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तीन साल में 736 सड़क हादसों में 823 से अधिक लोगों की मौत
Updated Wed, 14 Feb 2018 01:52 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
जिले में सड़क हादसों में लोगों की मौत का आंकड़ा सालाना तौर पर 250 से ऊपर पहुंच गया है। पिछले तीन सालों में 823 से अधिक लोग हादसों में जान गंवा चुके हैं। इसमें अधिकतर हादसे दोपहिया वाहन चालकों के साथ हुए हैं। इन हादसों में 90 प्रतिशत की मौत का कारण सिर की चोट बताई गई और सिर की चोट अकसर हेलमेट न पहनने के कारण लगती हैं। अमर उजाला बेशकीमती जान बचाने की दिशा में एक अभियान शुरू कर रहा है। इसमें आप भी अपनी आहुति डाल सकते हैं। लोगों को हेलमेट पहनने को लेकर जागरूक करना जरूरी है। ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
पिछले तीन साल में जिले में 823 से अधिक मौत सड़क हादसों में हुई हैं। वर्ष 2015 में सड़क हादसों के कुल 252 केस दर्ज हुए। इनमें 293 लोगों की मौत हुई तथा 75 लोग घायल हुए। वर्ष 2016 में 239 केस दर्ज हुए। इनमें 257 लोगों की मौत हुई है तथा 82 लोग घायल हुए हैं। इसी तरह से वर्ष 2017 में 245 केस दर्ज हुए। इनमें 273 लोगों की असामयिक मौत हुई तथा 78 लोग घाय हुए। वर्ष 2018 में 31 जनवरी तक 21 केस दर्ज हो चुके हैं। इन केसों में 29 लोगों ने जान गवाई है तथा 15 लोग घाय हुए हैं।
हादसों में मौत का 90 प्रतिशत कारण सिर की चोट
जिला अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र कौशिक का कहना है कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जितने भी मामले सामने आते हैं। उनमें मौत का 90 प्रतिशत कारण सिर की चोट होती है। प्राय: यह भी देखने में आते है कि 90 प्रतिशत केसों में मृतक द्वारा हेलमेट नहीं पहना होता। हेलमेट पहनने से हादसे तो नहीं रोके जा सकते, लेकिन हादसों में जान की सुरक्षा जरूर की जा सकती है। यदि सिर की चोट ना हो तो जान तो बचाई ही जा सकती है। इसलिए हेलमेट पहनना चाहिए। दोपहिया वाहन चलाते समय तो यह बहुत ही जरूरी है।
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नहीं चुकाई जा सकती युवाओं की जिंदगी की कीमत
समाजसेवी डॉ. विपिन सांगवान का कहना है कि सड़क हादसे में एक युवक की मौत देश का बड़ा नुकसान है। हर युवा के अंदर अलग क्षमता होती है। उसे अवसर मिले तो वह देश के लिए कुछ ना कुछ बड़ा योगदान भी दे सकता है। इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनें। उन्हें नुकसान ना हो, परिवार को नुकसान ना हो, देश को नुकसान ना हो।
चालान नहीं, सुरक्षा के लिए पहनें हेलमेट
ट्रैफिक पुलिस एसएचओ अशोक दहिया का कहना है कि हेलमेट को दोपहिया वाहन चालक हलके में लेते हैं। बेशक हेलमेट ना पहनने का चालान रुपयों में छोटा है। लेकिन जिंदगी बचाने में इसका सबसे बड़ा योगदान है। हादसों में कई युवकों की मौत महज हेलमेट की कमी के कारण होती है। इसलिए सभी हेलमेट पहनें। ट्रिपल राइडिंग, ओवर स्पीड भी हादसों का कारण है। विशेष रूप से युवा इन बातों का ध्यान रखें।
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झज्जर।
जिले में सड़क हादसों में लोगों की मौत का आंकड़ा सालाना तौर पर 250 से ऊपर पहुंच गया है। पिछले तीन सालों में 823 से अधिक लोग हादसों में जान गंवा चुके हैं। इसमें अधिकतर हादसे दोपहिया वाहन चालकों के साथ हुए हैं। इन हादसों में 90 प्रतिशत की मौत का कारण सिर की चोट बताई गई और सिर की चोट अकसर हेलमेट न पहनने के कारण लगती हैं। अमर उजाला बेशकीमती जान बचाने की दिशा में एक अभियान शुरू कर रहा है। इसमें आप भी अपनी आहुति डाल सकते हैं। लोगों को हेलमेट पहनने को लेकर जागरूक करना जरूरी है। ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
पिछले तीन साल में जिले में 823 से अधिक मौत सड़क हादसों में हुई हैं। वर्ष 2015 में सड़क हादसों के कुल 252 केस दर्ज हुए। इनमें 293 लोगों की मौत हुई तथा 75 लोग घायल हुए। वर्ष 2016 में 239 केस दर्ज हुए। इनमें 257 लोगों की मौत हुई है तथा 82 लोग घायल हुए हैं। इसी तरह से वर्ष 2017 में 245 केस दर्ज हुए। इनमें 273 लोगों की असामयिक मौत हुई तथा 78 लोग घाय हुए। वर्ष 2018 में 31 जनवरी तक 21 केस दर्ज हो चुके हैं। इन केसों में 29 लोगों ने जान गवाई है तथा 15 लोग घाय हुए हैं।
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हादसों में मौत का 90 प्रतिशत कारण सिर की चोट
जिला अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र कौशिक का कहना है कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जितने भी मामले सामने आते हैं। उनमें मौत का 90 प्रतिशत कारण सिर की चोट होती है। प्राय: यह भी देखने में आते है कि 90 प्रतिशत केसों में मृतक द्वारा हेलमेट नहीं पहना होता। हेलमेट पहनने से हादसे तो नहीं रोके जा सकते, लेकिन हादसों में जान की सुरक्षा जरूर की जा सकती है। यदि सिर की चोट ना हो तो जान तो बचाई ही जा सकती है। इसलिए हेलमेट पहनना चाहिए। दोपहिया वाहन चलाते समय तो यह बहुत ही जरूरी है।
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नहीं चुकाई जा सकती युवाओं की जिंदगी की कीमत
समाजसेवी डॉ. विपिन सांगवान का कहना है कि सड़क हादसे में एक युवक की मौत देश का बड़ा नुकसान है। हर युवा के अंदर अलग क्षमता होती है। उसे अवसर मिले तो वह देश के लिए कुछ ना कुछ बड़ा योगदान भी दे सकता है। इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनें। उन्हें नुकसान ना हो, परिवार को नुकसान ना हो, देश को नुकसान ना हो।
चालान नहीं, सुरक्षा के लिए पहनें हेलमेट
ट्रैफिक पुलिस एसएचओ अशोक दहिया का कहना है कि हेलमेट को दोपहिया वाहन चालक हलके में लेते हैं। बेशक हेलमेट ना पहनने का चालान रुपयों में छोटा है। लेकिन जिंदगी बचाने में इसका सबसे बड़ा योगदान है। हादसों में कई युवकों की मौत महज हेलमेट की कमी के कारण होती है। इसलिए सभी हेलमेट पहनें। ट्रिपल राइडिंग, ओवर स्पीड भी हादसों का कारण है। विशेष रूप से युवा इन बातों का ध्यान रखें।