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Rohtak News: आशा कार्यकर्ताओं ने की मानदेय में 1500 रुपये बढ़ाने की मांग
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रोहतक। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा के आह्वान पर शुक्रवार को जिले की आशा कार्यकर्ताओं ने सिविल सर्जन रोहतक के माध्यम से लंबित मांगों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। सिविल सर्जन की तरफ से डॉ. विजय ढुल ने ज्ञापन लिया। आशा कार्यकर्ताओं ने 2025 में घोषित 1500 रुपये मानदेय में बढ़ोतरी को लागू करने की मांग की।
जिला सचिव फूलवती ने कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं लेकिन सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। ऐसे में अगर इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो आशा वर्कर्स अपने अधिकारों के लिए 21 जुलाई को पंचकूला में राज्यस्तरीय आंदोलन करने को मजबूर होंगी।
इस दौरान जिला सचिव फूलवती, जिला प्रधान सोनिया, जिला कोषाध्यक्ष अनीता भाली व सीटू जिला सचिव कामरेड विनोद के साथ अन्य उपस्थित रहे।
ये हैं मांगें:
45वें व 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करते हुए आशाओं को पक्के कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
छह माह के वेतन के साथ मातृत्व अवकाश, 20 दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जाए। पेंशन सुनिश्चित होने तक कोई सेवानिवृत्ति न की जाए। हर प्रकार के ऑनलाइन काम का दबाव बनाना बंद किया जाए। फील्ड ड्यूटी के लिए आशा कार्यकर्ताओं को स्कूटर दिया जाए व यात्रा व्यय का भुगतान किया जाए। चार श्रम संहिताओं को रद्द कर वर्करों को श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए।
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जिला सचिव फूलवती ने कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं लेकिन सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। ऐसे में अगर इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो आशा वर्कर्स अपने अधिकारों के लिए 21 जुलाई को पंचकूला में राज्यस्तरीय आंदोलन करने को मजबूर होंगी।
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इस दौरान जिला सचिव फूलवती, जिला प्रधान सोनिया, जिला कोषाध्यक्ष अनीता भाली व सीटू जिला सचिव कामरेड विनोद के साथ अन्य उपस्थित रहे।
ये हैं मांगें:
45वें व 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करते हुए आशाओं को पक्के कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
छह माह के वेतन के साथ मातृत्व अवकाश, 20 दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जाए। पेंशन सुनिश्चित होने तक कोई सेवानिवृत्ति न की जाए। हर प्रकार के ऑनलाइन काम का दबाव बनाना बंद किया जाए। फील्ड ड्यूटी के लिए आशा कार्यकर्ताओं को स्कूटर दिया जाए व यात्रा व्यय का भुगतान किया जाए। चार श्रम संहिताओं को रद्द कर वर्करों को श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए।
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