{"_id":"68ebf53151b812aafe0f7c72","slug":"preparations-to-buy-anti-smog-guns-to-control-pollution-rewari-news-c-198-1-rew1001-227362-2025-10-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एंटी-स्मॉग गन खरीदने की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एंटी-स्मॉग गन खरीदने की तैयारी
Mon, 13 Oct 2025 12:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 13 Oct 2025 12:06 AM IST
विज्ञापन
धारूहेड़ा। औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण स्तर पर नियंत्रण पाने के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने धारूहेड़ा नगर पालिका को एंटी स्मॉग गन खरीदने का निर्देश दिया था। अब एंटी-स्माॅग गन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नगर के प्रमुख प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में एंटी-स्मॉग गन लगाई जाएगी।
एंटी स्मॉग गन मुख्य रूप से निर्माण स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और अधिक प्रदूषण प्रभावित इलाकों में धूल और कणों को दबाने के लिए उपयोग में लाई जाएगी। इससे वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लग सकेगा। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण धारूहेड़ा में प्रदूषण का स्तर सामान्य से अधिक रहता है। भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियों का धुआं भी शहर के प्रदूषण को बढ़ाने में सहायक होता है।
सर्दियों के दिनों में हवा का बहाव धीमा हो जाने के कारण ये प्रदूषक लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी निपुण गुप्ता ने बताया कि वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए धारूहेड़ा नगर पालिका को एंटी स्मॉग गन खरीदने को कहा गया है। मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही यह गन नगर के प्रमुख प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में लगाई जाएगी। इस योजना का उद्देश्य औद्योगिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है।
विज्ञापन
ऐसे काम करती है एंटी स्मॉग गन
एंटी स्मॉग गन पानी के टैंक से जुड़ी होती है और एक शक्तिशाली प्रोपेलर या पंखे की मदद से पानी को उच्च दबाव पर बहुत ही बारीक बूंदों (लगभग 50 से 100 माइक्रोन) के रूप में हवा में छिड़कती है। ये बूंदें हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों को आकर्षित कर नीचे गिरा देती है। इससे कुछ ही मिनटों में वायु गुणवत्ता में सुधार देखा जा सकता है। यह तकनीक दिल्ली-एनसीआर और अन्य बड़े शहरों में सफल साबित हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार धारूहेड़ा में एंटी स्मॉग गन का उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों, व्यस्त सड़कों और निर्माण स्थलों पर किया जाएगा। इससे न केवल प्रदूषण स्तर में कमी आएगी बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बोर्ड का कहना है कि यदि यह प्रयास सफल रहा तो आगे चलकर अन्य औद्योगिक नगरों में भी इस योजना को लागू किया जाएगा।
विज्ञापन
एंटी स्मॉग गन मुख्य रूप से निर्माण स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और अधिक प्रदूषण प्रभावित इलाकों में धूल और कणों को दबाने के लिए उपयोग में लाई जाएगी। इससे वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लग सकेगा। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण धारूहेड़ा में प्रदूषण का स्तर सामान्य से अधिक रहता है। भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियों का धुआं भी शहर के प्रदूषण को बढ़ाने में सहायक होता है।
विज्ञापन
सर्दियों के दिनों में हवा का बहाव धीमा हो जाने के कारण ये प्रदूषक लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी निपुण गुप्ता ने बताया कि वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए धारूहेड़ा नगर पालिका को एंटी स्मॉग गन खरीदने को कहा गया है। मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही यह गन नगर के प्रमुख प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में लगाई जाएगी। इस योजना का उद्देश्य औद्योगिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है।
विज्ञापन
ऐसे काम करती है एंटी स्मॉग गन
एंटी स्मॉग गन पानी के टैंक से जुड़ी होती है और एक शक्तिशाली प्रोपेलर या पंखे की मदद से पानी को उच्च दबाव पर बहुत ही बारीक बूंदों (लगभग 50 से 100 माइक्रोन) के रूप में हवा में छिड़कती है। ये बूंदें हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों को आकर्षित कर नीचे गिरा देती है। इससे कुछ ही मिनटों में वायु गुणवत्ता में सुधार देखा जा सकता है। यह तकनीक दिल्ली-एनसीआर और अन्य बड़े शहरों में सफल साबित हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार धारूहेड़ा में एंटी स्मॉग गन का उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों, व्यस्त सड़कों और निर्माण स्थलों पर किया जाएगा। इससे न केवल प्रदूषण स्तर में कमी आएगी बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बोर्ड का कहना है कि यदि यह प्रयास सफल रहा तो आगे चलकर अन्य औद्योगिक नगरों में भी इस योजना को लागू किया जाएगा।