब 12:40 पर अशोक के शव को सीवर से बाहर निकाला गया। मौके पर मौजूद ठेकेदार के कर्मचारी राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि अशोक सुबह छह बजे से फंसा है, उसके पास न सेफ्टी बेल्ट थी और न ही दूसरे सुरक्षा के इंतजाम। जबकि कर्मचारी अर्जुन ने बताया कि अशोक को बचाने के लिए दो पाइप के बीच गड्ढा खोदने को कहा गया, लेकिन किसी ने बात नहीं मानी। जिस नाले में अशोक उतरा था वह तीन माह से नहीं खुला था।
अधिकारी और ठेकेदार छिपते रहे
अशोक को सीवर से बाहर निकालने के लिए जहां कई युवक सड़क पर पसीना बहा रहे थे, वहीं एसटीपी पर कई अधिकारी और ठेकेदार आराम फरमा रहे थे। कोई अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं था कि वे कौन हैं। जब कुछ युवकों ने कमरे को तलाशा तो अशोक का ठेकेदार छिपा मिला। जब दूसरे कमरे को तलाशा गया तो अशोक के तीन अन्य साथी भी मिले। तीनों को लोगों के सवालों के जवाब देने से बचाने के लिए छिपाया गया था।
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बोले अधिकारी
दमकल विभाग की दो गाड़ियां और सात कर्मचारी मौके पर लगाए गए थे। पाइप लाइन से जहरीली गैस निकाल कर अंदर आक्सीजन भेजी जा रही थी। मैं खुद मौके पर था, ताकी रेस्क्यू आपरेशन में कोई ढिलाई न हो।
- सज्जन सिंह सांगवान, जिला दमकल अधिकारी
पिता का दर्द : एक कमाने वाला था वह भी चला गया
अशोक के पिता रतन लाल ने बताया कि घर में अशोक ही अकेला कमाने वाला था अब वह भी नहीं रहा। पांच लड़के और एक लड़की में अशोक सबसे बड़ा था। अशोक की पत्नी रेखा मजदूरी करती है। उसके दो बेटे और एक बेटी है। रतनलाल हरियाणा होमगार्ड्स विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब उनके परिवार का गुजर बसर कैसे होगा। इससे पहले दिमागी बुखार की वजह से बेटी को खो चुके हैं।
भाई की आंखों से निकल आए आंसू
भाई बिट्टी व राजू ने बताया कि उनकी दुनिया उजड़ गई है। भाई के जाने के बाद अब कौन उनको सहारा देगा। मौके पर आए अशोक के बेटे विकास की हालत दयनीय थी। वह बार-बार गड्ढे में झांक रहा था कि शायद कोई उम्मीद हो।
वन वे हुआ यातायात
एक्सप्रेस वे पर रेस्क्यू कार्य के दौरान पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर एक रास्ता जाम कर दिया था। इसके चलते यातायात करीब सात घंटे वन वे रहा।
विभागीय अधिकारी और ठेकेदार का विरोध
अशोक के रिश्तेदार सत्यवान सत्ते ने विभागीय अधिकारी और ठेकेदार का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मैनूअल सिकवेंज एक्ट के तहत सीवर में उतरने से पहले कर्मचारी पूरी ड्रेस और मास्क में होता है। जबकि अशोक और उसके दूसरे साथी के पास ऐसा कुछ भी नहीं था। जेई व एसडीओ को रजिस्टर मेनटेन करना होता है। जेई को मौके पर होना चाहिए। लेकिन घटनास्थल पर कोई नहीं था। जब एक अधिकारी से इस संबंध में पूछा तो वे ज्ञान देने लगे। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया है, इस शर्त पर पोस्टमार्टम कराया गया और शव का दाह संस्कार किया गया। सत्यवान ने बताया कि उनके सामने इस तरह की तीसरी घटना है, एक हिसार और एक जींद में युवक इसी तरह जान गंवा चुके थे। विभाग व ठेकेदार इससे सबक लेने को तैयार नहीं हैं।
अशोक की मौत के बाद भी अव्यवस्था का आलम
अशोक की मौत के बाद भी घटना स्थल पर अव्यवस्था का आलम रहा। सीवर में युवक बगैर मास्क और ड्रेस के महज बेल्ट के सहारे उतर रहे थे। हैरानी तो उस समय हुई जब तकरीबन 40 फीट गहरे गड्ढे में आक्सीजन भेज रहा पंप बार-बार बंद हो रहा था। बाद में दिखाने के लिए अतिरिक्त बेल्ट और मास्क मौके पर लाए गए।
और अंत में प्रार्थना करने पहुंचे अधिकारी
घटनास्थल पर सबसे अंत में अधीक्षण अभियंता एसके भाटिया, कार्यकारी अभियंता, एसडीओ, जेई और ठेकेदार पहुंचे। उपायुक्त की ओर से तहसीलदार मौके पर पहुंचे और परिजनों को सहायता देने का आश्वासन दिया। इन सब को अंत में आया देखकर एक की प्रतिक्रिया थी कि साहब लोग अंत में प्रार्थना करने आए हैं कि ऐसी घटना दोबारा न हो।
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रोहतक-पानीपत एक्सप्रेस वे के समीप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सामने मंगलवार रात आठ बजे से नाला सफाई का कार्य चल रहा था। बुधवार सुबह तकरीबन छह बजे सैमण पुट्ठी निवासी जितेंद्र और पाड़ा मोहल्ला निवासी अशोक नाले में उतरे। दोनों के पास सुरक्षा यंत्रों के नाम पर कुछ नहीं था। जितेंद्र को बेल्ट दी गई थी लेकिन अशोक के पास कुछ नहीं था। जितेंद्र ने बताया कि वह जैसे ही नीचे उतरा गैस के चलते बेहोशी आने लगी। इसके बाद उसने इशारा किया और उसे ऊपर निकाल लिया गया, लेकिन अशोक वहीं फंस गया। नाले के बाहर उन्हें ऊपर खींचने के लिए मकड़ौली निवासी गुलशन और लाहली निवासी प्रदीप भी थे। अशोक के फंसने पर मदद के लिए दूसरे ठेकेदार के आदमी मौके पर पहुंचे और करीब 12:40 पर अशोक के शव को सीवर से बाहर निकाला गया। मौके पर मौजूद ठेकेदार के कर्मचारी राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि अशोक सुबह छह बजे से फंसा है, उसके पास न सेफ्टी बेल्ट थी और न ही दूसरे सुरक्षा के इंतजाम। जबकि कर्मचारी अर्जुन ने बताया कि अशोक को बचाने के लिए दो पाइप के बीच गड्ढा खोदने को कहा गया, लेकिन किसी ने बात नहीं मानी। जिस नाले में अशोक उतरा था वह तीन माह से नहीं खुला था।
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अधिकारी और ठेकेदार छिपते रहे
अशोक को सीवर से बाहर निकालने के लिए जहां कई युवक सड़क पर पसीना बहा रहे थे, वहीं एसटीपी पर कई अधिकारी और ठेकेदार आराम फरमा रहे थे। कोई अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं था कि वे कौन हैं। जब कुछ युवकों ने कमरे को तलाशा तो अशोक का ठेकेदार छिपा मिला। जब दूसरे कमरे को तलाशा गया तो अशोक के तीन अन्य साथी भी मिले। तीनों को लोगों के सवालों के जवाब देने से बचाने के लिए छिपाया गया था।
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बोले अधिकारी
दमकल विभाग की दो गाड़ियां और सात कर्मचारी मौके पर लगाए गए थे। पाइप लाइन से जहरीली गैस निकाल कर अंदर आक्सीजन भेजी जा रही थी। मैं खुद मौके पर था, ताकी रेस्क्यू आपरेशन में कोई ढिलाई न हो।
- सज्जन सिंह सांगवान, जिला दमकल अधिकारी
पिता का दर्द : एक कमाने वाला था वह भी चला गया
अशोक के पिता रतन लाल ने बताया कि घर में अशोक ही अकेला कमाने वाला था अब वह भी नहीं रहा। पांच लड़के और एक लड़की में अशोक सबसे बड़ा था। अशोक की पत्नी रेखा मजदूरी करती है। उसके दो बेटे और एक बेटी है। रतनलाल हरियाणा होमगार्ड्स विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब उनके परिवार का गुजर बसर कैसे होगा। इससे पहले दिमागी बुखार की वजह से बेटी को खो चुके हैं।
भाई की आंखों से निकल आए आंसू
भाई बिट्टी व राजू ने बताया कि उनकी दुनिया उजड़ गई है। भाई के जाने के बाद अब कौन उनको सहारा देगा। मौके पर आए अशोक के बेटे विकास की हालत दयनीय थी। वह बार-बार गड्ढे में झांक रहा था कि शायद कोई उम्मीद हो।
वन वे हुआ यातायात
एक्सप्रेस वे पर रेस्क्यू कार्य के दौरान पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर एक रास्ता जाम कर दिया था। इसके चलते यातायात करीब सात घंटे वन वे रहा।
विभागीय अधिकारी और ठेकेदार का विरोध
अशोक के रिश्तेदार सत्यवान सत्ते ने विभागीय अधिकारी और ठेकेदार का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मैनूअल सिकवेंज एक्ट के तहत सीवर में उतरने से पहले कर्मचारी पूरी ड्रेस और मास्क में होता है। जबकि अशोक और उसके दूसरे साथी के पास ऐसा कुछ भी नहीं था। जेई व एसडीओ को रजिस्टर मेनटेन करना होता है। जेई को मौके पर होना चाहिए। लेकिन घटनास्थल पर कोई नहीं था। जब एक अधिकारी से इस संबंध में पूछा तो वे ज्ञान देने लगे। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया है, इस शर्त पर पोस्टमार्टम कराया गया और शव का दाह संस्कार किया गया। सत्यवान ने बताया कि उनके सामने इस तरह की तीसरी घटना है, एक हिसार और एक जींद में युवक इसी तरह जान गंवा चुके थे। विभाग व ठेकेदार इससे सबक लेने को तैयार नहीं हैं।
अशोक की मौत के बाद भी अव्यवस्था का आलम
अशोक की मौत के बाद भी घटना स्थल पर अव्यवस्था का आलम रहा। सीवर में युवक बगैर मास्क और ड्रेस के महज बेल्ट के सहारे उतर रहे थे। हैरानी तो उस समय हुई जब तकरीबन 40 फीट गहरे गड्ढे में आक्सीजन भेज रहा पंप बार-बार बंद हो रहा था। बाद में दिखाने के लिए अतिरिक्त बेल्ट और मास्क मौके पर लाए गए।
और अंत में प्रार्थना करने पहुंचे अधिकारी
घटनास्थल पर सबसे अंत में अधीक्षण अभियंता एसके भाटिया, कार्यकारी अभियंता, एसडीओ, जेई और ठेकेदार पहुंचे। उपायुक्त की ओर से तहसीलदार मौके पर पहुंचे और परिजनों को सहायता देने का आश्वासन दिया। इन सब को अंत में आया देखकर एक की प्रतिक्रिया थी कि साहब लोग अंत में प्रार्थना करने आए हैं कि ऐसी घटना दोबारा न हो।