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जननी ने ठुकराया तो अंजान महिला ने गले लगा कर दिया दुर्गा को नवजीवन
Updated Sun, 25 Mar 2018 02:44 AM IST
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तेंदुआ शावक दुर्गा को बचाने के लिए महिला श्रमिक बनी यशोदा
तीन माह तक पिलाया अपना दूध, हाइपोथरमिया और लिंपिंग की बीमारी से ग्रस्त थी शावक दुर्गा
अब पिपली से लाया जाएगा रोहतक के तिलियार जू
संजय कुमार
रोहतक।
जंगल में ताकतवर ही जीवित रहेगा और उसकी ही परवरिश भी होगी। जंगल का यह नियम पिंजौर के जंगलों में महज 16 दिन की तेंदुआ शावक दुर्गा को भारी पड़ गया। हाइपोथरमिया और लिंपिंग की बीमारी से ग्रस्त दुर्गा के परिवार ने उसे जंगल में मरने को छोड़ दिया, लेकिन वन विभाग की टीम उसे अपने साथ ले आई और उसका उपचार किया। हाइपोथरमिया रोग से बचाने के लिए दुर्गा को एक मजदूर महिला ने अपना तीन माह तक दूध पिलाया और उसे अपने कलेजे से लगाकर रखा। अब 14 माह की दुर्गा स्वस्थ है। अब उसे पिपली से रोहतक के तिलियार जू में लाया जाएगा।
कुरुक्षेत्र के पिपली चिड़ियाघर में मादा तेंदुआ को सभी प्यार से दुर्गा बुलाते हैं। दुर्गा को जंगल से लेकर आए डीडब्ल्यूएलओ डॉ. अशोक खासा ने बताया कि दुर्गा को जब लाया गया तो वह महज 16 दिन की थी। बीमार और पैर से लाचार होने के कारण उसे उसके परिवार ने छोड़ दिया था। छोटी दुर्गा को टीम लेकर पिपली चिड़िया घर में आई और उसका उपचार किया। सर्दी में आने के कारण दुर्गा को हाइपोथरमिया की समस्या थी, इससे उसे सांस लेने में दिक्कत होती थी। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए पिपली में ही एक मजदूर महिला से आग्रह किया गया कि वह उसे अपना दूध पिला कर और उसे अपने सीने से लगा कर उसका जीवन बचा सकती है। उनकी इस अपील को महिला ने स्वीकार कर लिया और उसने तीन माह तक दुर्गा को अपना दूध पिलाया और उसे अपने साथ रखा।
इसके बाद दुर्गा के लिए अमेरिका से दूध का पाउडर मंगाया गया। जब दुर्गा साढे़ चार माह की हुई तो उसे दूध के साथ कीमा देना शुरू किया। इसी उपचार के दौरान दुर्गा को हाइपोथरमिया और लिंपिंग से छुटकारा मिल गया। वर्तमान में मादा तेंदुआ दुर्गा बिल्कुल स्वस्थ है और उसे अगले सप्ताह रोहतक तिलियार झील पर चिड़िया घर में लाया जाएगा। इसके लिए सभी तैयारियां कर ली गई है। जब तक दुर्गा ढाई साल की नहीं होती वह अकेली रहेगी और बाद में उसके बराबर का जोड़ा किसी चिड़िया घर से मंगाया जाएगा। डॉ. खासा ने बताया कि अधिकांश शेडयूल वन की तेंदुआ की उम्र जंगल में लगभग 15 साल होती है और चिड़िया घर में समय पर उपचार और देखभाल के चलते वह 20 साल तक जीवत रहते हैं। जांच अधिकारी ने बताया कि दुर्गा को जब लाया गया तो वह बहुत छोटी थी, इसलिए उसे अब सही होने के बाद भी जंगल में नहीं छोड़ा जा सकता। अब वह चिड़िया घर में एक परिवार का हिस्सा बन कर रही रहेग्री।
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फोटो एसएनजे 01 व 02
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तीन माह तक पिलाया अपना दूध, हाइपोथरमिया और लिंपिंग की बीमारी से ग्रस्त थी शावक दुर्गा
अब पिपली से लाया जाएगा रोहतक के तिलियार जू
संजय कुमार
रोहतक।
जंगल में ताकतवर ही जीवित रहेगा और उसकी ही परवरिश भी होगी। जंगल का यह नियम पिंजौर के जंगलों में महज 16 दिन की तेंदुआ शावक दुर्गा को भारी पड़ गया। हाइपोथरमिया और लिंपिंग की बीमारी से ग्रस्त दुर्गा के परिवार ने उसे जंगल में मरने को छोड़ दिया, लेकिन वन विभाग की टीम उसे अपने साथ ले आई और उसका उपचार किया। हाइपोथरमिया रोग से बचाने के लिए दुर्गा को एक मजदूर महिला ने अपना तीन माह तक दूध पिलाया और उसे अपने कलेजे से लगाकर रखा। अब 14 माह की दुर्गा स्वस्थ है। अब उसे पिपली से रोहतक के तिलियार जू में लाया जाएगा।
कुरुक्षेत्र के पिपली चिड़ियाघर में मादा तेंदुआ को सभी प्यार से दुर्गा बुलाते हैं। दुर्गा को जंगल से लेकर आए डीडब्ल्यूएलओ डॉ. अशोक खासा ने बताया कि दुर्गा को जब लाया गया तो वह महज 16 दिन की थी। बीमार और पैर से लाचार होने के कारण उसे उसके परिवार ने छोड़ दिया था। छोटी दुर्गा को टीम लेकर पिपली चिड़िया घर में आई और उसका उपचार किया। सर्दी में आने के कारण दुर्गा को हाइपोथरमिया की समस्या थी, इससे उसे सांस लेने में दिक्कत होती थी। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए पिपली में ही एक मजदूर महिला से आग्रह किया गया कि वह उसे अपना दूध पिला कर और उसे अपने सीने से लगा कर उसका जीवन बचा सकती है। उनकी इस अपील को महिला ने स्वीकार कर लिया और उसने तीन माह तक दुर्गा को अपना दूध पिलाया और उसे अपने साथ रखा।
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इसके बाद दुर्गा के लिए अमेरिका से दूध का पाउडर मंगाया गया। जब दुर्गा साढे़ चार माह की हुई तो उसे दूध के साथ कीमा देना शुरू किया। इसी उपचार के दौरान दुर्गा को हाइपोथरमिया और लिंपिंग से छुटकारा मिल गया। वर्तमान में मादा तेंदुआ दुर्गा बिल्कुल स्वस्थ है और उसे अगले सप्ताह रोहतक तिलियार झील पर चिड़िया घर में लाया जाएगा। इसके लिए सभी तैयारियां कर ली गई है। जब तक दुर्गा ढाई साल की नहीं होती वह अकेली रहेगी और बाद में उसके बराबर का जोड़ा किसी चिड़िया घर से मंगाया जाएगा। डॉ. खासा ने बताया कि अधिकांश शेडयूल वन की तेंदुआ की उम्र जंगल में लगभग 15 साल होती है और चिड़िया घर में समय पर उपचार और देखभाल के चलते वह 20 साल तक जीवत रहते हैं। जांच अधिकारी ने बताया कि दुर्गा को जब लाया गया तो वह बहुत छोटी थी, इसलिए उसे अब सही होने के बाद भी जंगल में नहीं छोड़ा जा सकता। अब वह चिड़िया घर में एक परिवार का हिस्सा बन कर रही रहेग्री।
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फोटो एसएनजे 01 व 02