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Rewari News: नौ हजार स्थानों से मिट्टी के लिए जाएंगे नमूने, तैयारी होगी रिपोर्ट
Mon, 04 Dec 2023 11:37 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 04 Dec 2023 11:37 PM IST
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रेवाड़ी। जिले में कृषि विभाग की ओर से नौ हजार स्थानों से मिट्टी के नमूने लेने का कार्य शुरू हो चुका है। इसके लिए विभाग की तरफ से करीब 50 कर्मचारियों को काम पर लगाया गया है। ये कर्मचारी गांव-गांव जाकर मिट्टी के सैंपल ले रहे हैं। इस बार कृषि विभाग की तरफ से मिट्टी के नमूने की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट को आगे मुख्यालय भेजा जाएगा। इसके बाद जिस प्रकार से निर्देश आते हैं, उसी हिसाब से किसानों को उपाय बताए जाएंगे।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के माध्यम हर साल मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाया जाता है। योजना का उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता, संरचना एवं सेहत को बढ़ाना है, जिस वजह से मिट्टी की कृषि उत्पादकता लगातार बनी रहती है। मृदा में होने वाले कटाव, पोषक तत्वों की कमी एवं मृदा के क्षरण को कम करके किसान उच्च गुणवत्ता वाली फसलों की पैदावार कर पाते हैं। योजना के अंतर्गत एक कार्ड दिया जाता है, जिसके माध्यम से किसान अपने खेत की जमीन की मिट्टी का प्रकार जान सकता है। यदि किसानों को अपने खेत की मिट्टी का प्रकार पता होगा तो उन्हें मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार फसल लगाने में आसानी होगी और अच्छी खेती की जा सकेगी एवं ज्यादा मुनाफा प्राप्त किया जा सकेगा।
डीसी राहुल हुड्डा ने बताया कि सरकार की ओर से स्वस्थ धरा-खेत हरा के नारा के साथ मृदा स्वास्थ्य कार्ड (स्वाॅयल हेल्थ कार्ड) स्कीम की शुरुआत की गई थी। इस योजना के अंतर्गत जो हेल्थ कार्ड किसानों को प्रदान किया जाता है, उसमें किसानों को अपने खेत के अनुसार फसल लगाने के सुझाव भी प्रदान किए जाते हैं। कार्ड के माध्यम से किसानों को यह भी जानकारी प्रदान की जाती है कि मिट्टी के अंदर कितनी मात्रा में क्या चीज है एवं किस फसल के लिए कितनी खाद और कौन सी खाद का उपयोग किया जाए।
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मिट्टी में जिंक की पाई गई थी कमी
इसी साल मार्च तक करीब मिट्टी के 80 हजार नमूने लिए गए थे। तब 15 हजार नमूनों की जांच की जा चुकी थी। जांच के दौरान मिट्टी में ज्यादातर पोषक तत्व जिंक की सबसे ज्यादा कमी मिली थी। इससे फसल में पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और नष्ट हो जाती हैं। जस्ता (जिंक) पौधों में क्लोरोफिल के निर्माण में सहायक होता है, जिससे पत्तियां हरी रहती हैं। इसके अलावा यह तत्व पौधों में नाइट्रोजन के पाचन में भी सहायक होता है।
मिट्टी में होते हैं कुल 16 पोषक तत्व
मृदा वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी में कुल 16 पोषक तत्व होते हैं, जो कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, बोरान, मैगनीज, मोलिब्डेनम, क्लोरीन है। भारत में कुल आठ प्रकार की मिट्टी पाई जाती है, जिनकी उर्वरक क्षमता अलग-अलग है। इसमें जलोढ़ मिट्टी, काली मिट्टी, लाल और पीली मिट्टी, जंगली मिट्टी, मरू मिट्टी, लैटेराइट मिट्टी, नमकीन मिट्टी और पीट मिट्टी शामिल है।
कोट
किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग अर्थात मृदा स्वास्थ्य परीक्षण केंद्र पर मिट्टी के सैंपल को जमा करवा सकते हैं। कुछ समय बाद मृदा स्वास्थ्य प्रशिक्षण कार्ड किसान को उपलब्ध करा दिया जाता है।
डॉ संजय, कृषि विभाग अधिकारी रेवाड़ी।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के माध्यम हर साल मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाया जाता है। योजना का उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता, संरचना एवं सेहत को बढ़ाना है, जिस वजह से मिट्टी की कृषि उत्पादकता लगातार बनी रहती है। मृदा में होने वाले कटाव, पोषक तत्वों की कमी एवं मृदा के क्षरण को कम करके किसान उच्च गुणवत्ता वाली फसलों की पैदावार कर पाते हैं। योजना के अंतर्गत एक कार्ड दिया जाता है, जिसके माध्यम से किसान अपने खेत की जमीन की मिट्टी का प्रकार जान सकता है। यदि किसानों को अपने खेत की मिट्टी का प्रकार पता होगा तो उन्हें मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार फसल लगाने में आसानी होगी और अच्छी खेती की जा सकेगी एवं ज्यादा मुनाफा प्राप्त किया जा सकेगा।
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डीसी राहुल हुड्डा ने बताया कि सरकार की ओर से स्वस्थ धरा-खेत हरा के नारा के साथ मृदा स्वास्थ्य कार्ड (स्वाॅयल हेल्थ कार्ड) स्कीम की शुरुआत की गई थी। इस योजना के अंतर्गत जो हेल्थ कार्ड किसानों को प्रदान किया जाता है, उसमें किसानों को अपने खेत के अनुसार फसल लगाने के सुझाव भी प्रदान किए जाते हैं। कार्ड के माध्यम से किसानों को यह भी जानकारी प्रदान की जाती है कि मिट्टी के अंदर कितनी मात्रा में क्या चीज है एवं किस फसल के लिए कितनी खाद और कौन सी खाद का उपयोग किया जाए।
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मिट्टी में जिंक की पाई गई थी कमी
इसी साल मार्च तक करीब मिट्टी के 80 हजार नमूने लिए गए थे। तब 15 हजार नमूनों की जांच की जा चुकी थी। जांच के दौरान मिट्टी में ज्यादातर पोषक तत्व जिंक की सबसे ज्यादा कमी मिली थी। इससे फसल में पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और नष्ट हो जाती हैं। जस्ता (जिंक) पौधों में क्लोरोफिल के निर्माण में सहायक होता है, जिससे पत्तियां हरी रहती हैं। इसके अलावा यह तत्व पौधों में नाइट्रोजन के पाचन में भी सहायक होता है।
मिट्टी में होते हैं कुल 16 पोषक तत्व
मृदा वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी में कुल 16 पोषक तत्व होते हैं, जो कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, बोरान, मैगनीज, मोलिब्डेनम, क्लोरीन है। भारत में कुल आठ प्रकार की मिट्टी पाई जाती है, जिनकी उर्वरक क्षमता अलग-अलग है। इसमें जलोढ़ मिट्टी, काली मिट्टी, लाल और पीली मिट्टी, जंगली मिट्टी, मरू मिट्टी, लैटेराइट मिट्टी, नमकीन मिट्टी और पीट मिट्टी शामिल है।
कोट
किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग अर्थात मृदा स्वास्थ्य परीक्षण केंद्र पर मिट्टी के सैंपल को जमा करवा सकते हैं। कुछ समय बाद मृदा स्वास्थ्य प्रशिक्षण कार्ड किसान को उपलब्ध करा दिया जाता है।
डॉ संजय, कृषि विभाग अधिकारी रेवाड़ी।