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Rewari News: उल्लास योजना... 25 हजार निरक्षरों को साक्षर बनाने की तैयारी
Sun, 25 May 2025 12:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 25 May 2025 12:09 AM IST
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सर्वे के दौरान पैन पकड़कर लिखना सीखती बुजुर्ग महिला। स्रोत : विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। शिक्षा विभाग ने उल्लास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में जिले के 25515 निरक्षरों को साक्षर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए 400 सर्वेक्षक लगाए गए हैं। प्रत्येक गांव में निरक्षर की खोज के लिए एक सर्वेक्षक की नियुक्ति की गई है।
योजना का उद्देश्य वर्ष 2027 तक प्रदेश के निरक्षरों को साक्षर बनाना है। योजना के तहत निरक्षरों को पढ़ने, हस्ताक्षर करने निपुण बनाया जाएगा। उल्लास योजना के तहत प्रदेश में कुल 9 लाख और जिले के 25515 निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि मार्च 2026 तक कुल 25515 निरक्षरों की परीक्षा ली जाएगी। शिक्षा विभाग जिले के 4500 निरक्षरों की परीक्षा पूरी करवा चुका है। वर्ष 2024 में जिले के 9 हजार निरक्षरों का पंजीकरण किया गया था।
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एक हजार निरक्षरों का कराया ऑफलाइन पंजीकरण
शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने वर्ष 2025-26 के लिए 1 हजार निरक्षरों का ऑफलाइन पंजीकरण किया है। इनका जल्द ही ऑनलाइन पंजीकरण होगा। इसके अलावा जिले के 25 हजार और निरक्षराें को योजना से जोड़ने का लक्ष्य है। स्वयंसेवक पंजीकृत निरक्षरों को उनके घर या गांव में बने उल्लास चेतना केंद्र में 6 माह में 200 घंटे पढ़ाकर उन्हें साक्षर बनाएंगे। पहले इन लोगों को कक्षा पहली व दूसरी का पाठ्यक्रम पढ़ाकर शिक्षित बनाया जाएगा। इसके बाद इच्छुक लोग कक्षा तीसरी के लिए परीक्षा की तैयारी कर सकेंगे।
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अधिक आयु के लोगों को सशक्त बनाना उद्देश्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के अनुसार भारत सरकार ने 2022 से पांच साल की अवधि के लिए न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम के तहत उल्लास नामक केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की थी। योजना का प्राथमिक उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी लोगों को सशक्त बनाना है, जो किसी कारणवश शिक्षित नहीं हो सके। ऐसे लोगों को शिक्षित करने का अवसर दिया जा रहा है।
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वर्जन
उल्लास योजना के तहत जिले के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए 400 सर्वेक्षक नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक गांव में नियुक्त एक सर्वेक्षक को निरक्षरों की तलाश कर उनका पंजीकरण करवाने की जिम्मेदारी दी गई है।-मनदीप कुमार, जिला उल्लास कोऑर्डिनेटर, रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। शिक्षा विभाग ने उल्लास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में जिले के 25515 निरक्षरों को साक्षर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए 400 सर्वेक्षक लगाए गए हैं। प्रत्येक गांव में निरक्षर की खोज के लिए एक सर्वेक्षक की नियुक्ति की गई है।
योजना का उद्देश्य वर्ष 2027 तक प्रदेश के निरक्षरों को साक्षर बनाना है। योजना के तहत निरक्षरों को पढ़ने, हस्ताक्षर करने निपुण बनाया जाएगा। उल्लास योजना के तहत प्रदेश में कुल 9 लाख और जिले के 25515 निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
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अधिकारियों का कहना है कि मार्च 2026 तक कुल 25515 निरक्षरों की परीक्षा ली जाएगी। शिक्षा विभाग जिले के 4500 निरक्षरों की परीक्षा पूरी करवा चुका है। वर्ष 2024 में जिले के 9 हजार निरक्षरों का पंजीकरण किया गया था।
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एक हजार निरक्षरों का कराया ऑफलाइन पंजीकरण
शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने वर्ष 2025-26 के लिए 1 हजार निरक्षरों का ऑफलाइन पंजीकरण किया है। इनका जल्द ही ऑनलाइन पंजीकरण होगा। इसके अलावा जिले के 25 हजार और निरक्षराें को योजना से जोड़ने का लक्ष्य है। स्वयंसेवक पंजीकृत निरक्षरों को उनके घर या गांव में बने उल्लास चेतना केंद्र में 6 माह में 200 घंटे पढ़ाकर उन्हें साक्षर बनाएंगे। पहले इन लोगों को कक्षा पहली व दूसरी का पाठ्यक्रम पढ़ाकर शिक्षित बनाया जाएगा। इसके बाद इच्छुक लोग कक्षा तीसरी के लिए परीक्षा की तैयारी कर सकेंगे।
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अधिक आयु के लोगों को सशक्त बनाना उद्देश्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के अनुसार भारत सरकार ने 2022 से पांच साल की अवधि के लिए न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम के तहत उल्लास नामक केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की थी। योजना का प्राथमिक उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी लोगों को सशक्त बनाना है, जो किसी कारणवश शिक्षित नहीं हो सके। ऐसे लोगों को शिक्षित करने का अवसर दिया जा रहा है।
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उल्लास योजना के तहत जिले के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए 400 सर्वेक्षक नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक गांव में नियुक्त एक सर्वेक्षक को निरक्षरों की तलाश कर उनका पंजीकरण करवाने की जिम्मेदारी दी गई है।-मनदीप कुमार, जिला उल्लास कोऑर्डिनेटर, रेवाड़ी।