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पीटाई से गर्भस्थ शिशु की गई जान
ब्यूरो/अमर उजाला रेवाड़ी
Updated Fri, 06 Nov 2015 01:06 AM IST
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रेवाड़ी। जमीन के विवाद में गर्भवती महिला की पीटाई से छह माह के गर्भस्थ शिशु की जान चली गई। पूरे मामले में सब जानते हुए सामान्य अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही भी सामने आई है। पीटाई के तीन दिन बाद ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने मृत शिशु को निकाला और बिना पुलिस को सूचना दिए पिता को सौंप दिया। पिता सारी रात रखवाली करता रहा। पीडि़त की सूचना पर पुलिस ने बृहस्पतिवार को शिशु का पोस्टमार्टम करवाया।
घटना डहीना के गोठड़ा टप्पा गांव की है। गांव निवासी ब्रजपाल का गांव के ही एक परिवार के कुछ लोगों से खेत की जमीन को लेकर विवाद है। इसकी सुनवाई पुलिस के कुछ आलाधिकारी कर रहे थे। 1 नवंबर को दूसरे पक्ष ने खेत में काम कर रही ब्रजपाल की छह माह की गर्भवती पत्नी आशा देवी को बुरी तरह पीटा। घटना के बाद आरोपी भाग गए। ब्रजपाल अपनी पत्नी को लेकर सामान्य अस्पताल के प्रसव वार्ड में डॉक्टरों के चक्कर काटता रहा। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उस दिन सिर्फ दवाई देकर इतिश्री कर ली। बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुई, प्रसूता वार्ड में गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद दर्द से कराह रही महिला का दो दिन बाद ३ नवंबर देर रात ऑपरेशन कर मृत शिशु को निकाला गया। ब्रजपाल ने बताया कि डॉक्टरों ने पुलिस को बिना सूचना दिए मृत शिशु को उसको सौंप दिया और वह मृत शिशु को लेकर रातभर रखवाली करता रहा। बुधवार सुबह उसकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने कागजी कार्रवाई की तो बृहस्पतिवार को शिशु का पोस्टमार्टम हो सका। फिलहाल अस्पताल प्रशासन मामले में हुई लापरवाही से खुद को दरकिनार कर रहा है।
संभाल के रखना, वर्ना कुत्ते नोंच लेंगे
आशा देवी के पति ब्रजपाल ने बताया कि मृत शिशु को ऑपरेशन कर निकाला और डॉक्टरों ने उसे सौंप दिया। साथ ही हिदायत दी कि संभाल के रखना, वर्ना अस्पताल कैंपस में घूम रहे कुत्ते नोच लेंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने पुलिस तक को मामले की जानकारी देना भी जरूरी नहीं समझी। रातभर वह कुत्तों से भ्रूण को बचाता रहा और सुबह उसने ही पुलिस को सूचना दी।
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आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
उधर पुलिस ने ०४ नवंबर को अमित, चेतन प्रकाश, जयसिंह उर्फ बंसी, हनुमान, बनवारी लाल, सुरेंद्र, मुरारी, ओमप्रकाश, भीम, अनिल पर बृजपाल, उसकी पत्नी आशा देवी और भाई के साथ लाठी-डंडों के बल पर मारपीट करने और पत्नी के पेट में पल रहे बच्चे को भी मौत के घाट उतार उतारने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। डहीना चौकी प्रभारी एसआई वीर सिंह ने बताया कि पीडि़त के बयानों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। मौका मुआयना करने के बाद ही आरोपियों की तलाश की जा रही है।
कोट्स
अपराध और पुलिस से जुड़े मामले में डॉक्टरों को पुलिस इन्फोर्मेशन देना जरूरी होता है। अगर इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है तो जांच कराई जाएगी। - डॉ. सुदर्शन पंवार, अस्पताल इंचार्ज, नागरिक अस्पताल
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घटना डहीना के गोठड़ा टप्पा गांव की है। गांव निवासी ब्रजपाल का गांव के ही एक परिवार के कुछ लोगों से खेत की जमीन को लेकर विवाद है। इसकी सुनवाई पुलिस के कुछ आलाधिकारी कर रहे थे। 1 नवंबर को दूसरे पक्ष ने खेत में काम कर रही ब्रजपाल की छह माह की गर्भवती पत्नी आशा देवी को बुरी तरह पीटा। घटना के बाद आरोपी भाग गए। ब्रजपाल अपनी पत्नी को लेकर सामान्य अस्पताल के प्रसव वार्ड में डॉक्टरों के चक्कर काटता रहा। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उस दिन सिर्फ दवाई देकर इतिश्री कर ली। बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुई, प्रसूता वार्ड में गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद दर्द से कराह रही महिला का दो दिन बाद ३ नवंबर देर रात ऑपरेशन कर मृत शिशु को निकाला गया। ब्रजपाल ने बताया कि डॉक्टरों ने पुलिस को बिना सूचना दिए मृत शिशु को उसको सौंप दिया और वह मृत शिशु को लेकर रातभर रखवाली करता रहा। बुधवार सुबह उसकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने कागजी कार्रवाई की तो बृहस्पतिवार को शिशु का पोस्टमार्टम हो सका। फिलहाल अस्पताल प्रशासन मामले में हुई लापरवाही से खुद को दरकिनार कर रहा है।
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संभाल के रखना, वर्ना कुत्ते नोंच लेंगे
आशा देवी के पति ब्रजपाल ने बताया कि मृत शिशु को ऑपरेशन कर निकाला और डॉक्टरों ने उसे सौंप दिया। साथ ही हिदायत दी कि संभाल के रखना, वर्ना अस्पताल कैंपस में घूम रहे कुत्ते नोच लेंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने पुलिस तक को मामले की जानकारी देना भी जरूरी नहीं समझी। रातभर वह कुत्तों से भ्रूण को बचाता रहा और सुबह उसने ही पुलिस को सूचना दी।
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आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
उधर पुलिस ने ०४ नवंबर को अमित, चेतन प्रकाश, जयसिंह उर्फ बंसी, हनुमान, बनवारी लाल, सुरेंद्र, मुरारी, ओमप्रकाश, भीम, अनिल पर बृजपाल, उसकी पत्नी आशा देवी और भाई के साथ लाठी-डंडों के बल पर मारपीट करने और पत्नी के पेट में पल रहे बच्चे को भी मौत के घाट उतार उतारने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। डहीना चौकी प्रभारी एसआई वीर सिंह ने बताया कि पीडि़त के बयानों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। मौका मुआयना करने के बाद ही आरोपियों की तलाश की जा रही है।
कोट्स
अपराध और पुलिस से जुड़े मामले में डॉक्टरों को पुलिस इन्फोर्मेशन देना जरूरी होता है। अगर इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है तो जांच कराई जाएगी। - डॉ. सुदर्शन पंवार, अस्पताल इंचार्ज, नागरिक अस्पताल