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Rewari News: उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने किया व्रत का समापन
Fri, 08 Nov 2024 11:26 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 08 Nov 2024 11:26 PM IST
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रेवाड़ी। शहर के कोनसीवास रोड पर बनाए कृत्रिम घाट में पूजा पाठ करती महिलाएं। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी/धारूहेड़ा। सूर्योपासना का पर्व छठ जिलेभर में आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया। व्रती महिलाओं ने शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया। व्रती महिलाओं ने सूर्य देव व्रत व छठ मैया से परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। लोगों को प्रसाद भी वितरित किया गया।
व्रती महिलाएं रात दो बजे ही उठकर प्रसाद सजाने के साथ पूजा के सामान को जुटाने में लग गई थीं। स्नान आदि करके चार बजे भोर में ही पूजा स्थल और घाट के लिए निकल दिए। कुछ महिलाएं तो चार बजे के करीब कृत्रिम घाट पर पहुंच चुकी थीं। महिलाओं के साथ बच्चे भी घाटों पहुंचे। महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया गया। रेवाड़ी और धारूहेड़ा में पूजा स्थल पर भीड़ लगी रही। पूर्वांचल सेवा समिति के सचिव अश्विनी, अंजलि ने बताया कि छठ पूजा को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। छठ व्रत को संतान की लंबी आयु, पति के स्वस्थ जीवन और घर-परिवार के सुख-सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। उन्होंने बताया कि नहर के घाट पर विभिन्न प्रदेशों से आए लोगों के साथ मिलजुल का यह महापर्व मनाया जाता है।
दीपक, पवन, राजेश ने बताया कि छठ व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस दौरान व्रती 36 घंटे से भी ज्यादा समय के लिए निर्जला व्रत करके छठी मैया और भगवान सूर्य की उपासना करते हैं।
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पंडित वेदप्रकाश ने बताया कि छठ पर्व में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि सूर्य को जीवन का कारक माना जाता है। वह सौरमंडल का केंद्र है और सभी ग्रहों को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करता है। छठ पूजा पर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर भक्तजन सूर्य देवता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करते हैं। मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है और संतान को लंबी आयु व स्वस्थ जीवन का भी आशीर्वाद मिलता है।
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रेवाड़ी/धारूहेड़ा। सूर्योपासना का पर्व छठ जिलेभर में आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया। व्रती महिलाओं ने शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया। व्रती महिलाओं ने सूर्य देव व्रत व छठ मैया से परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। लोगों को प्रसाद भी वितरित किया गया।
व्रती महिलाएं रात दो बजे ही उठकर प्रसाद सजाने के साथ पूजा के सामान को जुटाने में लग गई थीं। स्नान आदि करके चार बजे भोर में ही पूजा स्थल और घाट के लिए निकल दिए। कुछ महिलाएं तो चार बजे के करीब कृत्रिम घाट पर पहुंच चुकी थीं। महिलाओं के साथ बच्चे भी घाटों पहुंचे। महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया गया। रेवाड़ी और धारूहेड़ा में पूजा स्थल पर भीड़ लगी रही। पूर्वांचल सेवा समिति के सचिव अश्विनी, अंजलि ने बताया कि छठ पूजा को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। छठ व्रत को संतान की लंबी आयु, पति के स्वस्थ जीवन और घर-परिवार के सुख-सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। उन्होंने बताया कि नहर के घाट पर विभिन्न प्रदेशों से आए लोगों के साथ मिलजुल का यह महापर्व मनाया जाता है।
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दीपक, पवन, राजेश ने बताया कि छठ व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस दौरान व्रती 36 घंटे से भी ज्यादा समय के लिए निर्जला व्रत करके छठी मैया और भगवान सूर्य की उपासना करते हैं।
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पंडित वेदप्रकाश ने बताया कि छठ पर्व में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि सूर्य को जीवन का कारक माना जाता है। वह सौरमंडल का केंद्र है और सभी ग्रहों को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करता है। छठ पूजा पर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर भक्तजन सूर्य देवता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करते हैं। मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है और संतान को लंबी आयु व स्वस्थ जीवन का भी आशीर्वाद मिलता है।