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बिना जांच गर्भवती को बताया कोरोना संदिग्ध और घर पर चस्पा कर दिया क्वारंटीन, फिर उतारा
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गांव नांदल निवासी जितेंद्र ने लाखनमाजरा पीएचसी के डॉक्टरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह अपनी गर्भवती पत्नी को दिखाने गया था। डॉक्टरों ने बगैर जांच के उनको कोरोना संदिग्ध बताते हुए उनके घर के बाहर क्वारंटीन का पोस्टर चस्पा करवा दिया। इससे पूरे गांव ने उनसे दूरी बना ली। जब वह पीजीआईएमएस उपचार के लिए आए तो उनको जांच के बाद बताया गया कि उसकी पत्नी को कोरोना नहीं है, वह घर जाकर आराम करें। इसकी शिकायत जब अधिकारियों को दी गई तो पोस्टर हटवाया गया।
शिकायतकर्ता जितेंद्र ने बताया 22 मार्च को वह दिल्ली से रोहतक अपने गांव नांदल में आया था। दिल्ली में उसका अपना ट्रांसपोर्ट का काम है। गांव आने पर उसे पता चला कि पत्नी को खांसी और गले में दर्द है। पत्नी की जांच करवाने के लिए जब वह लाखनमाजरा पीएचसी गया तो बगैर जांच के डॉक्टर ने कोरोना संदिगध माना। मरीज को जांच के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। इसके पीछे से घर के बाहर पूरे परिवार की डिटेल के साथ क्वारंटीन का पोस्टर चस्पा करवा दिया, इसके चलते पूरे गांव में दहशत हो गई और सभी ने हमको अलग कर दिया। हमारे घर के बाहर ताला लगाने तक की योजना बन गई। इसी दौरान वह पत्नी की जांच कराने रोहतक पीजीआईएमएस गया था। यहां से उसकी पत्नी को ब्लाक सी में सैंपल जांच करवाने के लिए भेज दिया गया। जांच में रिपोर्ट निगेटिव आ गई। वहीं घर से जानकारी मिली की स्वास्थ्य विभाग ने घर के बाहर पोस्टर चस्पा करवा दिया है। इसके चलते सभी घरवालों को परेशानी हुई। पीजीआईएमएस के डॉक्टरों को यह बात बताई तो उन्होंने लाखनमाजरा पीएचसी में स्टाफ से बात की और पोस्टर हटवाने को कहा। इसके बाद पोस्टर हटा दिया गया। लेकिन बगैर जांच पोस्टर चस्पा करवाने से पूरे परिवार को मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी। इसकी शिकायत वीरवार को लाखनमाजरा में तैनात एसएमओ को भी की और इससे पहले पुलिस कंट्रोल रूम में शिकायत की गई तो पुलिस ने कहा कि 14 अप्रैल के बाद अपनी शिकायत दर्ज करवा देना।
क्वारंटीन का मतलब यह नहीं होता कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव ही होगा। संदिग्धों में इसके पॉजिटिव होने की आशंका बढ़ जाती है। पोस्टर का मतलब होता है कि बाकी लोग संदिग्ध व्यक्ति व परिवार से दूरी बना कर रखें। इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, यह समाज के हित में किया जा रहा है। विदेश से जो आ रहे हैं, उन्हें भी क्वारंटीन किया जाता है। ऐसा नहीं है कि सभी पॉजिटिव हैं। नांदल गांव वाले मामले में क्या है संबंधित अधिकारी से पूछेंगे।
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- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन
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शिकायतकर्ता जितेंद्र ने बताया 22 मार्च को वह दिल्ली से रोहतक अपने गांव नांदल में आया था। दिल्ली में उसका अपना ट्रांसपोर्ट का काम है। गांव आने पर उसे पता चला कि पत्नी को खांसी और गले में दर्द है। पत्नी की जांच करवाने के लिए जब वह लाखनमाजरा पीएचसी गया तो बगैर जांच के डॉक्टर ने कोरोना संदिगध माना। मरीज को जांच के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। इसके पीछे से घर के बाहर पूरे परिवार की डिटेल के साथ क्वारंटीन का पोस्टर चस्पा करवा दिया, इसके चलते पूरे गांव में दहशत हो गई और सभी ने हमको अलग कर दिया। हमारे घर के बाहर ताला लगाने तक की योजना बन गई। इसी दौरान वह पत्नी की जांच कराने रोहतक पीजीआईएमएस गया था। यहां से उसकी पत्नी को ब्लाक सी में सैंपल जांच करवाने के लिए भेज दिया गया। जांच में रिपोर्ट निगेटिव आ गई। वहीं घर से जानकारी मिली की स्वास्थ्य विभाग ने घर के बाहर पोस्टर चस्पा करवा दिया है। इसके चलते सभी घरवालों को परेशानी हुई। पीजीआईएमएस के डॉक्टरों को यह बात बताई तो उन्होंने लाखनमाजरा पीएचसी में स्टाफ से बात की और पोस्टर हटवाने को कहा। इसके बाद पोस्टर हटा दिया गया। लेकिन बगैर जांच पोस्टर चस्पा करवाने से पूरे परिवार को मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी। इसकी शिकायत वीरवार को लाखनमाजरा में तैनात एसएमओ को भी की और इससे पहले पुलिस कंट्रोल रूम में शिकायत की गई तो पुलिस ने कहा कि 14 अप्रैल के बाद अपनी शिकायत दर्ज करवा देना।
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क्वारंटीन का मतलब यह नहीं होता कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव ही होगा। संदिग्धों में इसके पॉजिटिव होने की आशंका बढ़ जाती है। पोस्टर का मतलब होता है कि बाकी लोग संदिग्ध व्यक्ति व परिवार से दूरी बना कर रखें। इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, यह समाज के हित में किया जा रहा है। विदेश से जो आ रहे हैं, उन्हें भी क्वारंटीन किया जाता है। ऐसा नहीं है कि सभी पॉजिटिव हैं। नांदल गांव वाले मामले में क्या है संबंधित अधिकारी से पूछेंगे।
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- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन