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Rohtak: बम धमाकों के मुख्य आरोपी आतंकी टुंडा, किस्मत पर दिन भर मंडराते रहे बादल, शाम को हुआ बरी

Sat, 18 Feb 2023 08:44 AM IST
नवीन दलाल विकास सैनी, रोहतक (हरियाणा)
विकास सैनी, रोहतक (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Sat, 18 Feb 2023 08:44 AM IST
सार

रोहतक में 26 साल पहले हुए बम धमाकों के मुख्य आरोपी आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को अदालत ने बरी कर दिया। अब्दुल करीम टुंडे का केस हमेशा से शहर में चर्चा का विषय रहा है। शुक्रवार को फैसला आने की खबर के बाद तो मानो सभी की नजरें इस पर टिक गई थीं। 

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court acquitted terrorist Tunda main accused in the bomb blasts in Rohtak
Karim Tunda - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोहतक में 26 साल पहले हुए बम धमाकों के मुख्य आरोपी आतंकी अब्दुल करीम टुंडा की किस्मत पर दिन भर बादल मंडराते रहे। अब फैसला आया, तब फैसला आया की गहमागहमी के बीच लोग सारा दिन इंतजार करते रहे। केस की पेचीदगियों को देखते हुए अतिरिक्त सेशन जज राजकुमार यादव की अदालत ने दिन में चार बार फैसले का समय बदला। फैसले के इंतजार में बैठे बेसब्र लोगों की धड़कनें भी समय में बदलाव के साथ तेज और धीमा होती रहीं। चार बार समय बदलने के बाद आखिर पांचवीं बार शाम 4.35 पर अदालत ने फैसला सुनाया और टुंडा को बरी कर दिया।

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दिन में चार बार बदला गया समय, आखिर शाम 4.35 पर अदालत ने सुनाया फैसला
अब्दुल करीम टुंडे का केस हमेशा से शहर में चर्चा का विषय रहा है। शुक्रवार को फैसला आने की खबर के बाद तो मानो सभी की नजरें इस पर टिक गई थीं। कोर्ट के गलियारों से लेकर शहर की गलियों तक हर आम-खास बस यही जानना चाहता था कि टुंडे का क्या हुआ। जैसे-जैसे अदालत में फैसला टल रहा था, लोगों की बेसब्री भी बढ़ रही थी। आखिर फैसला आ ही गया।
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अदालत के गलियारों से लेकर शहर की गलियों तक दिन भर लगी रहीं लोगों की नजरें
अधिवक्ता विनीत वर्मा ने कहा कि अदालत ने सुबह ही फैसला सुनाना था, लेकिन गंभीरता को देखते हुए केस पर विचार करने के लिए चार बार समय लिया। सुबह से दोपहर, फिर तीन, साढ़े तीन बजे और आखिर शाम 4.35 पर फैसला सुनाया गया।
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26 साल में पीले पड़ गए 5000 से ज्यादा पेज
अधिवक्ता विनीत वर्मा ने बताया कि टुंडा के इस केस में कागजों से सूटकेस भर गया। पुलिस ने शुरू में इस केस में करीब 2000 पन्नों लंबा-चौड़ा चालान पेश किया। इसके बाद 125 पन्नों का सप्लीमेंट्री चालान पेश किया गया। केस की तैयारी के लिए उनको 5000 से ज्यादा पेज पढ़ने पड़े। चालान के कागज पिछले 26 वर्षों में पुराने होकर पीले पड़ गए। कुछ फट गए, कुछ पढ़ने लायक नहीं बचे। केस से जुड़ा हर कागज संभालना भी बड़ी चुनौती था। इस केस में सबसे मुश्किल गवाहों को तलाशना था। भीड़ में केस के गवाह ढूंढना और उनके बयानों के तोड़ निकालना भी काफी मुश्किल का काम था।

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