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Rohtak News: मातनहेल में लगेगा बायोगैस प्लांट, एक करोड़ 45 लाख रुपये होंगे खर्च
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झज्जर। हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। झज्जर जिले के मातनहेल गांव में लगभग 1 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाएगा।
राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए आवश्यक बजट जारी कर दिया है, जिससे निर्माण कार्य जल्द शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस बायोगैस प्लांट के निर्माण और देखरेख की पूरी जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग को सौंपी गई है। विभाग ने टेंडर प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्लांट को तैयार किया जा सके। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बायोगैस प्लांट से न केवल गांव की सूरत बदलेगी, बल्कि यह परियोजना आसपास के गांवों के लिए भी एक मॉडल साबित होगी। सरकार की यह पहल ''''गोवर्धन योजना'''' और ''''स्वच्छ भारत मिशन'''' को ग्रामीण स्तर पर मजबूती देने का एक बड़ा प्रयास है।
ग्रामीणों को मिलेंगे बहुआयामी लाभ
प्लांट के चालू होने से गांव और आसपास के क्षेत्रों को खाना पकाने और अन्य कार्यों के लिए पर्यावरण-अनुकूल बायोगैस उपलब्ध होगी। गांव में मवेशियों के गोबर और जैविक कचरे का सही ढंग से निस्तारण हो सकेगा, जिससे गंदगी और बीमारियों का खतरा कम होगा। बायोगैस उत्पादन की प्रक्रिया के बाद निकलने वाली स्लरी (अवशेष) से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार होगी, जिससे किसानों को रसायनों से मुक्त खेती करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा निर्माण कार्य और संचालन के दौरान स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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वर्जन
मातनहेल में बायोगैस का प्लांट लगाया जाएगा। इसके लिए 50 लाख रुपये की मंजूरी मिल चुकी है जबकि एक करोड़ रुपये की मंजूरी मिलना बाकी है। लगभग दो साल पहले इसे लगाने के लिए मंजूरी मिली थी, लेकिन बजट कुछ समय पहले ही आया है। बायोगैस प्लांट लगने से लोगों को फायदा होगा।
सुशील सैनी, कोऑर्डिनेटर, स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण
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राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए आवश्यक बजट जारी कर दिया है, जिससे निर्माण कार्य जल्द शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस बायोगैस प्लांट के निर्माण और देखरेख की पूरी जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग को सौंपी गई है। विभाग ने टेंडर प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्लांट को तैयार किया जा सके। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बायोगैस प्लांट से न केवल गांव की सूरत बदलेगी, बल्कि यह परियोजना आसपास के गांवों के लिए भी एक मॉडल साबित होगी। सरकार की यह पहल ''''गोवर्धन योजना'''' और ''''स्वच्छ भारत मिशन'''' को ग्रामीण स्तर पर मजबूती देने का एक बड़ा प्रयास है।
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ग्रामीणों को मिलेंगे बहुआयामी लाभ
प्लांट के चालू होने से गांव और आसपास के क्षेत्रों को खाना पकाने और अन्य कार्यों के लिए पर्यावरण-अनुकूल बायोगैस उपलब्ध होगी। गांव में मवेशियों के गोबर और जैविक कचरे का सही ढंग से निस्तारण हो सकेगा, जिससे गंदगी और बीमारियों का खतरा कम होगा। बायोगैस उत्पादन की प्रक्रिया के बाद निकलने वाली स्लरी (अवशेष) से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार होगी, जिससे किसानों को रसायनों से मुक्त खेती करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा निर्माण कार्य और संचालन के दौरान स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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मातनहेल में बायोगैस का प्लांट लगाया जाएगा। इसके लिए 50 लाख रुपये की मंजूरी मिल चुकी है जबकि एक करोड़ रुपये की मंजूरी मिलना बाकी है। लगभग दो साल पहले इसे लगाने के लिए मंजूरी मिली थी, लेकिन बजट कुछ समय पहले ही आया है। बायोगैस प्लांट लगने से लोगों को फायदा होगा।
सुशील सैनी, कोऑर्डिनेटर, स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण