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Rewari News: पीसीबी की टीम ने साहबी बैराज और चिह्नित इलाकों के पानी के लिए नमूने

Tue, 17 Feb 2026 11:10 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 17 Feb 2026 11:10 PM IST
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The PCB team collected water samples from Sahibi Barrage and identified areas.
साहबी बैराज की मौजूदा दशा। संवाद
रेवाड़ी। साहबी बैराज में बढ़ता जल प्रदूषण अब गंभीर पर्यावरणीय संकट का रूप ले चुका है। इसको गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने साहबी बैराज और आसपास के चिह्नित स्थानों से पानी के सैंपल लिए हैं। पीसीबी ने यह कार्रवाई हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति के चेयरमैन व विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के निर्देश पर की।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रेवाड़ी के क्षेत्रीय कार्यालय के एसडीओ अजय यादव टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीम ने साहबी बैराज और आसपास उन स्थानों से पानी के नमूने लिए जहां औद्योगिक अपशिष्ट मिलने की आशंका है।
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सैंपल प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद पानी में मौजूद रसायनों और प्रदूषण के स्तर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी औद्योगिक इकाई या प्लांट की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उधर, ग्रामीणों ने प्रशासन से मृत पशुओं को तुरंत हटाने, प्रदूषण के स्रोत को बंद करने और दोषी इकाइयों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट और गहरा सकता है।

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केमिकल युक्त पानी के कारण हालत चिंताजनक
दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित इस बैराज में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों और औद्योगिक इकाइयों से छोड़े जा रहे केमिकल युक्त पानी के कारण स्थिति चिंताजनक हो गई है। बैराज के पानी में मछलियों, पक्षियों और अन्य पशुओं के शव पड़े मिलने से लोग परेशान हैं। स्थानीय निवासी धीरज व रामकुमार ने बताया कि लंबे समय से औद्योगिक अपशिष्ट और अशोधित सीवर का पानी बैराज में डाला जा रहा है। इससे न केवल जल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, बल्कि आसपास की खेती, पशुधन और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जहरीला पानी पशु-पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। शवों के कई दिनों तक पानी में पड़े रहने से दुर्गंध फैल रही है जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों को भूजल प्रदूषित होने की भी आशंका सता रही है।
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