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Rewari News: प्रदूषण का स्रोत ढूंढने को लेकर जिले में नहीं शुरू हुआ अध्ययन

Sun, 10 Dec 2023 11:27 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sun, 10 Dec 2023 11:27 PM IST
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Study not started in the district to find the source of pollution
रेवाड़ी। बढ़ते प्रदूषण के कारण भविष्य को लेकर भी चिंता सताने लगी है। इसको देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसका अध्ययन करने के लिए कहा था। ताकि इसमें यह पता लगाया जा सके कि जिले में प्रदूषण का कारण क्या है। अभी तक जिले में यह अध्ययन शुरू ही नहीं हुआ है, जबकि जिला एनसीआर क्षेत्र में आता है।
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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) को दी गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हरियाणा में मात्र दो जिलों में ही अभी अध्ययन शुरू हुआ है, जो बाकी एनसीआर के क्षेत्र हैं, वहां पर अभी अध्ययन की शुरुआत ही नहीं हुई है। कुछ जिले में प्रक्रिया जरूर शुरू की गई है। दूसरी तरफ जिले में इस साल प्रदूषण का स्तर काफी खराब रहा। गत दिनों हालात ज्यादा बिगड़ गए थे, एक्यूआई 400 के पास पहुंच गया था। यह स्थिति प्रदूषण की गंभीर श्रेणी में माना जाता है। अध्ययन शुरू क्यों नहीं हुआ है। फिलहाल इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। अधिकारियों का कहना है कि अभी इस पर बात चल रही है।
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तीन सप्ताह में ताजा कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के आदेश

कुछ दिनों पहले एनजीटी के आदेश पर सीएक्यूएम ने मामले पर अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी। रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि वर्ष 2024 में बेहतर वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशेष योजना पेश करें। योजना में बताया जाए कि क्या किया जाना चाहिए। इसकी कार्रवाई योजना क्या है। फिलहाल एनजीटी ने तीन सप्ताह में ताजा कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देते हुए सुनवाई तीन जनवरी तक के लिए टाल दी है।
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धारूहेड़ा और बावल औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से प्रदूषण के हैं गढ़

धारूहेड़ा-भिवाड़ी, बावल इन क्षेत्रों में काफी अधिक प्रदूषण दर्ज किया जाता है। हालांकि, यहां पर स्थिति सुधार की भी कोशिश की गई, मगर कामयाबी नहीं मिल पाई है। सबसे ज्यादा हालात धारूहेड़ा में खराब होते हैं। यहां पर हर साल प्रदूषण की वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। धारूहेड़ा के बाद बावल दूसरे नंबर पर आता है। यह भी औद्योगिक क्षेत्र बनता जा रहा है। यहां पर भी प्रदूषण की वजह से काफी परेशानी होती है।

प्रदूषण से आंखों में जलन के साथ सांस लेने में होती है परेशानी

पिछले दिनों जब प्रदूषण का स्तर बढ़ा था, तब अस्पताल में रोजाना सांस की तकलीफ और आंखों में जलन के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही थी। सिविल अस्पताल में आंखों में जलन के रोजाना 150 के आसपास मरीज सामने आ रहे थे। सांस की तकलीफ के करीब 50 से 60 मरीज रोजाना दर्ज किए जा रहे थे।


एक्यूआई की छह कैटेगरी

0 और 50 : अच्छा
51 और 100 : संतोषजनक
101 और 200 : मध्यम
201 और 300 : खराब
301 और 400 : बेहद खराब
401 से 500 : गंभीर

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कोट
हर साल प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, जो शरीर के लिए काफी हानिकारक होता है। प्रदूषण को कम तभी किया जा सकता है, जब समाज भी सहयोग करेगा। प्रदूषण को कम करने के लिए जागरूकता जरूरी है। -

हरीश, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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