फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   choturam jayanti special : milk was main food of choturam

बाजरे की खिचड़ी में गाय के दूध की लस्सी ने छोटूराम को बनाया दमदार

Tue, 24 Nov 2015 02:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Tue, 24 Nov 2015 02:31 AM IST
विज्ञापन
choturam jayanti special : milk was main food of choturam
किसान मसीहा छोटूराम का गांव गढ़ी सांपला। सांपला कस्बे से झज्जर रोड पर
विज्ञापन
आधा किलोमीटर दूर। यहां के बुजुर्गों की आंखों में आज भी छोटूराम की धुंधली तस्वीर बसती है। छोटूराम की जयंती पर याद आता है कि बंदे में दम था। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि वैसे तो छोटूराम युवावस्था से ही गांव से बाहर रहते थे, लेकिन फाग खेलने वे अक्सर गांव आया करते थे। उन्हें बाजरे की खिचड़ी बहुत पसंद थी और वे खाने मे हमेशा बाजरे की खिचड़ी में गाय के दूध की बनी लस्सी डलवाके पीते थे।

शायद इस सादे भोजन ने भी उन्हें दमदार बनाया। लेकिन अब दूसरों और खुद अपने लिए ही आवाज उठाने वाला गांव में कोई नहीं है। गांव के बदतर हालात बता रहे हैं कि गांव की न तो किसी नेता को चिंता है और न ही खुद गांव वाले सुधार के लिए संघर्ष को तैयार।

ग्रामीण 87 वर्षीय होशियार सिंह ने बताया कि मैंने छोटूराम को खूब देखा है। वे सांवले रंग के शरीर के हल्के फुलके बडे़ ही नेक इंसान थे। वे हमेशा ही शान के तौर पर खंडवा बांधते थे। हमारे दादा नथूवा के पास उनका काफी आना जाना था। होशियार सिंह ने कहा कि दादा नथूवा भी छोटूराम का हमारे सामने कई बार जिक्र किया करते थे। जब मैं 18 साल का था तो मैंने छोटूराम को देखा था।

हम उनसे मिलने रोहतक में उनकी नीली कोठी पर गए थे। करतार सिंह ने बताया कि छोटूराम तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। इनके दो बड़े भाइयों के नाम नेकी और रामस्वरूप थे। छोटूराम झज्जर कॉलेज में पढ़ाई किया करते थे। उनक ी पारिवारिक हालात इतने कमजोर थे कि कई बार उनके पास तांगेवाले को देने के लिए किराए के पैसे भी नहीं होते थे। गढ़ी गांव निवासी चौ छोटूराम विचार मंच के जरनल सेक्रेटरी व पूर्व प्रधान रणबीर गढ़ी ने बताया कि छोटूराम की दो लड़कियां थीं। बड़ी लड़की भगानी देवी के बेटे बीरेंद्र सिंह इस समय केंद्र सरकार में मंत्री हैं। 9 जनवरी 1945 को छोटूराम का निधन हो गया।

गांव में रहते हैं पांचवीं पीढ़ी के वारिस
छोटूराम की पुश्तैनी हवेली में उनकी पांचवीं पीढ़ी के वारिस सुरेंद्र रहते हैं। उन्होंने बताया कि हमारा सारा परिवार अलग-अलग शहरों में रहता है। सिर्फ मैं ही अपनी माँ मूर्ती बेटी सोनिया, पिंकी और बेटे साहिल के साथ यहां रहता हूं।

प्रतिमा यूं होगी खास
छोटूराम संग्रहालय में बनने वाली प्रतिमा के लिए देशभर से लोहा जुटाया जा रहा है। रणबीर गढ़ी ने बताया की इस प्रतिमा की उम्र लगभग एक हजार साल होगी। प्रतिमा की ऊंचाई 64 फुट होगी। इसे बनाने में 134 मन लोहा लगेगा। मूर्तिकार रामसुतार इसका निर्माण करेंगे।

आज बीरेंद्र सिंह रखेंगे आधारशिला
कस्बे में हाइवे नंबर दस के पास स्थित छोटूराम संग्रहालय में मंगलवार को छोटूराम की प्रतिमा की आधारशिला रखी जाएगी। सुबह दस बजे हवन होगा। कार्यक्रम में मुख्यातिथि केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिह और संजीव बाल्याण होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed